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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 24, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Lift and Escalator: बिहार में लिफ्ट और एस्केलेटर लगाने के लिए आ गया नया नियम, अब सरकार से लेनी होगी अनुमति

    Updated: Wed, 24 Jul 2024 08:04 PM (GMT+05:30)

    Bihar News घर या मार्केट में कहीं लिफ्ट और एस्केलेटर लगवाना है तो आपको बिहार सरकार के नए नियम के बारे में जान लेनी चाहिए। अब से लिफ्ट और एस्केलेटर के ...और पढ़ें

    प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर
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    HighLights

    1. 20 साल में बदलना होगा लिफ्ट और एस्केलेटर
    2. लिफ्ट और एस्केलेटर के लिए खर्च करने होंगे 10 हजार
    3. नियमों के उल्लंघन पर होगी तीन महीने की सजा

    राज्य ब्यूरो, पटना। अब भवनों में लिफ्ट और एस्केलेटर के लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी। विद्युत निरीक्षणालय से पंजीकरण कराना होगा। 10 हजार रुपये का भुगतान भी करना होगा।

    पंजीयन की अनिवार्यता पुराने उपभोक्ताओं के लिए भी है। अधिकतम 20 साल में इन्हें बदलना भी होगा। क्योंकि यह सुरक्षा के लिए जरूरी है। ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बुधवार को विधानसभा में बिहार लिफ्ट एवं एस्कलेटर विधेयक, 2024 पेश किया। इसी में लिफ्ट और एस्केलेटर से जुड़े प्रविधान किए गए हैं।

    सदन ने ध्वनिमत से इसे पारित कर दिया। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि नियम का उल्लंघन करने वालाें के लिए सजा का भी प्रविधान किया गया है। तीन महीने की सजा होगी और 50 हजार रुपया जुर्माना देना होगा। गंभीर मामलों में एकसाथ सजा और जुर्माना-दोनों भुगतना होगा।

    इस अधिनियम के अधीन नियुक्त निरीक्षक परिवाद दायर करेंगे। कोई भी न्यायालय इस नियम के अधीन किसी मामले की सुनवाई नहीं करेगा।

    दुर्घटना को लेकर किया गया ये प्रावधान

    लिफ्ट और एस्कलेटर के उपयोग के दौरान कोई दुर्घटना होती है, तो मोटर वाहन की तरह क्षति की भरपाई के लिए थर्ड पार्टी इंश्यारेंस का प्रविधान किया गया है। इसमें इलाज का खर्च और आर्थिक क्षति की भरपाई शामिल है।

    उन्होंने बताया कि विद्युत निरीक्षणालय हरेक तीन वर्ष में जांच कर देखेगा कि लिफ्ट और एस्केलेटर में कोई गड़बड़ी तो नहीं आई है। निरीक्षण के लिए उपभोक्ता को 18 सौ 75 रुपया देना होगा।

    केंद्र सरकार ने पहले ही यह कानून बनाया था। केंद्र ने राज्यों से भी इसे लागू करने की अपेक्षा की थी। इसीलिए विधेयक के जरिए इसे कानून का रूप दिया गया है।

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