धनतेरस से भाई दूज तक: दीपावली के 5 पर्व संवारेंगे आपके 5 ग्रह, जानिए क्या है खास कनेक्शन
दीपावली के पांच प्रमुख पर्वों का संबंध ज्योतिष शास्त्र में विभिन्न ग्रहों से बताया गया है। धनतेरस से भाई दूज ...और पढ़ें

धनतेरस से भाई दूज तक हर पर्व का है ग्रहों से विशेष संबंध (AI Generated Image)
HighLights
धनतेरस गुरु-शुक्र से धन-आरोग्य, नरक चतुर्दशी मंगल-केतु से विजय.
दीपावली शुक्र-चंद्रमा से सुख-शांति, गोवर्धन गुरु-शनि से स्थिरता.
भाई दूज चंद्रमा-बुध से भाई-बहन के रिश्ते होते हैं प्रगाढ़.
जागरण संवाददाता, पटना। दीपोत्सव का पर्व केवल दीप जलाने, खरीदारी करने और उत्सव मनाने तक सीमित नहीं है। भारतीय पंचांग और ज्योतिष शास्त्र में धनतेरस से लेकर भाई दूज तक प्रत्येक पर्व का संबंध किसी न किसी ग्रह की ऊर्जा और उसके प्रभाव से जोड़ा गया है।
मान्यता है कि इन दिनों विशेष पूजा, दान, दीपदान और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से संबंधित ग्रहों को अनुकूल बनाने का प्रयास किया जा सकता है।
ज्योतिषाचार्य राकेश झा के अनुसार, दीपोत्सव के पांच प्रमुख पर्व जीवन के पांच महत्वपूर्ण पक्षों धन, आरोग्य, साहस, मानसिक शांति, स्थिरता और पारिवारिक संबंधों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
धनतेरस : गुरु और शुक्र से समृद्धि का संबंध
धनतेरस को धन और आरोग्य की प्राप्ति का पर्व माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इसका संबंध गुरु और शुक्र ग्रह से है। गुरु आयु, आरोग्य, ज्ञान और धर्म के कारक हैं, जबकि शुक्र धन, वैभव और ऐश्वर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस दिन सोना, चांदी, पीतल आदि धातुओं की खरीदारी को शुभ माना जाता है।
हल्दी और पीली वस्तुओं का दान तथा दीपदान करने से गुरु ग्रह की अनुकूलता प्राप्त होने की मान्यता है। मां लक्ष्मी की पूजा और धातुओं की खरीदारी शुक्र ग्रह के शुभता का प्रतीक है।
नरक चतुर्दशी : मंगल और केतु से साहस व नकारात्मकता पर विजय
नरक चतुर्दशी का संबंध मंगल और केतु ग्रह से जोड़ा जाता है। मंगल शौर्य, पराक्रम और साहस के प्रतीक हैं। जबकि, केतु को नकारात्मकता के नाश और आध्यात्मिक ऊर्जा से संबंधित माना जाता है। इस दिन सूर्योदय से पहले उबटन लगाकर तेल स्नान करने की परंपरा है।
हनुमानजी और मां काली की आराधना से मंगल और केतु की अनुकूलता प्राप्त होने की मान्यता है। घर के चारों कोनों में तिल के तेल का दीपक जलाने से शनि और केतु से संबंधित अशुभ प्रभावों की शांति की कामना की जाती है।
दीपावली : शुक्र और चंद्रमा से सुख-शांति का संयोग
दीपावली का सीधा संबंध शुक्र और चंद्रमा से जोड़ा जाता है। शुक्र ऐश्वर्य, सौंदर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं के कारक हैं, जबकि चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक शांति का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इस दिन घी और तेल के दीपक जलाने, मां महालक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा, शंखनाद तथा स्तोत्र पाठ करने की परंपरा है।
घर की पूर्व दिशा को विशेष रूप से सजाकर घी का दीपक जलाने से सकारात्मकता और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। ज्योतिषीय मान्यता है कि इन उपायों से शुक्र और चंद्रमा की अनुकूलता प्राप्त होती है।
गोवर्धन पूजा : गुरु और शनि से स्थिरता व कर्म का संदेश
गोवर्धन पूजा प्रकृति, धर्म और स्थिरता का पर्व है। इसका संबंध गुरु और शनि ग्रह से माना जाता है। गुरु ज्ञान, धर्म और सदाचार के प्रतीक हैं, जबकि शनि कर्म, परिश्रम, अनुशासन और स्थायित्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस दिन गोबर या मिट्टी से गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजा की जाती है।
भगवान श्रीकृष्ण को अन्नकूट के रूप में सात, 11 या 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। जरूरतमंदों को भोजन कराने और अन्नदान करने की परंपरा भी है। धार्मिक मान्यता है कि इससे गुरु और शनि की अनुकूलता के साथ जीवन में स्थिरता और कार्यों में सफलता की कामना पूरी होती है।
भाई दूज : चंद्रमा और बुध से प्रगाढ़ होते रिश्ते
भाई दूज का पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और आत्मीयता का प्रतीक है। ज्योतिष शास्त्र में इसका संबंध चंद्रमा और बुध ग्रह से जोड़ा गया है। चंद्रमा प्रेम, संवेदना और भावनात्मक जुड़ाव के कारक हैं, जबकि बुध संवाद, बुद्धि और विवेक का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इस दिन भाई-बहन एक-दूसरे को तिलक लगाकर साथ भोजन करते हैं और उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं।
चंद्रमा को अर्घ्य देने तथा हरे फल और वस्त्र का दान करने की परंपरा बुध ग्रह की अनुकूलता से जोड़ी जाती है। भाई को शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित उपहार देना भी इस पर्व के भावनात्मक महत्व को बढ़ाता है।
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