Bihar Politics: 'नई टीम में कट्टर लालूवादियों को मिले मौका', रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी को दी सलाह
राजद ने सभी प्रकोष्ठों और इकाइयों को भंग कर दिया है, जिसे रोहिणी आचार्य ने संगठन की मजबूती के लिए आवश्यक बताया है। ...और पढ़ें

तेजस्वी यादव और रोहिणी आचार्य। (फाइल फोटो)
HighLights
राजद ने सभी प्रकोष्ठों और इकाइयों को भंग करने का फैसला लिया।
रोहिणी आचार्य ने संगठन की मजबूती के लिए इसे आवश्यक बताया।
बांकीपुर हार और 'MY' समीकरण में बिखराव प्रमुख कारण।
डिजिटल डेस्क, पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में प्रकोष्ठों और विभिन्न इकाइयों को भंग करने के फैसले को पार्टी के भीतर एक बड़े और आवश्यक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य का मानना है कि संगठन की मजबूती के लिए यह कदम बहुत पहले ही उठाया जाना चाहिए था।
अब नए सिरे से होने वाले पुनर्गठन को लेकर कार्यकर्ताओं में उम्मीद जगी है कि इस बार चाटुकारिता के बजाय दशकों से निष्ठापूर्वक खड़े कैडर, अनुभवी और जमीनी पकड़ रखने वाले संघर्षशील नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
रोहिणी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि पार्टी की जिन इकाईयों - प्रकोष्ठों को भंग करने का जो निर्णय कल लिया गया, ये निर्णय काफी पहले लिया जाना चाहिए था .. उम्मीद है कि नयी इकाईयों के पुनर्गठन में कट्टर लालूवादियों, सालों से पार्टी के साथ पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ खड़े कार्यकर्ताओं - संगठन की समझ रखने वालों और जमीन से जुड़े जुझारू लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने आगे लिखा कि जमीन से जुड़े लोगों , सामाजिक - आर्थिक - राजनीतिक तौर पर हाशिए पर खड़े लोगों को आगे लाना, कार्यकर्ताओं को उचित अवसर और अहोदा देना ही सदैव लालू जी की प्राथमिकता रही है और सिर्फ लालू जी के सिद्धांतों, उनके दिखाए गए रास्ते पर चल कर ही पार्टी की बेहतरी संभव है।
दरअसल, राजद का मूल आधार हमेशा से हाशिए पर खड़े सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक वर्गों को नेतृत्व देना रहा है। पार्टी समर्थकों का मानना है कि लालू प्रसाद यादव के सिद्धांतों और नीतियों पर चलकर ही राजद को दोबारा मजबूत किया जा सकता है।
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बांकीपुर की करारी हार और 'MY' समीकरण में बिखराव बनी वजह
प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल द्वारा गुरुवार को जारी आदेश के बाद जल्द ही नई समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। इस कड़े कदम के पीछे हालिया उपचुनावों के नतीजे और कार्यकर्ताओं का बढ़ता असंतोष मुख्य कारण माना जा रहा है।
बांकीपुर सीट पर राजद को पहले भी पराजय मिलती रही है, लेकिन इस बार पार्टी प्रत्याशी रेखा गुप्ता की जमानत जब्त होना नेतृत्व के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। इसका सबसे प्रमुख कारण पार्टी का पारंपरिक 'एम-वाई' (मुस्लिम-यादव) जनाधार खिसकना रहा। विशेष रूप से यादव मतदाताओं की दूरी ने शीर्ष नेतृत्व को गहरे मंथन के लिए मजबूर कर दिया है।
असंतोष और बयानबाजी के बाद तेजस्वी का 'डैमेज कंट्रोल'
विधानसभा चुनावों के दौरान भी पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर थे, लेकिन इस बार यह कलह खुलकर सतह पर आ गई। मृत्युंजय तिवारी का भाजपा में शामिल होना और भाई वीरेंद्र जैसी वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी ने पार्टी की आंतरिक गुटबाजी को सार्वजनिक कर दिया।
बढ़ते राजनीतिक नुकसान को देखते हुए तेजस्वी यादव ने कड़े फैसले लेते हुए संगठन में अनुशासन तय करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
अपने करीबी नेताओं पर कार्रवाई की शुरुआत कर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और संगठन को नए सिरे से संगठित किया जाएगा।
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