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    नहाते समय शरीर के क‍िस हिस्‍से पर पहले डालें पानी? PMCH के डॉक्‍टर ने बताया तरीका, ब्रेन हैमरेज से बचे रहेंगे

    By Nalini Ranjan Edited By: Vyas Chandra
    Updated: Sun, 04 Jan 2026 07:26 PM (IST)

    Health News: ठंड के मौसम में ब्रेन हैमरेज, स्ट्रोक, चक्कर और चेहरे के लकवे के मामले बढ़ रहे हैं। पीएमसीएच के डॉ. गुंजन कुमार ने सलाह दी कि सुबह नहाते ...और पढ़ें

    नहाते समय ध्‍यान रखना जरूरी।

    नहाते समय ध्‍यान रखना जरूरी।

    HighLights

    1. ठंड में ब्रेन हैमरेज, स्ट्रोक के मामले बढ़े।

    2. नहाते समय पहले पैरों पर पानी डालना सुरक्षित।

    3. अनियंत्रित शुगर-बीपी से लकवा का खतरा।

    जागरण संवाददाता, पटना। Hallo Jagran: ठंड के मौसम में हेडेक, चक्कर, चेहरे पर लकवा के मामले अधिक आ रहे हैं।

    इमरजेंसी में ब्रेन हैमरेज, स्ट्रोक के मरीज अधिक आ रहे है। इसके कारण अस्पताल के इंडोर व इमरजेंसी के बेड फूल हो जा रहे है। सर्तकता बरती जाए तो सेहतमंद रहा जा सकता है। 

    गांव में लोग चार-पांच बजे सुबह में ही उठकर सीधे नाॅर्मल पानी से स्नान करने लगते है। यह खतरनाक साबित होता है। क्योंकि पानी व मौसम शीत के कारण ठंड रहता है।

    लोग सीधे पानी सर पर डालते है। ऐसे में ब्रेन हेमरेज या स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे है। स्नान करते समय सबसे पहले पैर पर पानी डालना चाहिए। 

    इसके बाद क्रम से ऊपर जाने पर नहाने के दौरान हैमरेज की संभावना कम रहती है। ऐसे भी मरीज अभी जा रहे है जो सुबह-सुबह उठने पर चक्कर की शिकायत लेकर पहुंच रहे है।

    उन्‍हें लगता है क‍ि सुबह उठने पर दुनिया गोल-गोल नाच रही है, बैठे-बैठे झूला पर होने का अहसास हो होता है। यह असंतुलन के कारण होता है, इसे न्यूरोजिलकल टर्म में वरटाइगो कहा जाता है।

    इसके अतिरिक्त ठंड में चेहरा व कान नहीं ढंकने के कारण फेशियल नर्व डैमेज होने के कारण चेहरे पर लकवा की शिकायत के मरीज भी अधिक पहुंच रहे है।

    साथ ही हेडेक, अचानक तेज सिरदर्द वाले मरीजों की संख्या में भी अधिकता देखी जा रही है। यह बातें रविवार को दैनिक जागरण के लोकप्रिय कार्यक्रम हेलो जागरण में पहुंचे पटना मेडिकल कालेज अस्पताल (PMCH) के न्यूरो मेडिसीन विभाग के प्राध्यापक डा. गुंजन कुमार ने कहीं।

    इस दौरान उन्होंने पाठकों की समस्याओं को सुना व उसका जवाब दिया। प्रस्तुत है चुनींदा प्रश्न व उसके जवाब।

    बांए पैर व कमर की नस दबी है। चलने में परेशानी होती है, क्या करें।  : सूर्यदेव मिश्र, बिहटा।
    - पहले देखना होगा कि नस कहां-कहां नर्व को डैमेज कर रहा है। आवश्यक जांच के बाद उपचार होगा। आप पीएमसीएच आकर दिखाएं।

    माइग्रेन से बचने के क्या उपाय हैं। : शशीभूषण पांडेय, दूजरा।
    - हर दर्द माइग्रेन नहीं होता है। इसको देखना होगा कि आखिर क्यों और क्या हो रहा है। यदि महीने में दो बार दर्द हो रहा है तो दवा से ठीक हो जाएगा।

    यदि दो बार से अधिक दर्द हो रहा है तो आवश्यक जांच कराकर देखना होगा कि क्यों हो रहा है। अधिक उम्र में माइग्रेन नहीं होता है। ऐसे में जांच कराने की जरूरत होती है।

    पिताजी का शुगर हमेशा बढ़ा रहता है, हैमरेज का कितना खतरा है। : अमित कुमार, छपरा।
    - सबसे पहले शुगर को नियंत्रित रखें। यदि बीपी है तो दोनों को नियंत्रित रखें। बगैर डाक्टर की सलाह के बीपी-शुगर की दवा बंद ना करें।

    क्योंकि इससे लकवा, ब्रेन हैमरेज, स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है। यह पांव में सुन्नापन, आंखों के नर्व को भी अधिक प्रभावित करता है। अनियंत्रित बीपी व शुगर पांच गुणा नसों की बीमारी को बढ़ा दे रही है।


    दो वर्ष पहले पैर का फ्रैक्चर हुआ था, पैरोनियल पस दव गया है क्या करें। : राम गोपाल, कंकड़बाग।


    - इसमें नस की जांच करा कर देखना होगा कि नस में कितना जान है। इसके बाद फिजियोथिरेपी करानी होगी। देखना होगा कि कहां-कहां परेशानी हो रही है।

    ठेहुना से नीचे कभी-कभी दर्द तेज रहता है। क्या करें। : विजय लाल खत्री, पटना सिटी। एमपी सिन्हा, कुम्हरार।


    - यह नस की कमजोरी के संकेत है। यह शुगर, विटामिन आदि कई कारणों से हो सकता है। इसको देखना होगा। नस की जांच एनसीएस व एमआर की जांच करा कर किसी विशेषज्ञ या पीएमसीएच में आकर मिल सकते है।

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