यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 04, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Bihar Bridge Collapse: बिहार में 24 घंटे में छह पुल ध्वस्त, नीतीश सरकार ने किस पर फोड़ा ठीकरा?
Bihar Bridge Collapse बिहार में पिछले 24 घंटे में छह पुल ध्वस्त हो गए हैं। सरकार ने इंजीनियरों और ठीकेदारों पर इसका ठीकरा फोड़ा है। लगातार पुल ढहने की ...और पढ़ें

HighLights
- सरकार ने माना इंजीनियरों और ठीकेदारों की कोताही
- पिछले 15 दिनों में नौ पुलों के ढहने को लेकर याचिका दायर
- उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन का निर्देश देने की मांग
जागरण संवाददाता, पटना। Bihar Bridge Collapse बिहार में पुलों के ढहने की बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक लोकहित याचिका दायर की गई है। याचिका द्वारा बिहार सरकार को एक संपूर्ण संरचनात्मक आडिट करने और ध्वस्त या मजबूत करने की आवश्यकता कमजोर पुलों की पहचान करने के लिए एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन का निर्देश देने की मांग की गई है।
यह याचिका पिछले 15 दिनों में नौ पुलों (निर्माणाधीन पुलों सहित) के ढहने के दृष्टिगत दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि भारत में सर्वाधिक बाढ़-ग्रस्त राज्य बिहार है।
पुलों के ढहने से बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर चिंताएं खड़ी होती हैं। वहीं नीतीश सरकार ने इंजीनियरों और ठीकेदारों की कोताही को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।
याचिका में चार जिलों का खास जिक्र
लोकहित याचिका में न केवल आडिट की मांग की गई है, बल्कि एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन की भी मांग की गई है। यह समिति सभी पुलों की विस्तृत जांच और निरंतर निगरानी के लिए जिम्मेदार होगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित हैं।
याचिका में अररिया, सिवान, मधुबनी और किशनगंज जिलों सहित नदी क्षेत्रों के आसपास कई पुलों के ढहने की घटनाओं पर प्रकाश डाला गया है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ब्रजेश सिंह ने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है कि बिहार में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र 68,800 वर्ग किमी है, जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का 73.06 प्रतिशत है। इसलिए, बिहार में पुलों के गिरने की ऐसी नियमित घटनाएं अधिक विनाशकारी हैं, क्योंकि बड़े पैमाने पर लोगों की जान दांव पर लगी है।
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