38 साल, 34 गैंडे और 25 बच्चे... देश में पहले नंबर पर पटना ZOO, बना राइनो का नया ठिकाना
पटना जू ने 38 वर्षों में 34 गैंडों को आवास दिया और 25 बच्चों का जन्म कराया, जिससे यह देश ...और पढ़ें

पटना जू में गैंडों का बढ़ा कुनबा, अब वीटीआर में बसेगा संसार (AI Generated Image)
HighLights
पटना जू में 38 वर्षों में 25 गैंडा बच्चों का जन्म कराया।
वाल्मीकि नगर व्याघ्र आरक्ष में गैंडा पुनर्वास कार्यक्रम की तैयारी तेज।
राजगीर जू सफारी में भी गैंडा संरक्षण की योजना बनाई गई।
जागरण संवाददाता, पटना। पटना जू (Patna Zoo) में 38 वर्षों के दौरान 34 गैंडे का आवास और 25 बच्चों का जन्म बड़ी उपलब्धि है। जू ने देश में गैंडों की संख्या में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसके पीछे यहां के पशु पालकों, पशु चिकित्सकों एवं प्रबंधन की भूमिका है।
प्रदेश में गैंडा संरक्षण को प्राकृतिक अधिवास और विस्तार देने को तैयारी तेज हो गई। पटना जू में गैंडों का कुनबा बढ़ने के साथ वाल्मीकि नगर व्याघ्र आरक्ष (वीटीआर) में गैंडे का संसार बसेगा। यहां गैंडा पुनर्वास एवं संरक्षण कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
आगामी एक से दो महीने में इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर इसे लागू कर दिया जाएगा। विश्व गैंडे दिवस पर पटना जू में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पर्याववरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने कही।
मंत्री ने कहा कि असम और पश्चिम बंगाल से गैंडा लाकर वीटीआर में खास संरक्षित क्षेत्र बनाकर इसकी पहल शुरू कर दी जाएगी। राजगीर जू सफारी में भी गैंडा लाने और उसके संरक्षण की योजना तैयार की गई है। मंत्री ने जू स्थित गैंडे बाड़े में पहुंच कर चारा खिलाए।
उन्होंने कहा कि यहां के पशुओं की देखभाल करने वाले दैनिक श्रमिकों की राशि भुगतान में वृद्धि करें। इनके सहयोग से ही पटना जू के वन्य जीव स्वस्थ होने के साथ पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। उन्होंने गैंडा संरक्षण में योगदान देने वाले दैनिक कर्मियों और चिकित्सकीय पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) अरविंद सिंह ने कहा कि नेपाल के चितवन नेशनल पार्क से पिछले तीन-चार वर्षों में दो गैंडे वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष में आकर रह रहे हैं। दोनों नर हैं। वीटीआर की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक अधिवास और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए करीब दो वर्ष पहले गैंडा संरक्षण की संभावनाओं का आकलन कराया गया था।
उन्होंने कहा कि अध्ययन में यहां गैंडा संरक्षण की पर्याप्त संभावनाएं सामने आईं। इसी के आधार पर अब गैंडा पुनर्वास कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। गैंडा संरक्षण को चिड़ियाघर तक सीमित न रखते हुए प्राकृतिक अधिवास में भी मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
विभाग का लक्ष्य है कि अगले विश्व गैंडा दिवस से पहले राजगीर जू सफारी और वीटीआर में गैंडा संरक्षण की योजनाओं को धरातल पर उतारने की दिशा कार्य होगा। पर्यटक असम के काजीरंगा और पश्चिम बंगाल के वन क्षेत्रों में गैंडा देखने पहुंचते हैं, उसी तरह भविष्य में वीटीआर और राजगीर जू सफारी भी गैंडा दर्शन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो सकते हैं।
इससे बिहार में वन्यजीव आधारित पर्यटन को नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों और रोजगार के अवसरों का विस्तार होने की उम्मीद है।
गैंडा प्रजनन में जू को मिली पहचान:
गैंडा संरक्षण और प्रजनन के क्षेत्र में पटना जू की उपलब्धि को देश-विदेश में पहचान मिली है। पटना जू के निदेशक हेमंत पाटिल ने बताया कि पटना जू से रांची, दिल्ली, कानपुर, हैदराबाद, मैसूर, चेन्नई के अलावा अमेरिका के सेन डियागो जू यूएसए, केवडिया जू में यहां के गैंडे वहां की शोभा बढ़ा रहे हैं।
अलग-अलग जगहों पर 11 गैंडे भेजे गए हैं। इसके कारण गैंडों के प्रजनन एवं संरक्षण के प्रयासों से पटना जू को एक अलग पहचान मिली है। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण नई दिल्ली के सहयोग से 2019 में पटना जू परिसर में प्रजनन केंद्र की स्थापना की गई थी।
पटना जू में गैंडों की चार ब्लड लाइन उपलब्ध है जो दुनिया में नहीं है। विश्व में गैंडों की कुल संख्या करीब 28-30 हजार के बीच है। जबकि, भारतीय एक सींग वाले गैंडों की संख्या लगभग चार हजार है। दुनिया में गैंडों की पांच प्रजातियां पाई जाती है।
मौके पर विभाग के मुख्य वन संरक्षक (आईटी) एस. चंद्रशेखर, विशेष सचिव आलोक कुमार, मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन एवं मानव संसाधन विकास) अमित कुमार, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक पटना डॉ. नेसामणि, बिहार वेटनरी कॉलेज के डीन डॉ. पल्लव शेखर समेत विभागीय पदाधिकारी, पशु चिकित्सक, वनकर्मी, शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।
