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    पांच महायोग में आज सरस्वती पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा की सही विधि

    Updated: Fri, 23 Jan 2026 08:33 AM (GMT+05:30)

    पटना में माघ शुक्ल पंचमी पर वसंत पंचमी और सरस्वती पूजा उत्साह से मनाई जा रही है। इस वर्ष परिघ, शिव, गजकेसरी सहित पांच दुर्लभ शुभ योगों का संयोग इसे और ...और पढ़ें

    पांच महायोग में आज सरस्वती पूजा

    पांच महायोग में आज सरस्वती पूजा

    HighLights

    1. पांच महायोगों में सरस्वती पूजा, ज्ञान वृद्धि का अवसर।

    2. बच्चों के लिए अक्षरारंभ संस्कार, ज्ञान यात्रा की शुरुआत।

    3. पटना में कृत्रिम तालाबों में पर्यावरण-अनुकूल मूर्ति विसर्जन।

    जागरण संवाददाता, पटना। माघ शुक्ल पंचमी के अवसर पर आज वसंत पंचमी का पर्व पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। विद्या, बुद्धि, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती की आराधना के लिए आज का दिन विशेष रूप से फलदायी माना जा रहा है। पूर्वाभाद्र और उत्तरभाद्र नक्षत्र के साथ कई दुर्लभ शुभ योगों का संयोग इस पर्व को और भी महत्वपूर्ण बना रहा है। देवी उपासना के साथ ज्ञानारंभ, अक्षरारंभ और सांस्कृतिक उल्लास की झलक हर ओर देखने को मिल रही है। पूजा के बाद श्रद्धालु एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर बसंत की शुभकामनाएं दे रहे हैं।

    पांच महायोग से बढ़ी पूजा की महत्ता

    आज परिघ, शिव, गजकेसरी, लक्ष्मी-नारायण और बुधादित्य योग का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार वर्षों बाद बने इस दुर्लभ योग में मां सरस्वती की पूजा करने से विद्या, विवेक, वाणी और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है। विशेष रूप से विद्यार्थियों और शिक्षारंभ करने वाले बच्चों के लिए आज का दिन अत्यंत शुभ माना जा रहा है, जिससे ज्ञान के क्षेत्र में सफलता के योग बनते हैं।

    अक्षरारंभ से होती है ज्ञान यात्रा की शुरुआत

    आचार्य कृष्णानंद झा के अनुसार आज सरस्वती पूजा के बाद नवजात एवं छोटे बच्चों का पारंपरिक विधि से अक्षरारंभ संस्कार कराया जाएगा। इस दौरान बच्चों को पहली बार अक्षर ज्ञान दिया जाएगा। ॐ, श्री और अ जैसे पवित्र अक्षरों से लेखन की शुरुआत कराई जाएगी। माता-पिता और गुरु की उपस्थिति में संपन्न यह संस्कार बच्चों के बौद्धिक विकास, संस्कार और विवेक की मजबूत नींव रखता है।

    मां सरस्वती के स्वरूप में छिपा जीवन दर्शन

    मां सरस्वती का श्वेत वस्त्र पवित्रता, शांति और सात्विकता का प्रतीक माना गया है। उनका वाहन हंस विवेक का प्रतीक है, जो सत्य और असत्य में भेद करना सिखाता है। मां के हाथों में धारण वीणा यह संदेश देती है कि नाद, मंत्र, भजन और स्वाध्याय के माध्यम से आत्मिक आनंद और ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति संभव है, जिससे साधक सांसारिक मोह से ऊपर उठता है।

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    पीले वस्त्र और गुरु ग्रह का संबंध

    बसंत पंचमी पर पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा का विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व है। पीला रंग गुरु ग्रह से जुड़ा माना जाता है, जो ज्ञान, समृद्धि और शुभता का कारक है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने भी माघ शुक्ल पंचमी को पीतांबर धारण कर मां सरस्वती की पूजा की थी। पीला रंग सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और रिश्तों में मधुरता लाता है।

    सरस्वती पूजा के शुभ मुहूर्त

    आज पंचमी तिथि देर रात 12:22 बजे तक रहेगी। प्रातः 06:38 से 10:40 बजे तक चर, लाभ और अमृत मुहूर्त रहेगा। अभिजीत मुहूर्त 11:40 से 12:23 बजे तक रहेगा, जबकि वृष लग्न में दोपहर 12:28 से 02:25 बजे तक पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है।

    राशि अनुसार पूजा से विशेष लाभ

    मेष राशि के जातकों को सिंदूर और लाल फूल अर्पित करने की सलाह दी गई है। वृष राशि के लिए हरी कलम और पीले पुष्प शुभ माने गए हैं। मिथुन राशि वाले श्वेत कलम और अपराजिता पुष्प अर्पित करें, जबकि कन्या राशि के जातकों को पुस्तक दान के साथ गुड़ अर्पित करने से विद्या और बुद्धि में वृद्धि मानी जाती है।

    पर्यावरण संरक्षण के साथ मूर्ति विसर्जन

    सरस्वती पूजा के अवसर पर पटना में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की गई है। पटना नगर निगम द्वारा विभिन्न अंचलों में कुल सात आर्टिफिशियल तालाब बनाए गए हैं, जिनमें ही मूर्ति और पूजन सामग्री के विसर्जन के निर्देश दिए गए हैं। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना और कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है।

    सात घाटों पर कड़ी निगरानी

    बांकीपुर, पाटलिपुत्र, अजीमाबाद और पटना सिटी अंचल में कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं। इन घाटों पर बैरिकेडिंग, लाइटिंग और सुरक्षा व्यवस्था की गई है। नगर निगम की टीमें पंडालों की निगरानी करेंगी और स्वच्छता मानकों के पालन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    प्लास्टिक मुक्त पूजा के लिए अपील

    नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने लोगों से अपील की है कि सरस्वती पूजा का आयोजन पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ किया जाए। गंगा नदी और अन्य जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा। साथ ही प्लास्टिक, पॉलीथिन और नॉन-बायोडिग्रेडेबल सामग्री के उपयोग से बचने के लिए जागरूकता टीमें घाटों पर श्रद्धालुओं को लगातार सचेत करेंगी।