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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 30, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Prashant Kishor: 'अगर जन सुराज की सरकार आई तो...', पीके ने खेला बड़ा दांव; CM नीतीश की बढ़ेगी टेंशन!

    Updated: Fri, 30 Aug 2024 09:22 PM (IST)

    जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एक बड़ा एलान किया है। प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर आगामी विधानसभा चुनाव में जन सुराज क ...और पढ़ें

    जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर और बिहार CM नीतीश कुमार। (फोटो- जागरण)
    जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर और बिहार CM नीतीश कुमार। (फोटो- जागरण)

    HighLights

    1. प्रशांत किशोर ने विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बड़ा एलान किया है।
    2. पीके ने कहा- जन सुराज की सरकार आई तो बुजुर्गों को दो हजार प्रति माह पेंशन

    राज्य ब्यूरो, पटना। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया है कि राज्य की नीतीश कुमार की सरकार बुजुर्गों को पेंशन के नाम पर मात्र चार सौ रुपये की भीख दे रही है।

    उन्होंने कहा, जब राज्य में जनता की सरकार यानी जन सुराज की सरकार आएगी तो बुजुर्गों को हर महीने दो हजार रुपये पेंशन के रूप में दिए जाएंगे।

    दो अक्टूबर को पार्टी का एलान करेंगे प्रशांत किशोर

    बता दें कि प्रशांत किशोर दो अक्टूबर को जन सुराज पार्टी का एलान करने वाले हें। इसके पहले वे लगातार विधानसभा चुनाव की तैयारियों में लगे हैं। उनके निशाने पर बिहार के तमाम सियायी दल हैं।

    उन्होंने शुक्रवार को ऐसी ही एक सभा में राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि गरीब बच्चों को पढ़ाने के नाम पर 50 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं और पढ़ 50 बच्चे भी नहीं रहे हैं।

    जातीय जनगणना की मांग तेजस्वी का राजनीतिक स्टंट : मिश्र

    भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रभाकर मिश्र ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि तेजस्वी की जाति आधारित गणना की मांग सिर्फ राजनीतिक स्टंट है। जाति गणना करवाकर ये आरक्षण का दायरा बढ़ाना नहीं चाहते, बल्कि अपनी सियासत सुरक्षित करना चाहते हैं। पिता और पुत्र की एक फितरत है, 'अपना काम बनता, तो भाड़ में जाए जनता'।

    उन्होंने कहा कि तेजस्वी भ्रम और अफवाह फैला कर जनता की सहानुभूति बटोरना चाहते हैं। उन्हें तो अपने माता और पिताजी से पूछना चाहिए कि 15 साल के उनके शासनकाल के दौरान उन्होंने जातिगत जनगणना क्यों नहीं कराई? आरक्षण का दायरा क्यों नहीं बढ़ाया? क्या तब उन्हें किसी ने ऐसा करने से रोका था? दरअसल तेजस्वी अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन की तलाश में लगे हुए हैं।

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