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    कानून की डिग्री को हथियार बना सविता अली लड़ रहीं महिलाओं की लड़ाई, हजारों लड़कियों को शिक्षा से जोड़ा

    Updated: Thu, 26 Mar 2026 04:28 PM (IST)

    एडवोकेट सविता अली बिहार में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए अथक प्रयास कर रही हैं। उन्होंने ईवा फाउंडेशन के माध्यम से 7,000 से अधिक महिलाओं और किशोरियों ...और पढ़ें

    महिला अधिकार के प्रति जागरूकता के एक कार्यक्रम में बोलतीं सविता अली। सौ: स्‍वयं

    महिला अधिकार के प्रति जागरूकता के एक कार्यक्रम में बोलतीं सविता अली। सौ: स्‍वयं

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    सोनाली दुबे, पटना। समाज में बदलाव की सबसे ठोस पहचान तब बनती है, जब कोई व्यक्ति अपने व्यक्तिगत दायरे से बाहर निकलकर दूसरों के जीवन को संवारने का संकल्प लेता है। इसी संकल्प का जीवंत उदाहरण एडवोकेट सविता अली द्वारा किए जा रहे वे प्रयास हैं, जिन्होंने कई महिलाओं को सहारा देकर आत्मनिर्भरता और सम्मान की राह पर खड़ा किया है।

    उनकी पहल का केंद्र केवल मदद देना नहीं, बल्कि महिलाओं को इस काबिल बनाना है कि वे अपने अधिकार खुद हासिल कर सकें और अपने पैरों पर मजबूती से खड़ी हो सकें। सविता कानून की डिग्री को हथियार बनाकर इन महिलाओं की लड़ाई लड़ रही हैं।

    वह बाल विवाह के विरुद्ध चट्टान बनकर खड़ी हुईं हैं और लड़कियों को शिक्षा के लिए जागरूक कर रही हैं। अब तक सात हजार महिलाएं व किशोरियां किसी न किसी रूप में उनसे लाभांवित हो चुकी हैं।

    यह पहल तब शुरू हुई जब सविता ने अपने आसपास ऐसी महिलाओं को देखा, जो घरेलू या सामाजिक कारणों से न सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर थीं, बल्कि अपने अधिकारों को लेकर भी अनभिज्ञ थीं। उन्होंने यह समझा कि केवल सहानुभूति से स्थिति नहीं बदलेगी, इसके लिए ठोस हस्तक्षेप और निरंतर प्रयास जरूरी है।

    इसी सोच के साथ उन्होंने जरूरतमंद महिलाओं के मामलों को समझना, उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाना और उन्हें न्याय दिलाने की दिशा में काम शुरू किया। सविता अली हरियाणा की रहने वाली हैं। पति बिहार के हैं। दूसरे समुदाय में विवाह के बाद उन्हें जो झेलना पड़ा, उसने ही उन्हें महिलाओं के लिए संघर्ष करने को प्रेरित किया।

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    वह बताती हैं कि 2013 में उनकी जिंदगी का वह बड़ा मोड़ था, जब विवाह के अगले ही दिन बिहार आ गईं। फिर यहीं की होकर रह गईं। 2019 में पटना में ईवा फाउंडेशन की स्थापना की, जहां महिलाओं को निश्शुल्क कानूनी सहायता दी जाती है।

    मामले में एफआईआर कराने से लेकर महिलाओं की काउंसलिंग तक की जाती है। अब तक लगभग सात हजार महिलाएं व किशोरियां विधिक, सामाजिक व शैक्षिक रूप से लाभांवित हो चुकी हैं। यही वजह है कि अब उनकी एक बड़ी टीम बन गई है।

    नाबालिगों की रुकवाईं शादियां

    महिला अधिकारों के प्रति संवेदनशील सविता लड़कियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर लड़ रही हैं। एेसा ही एक मामला था, जब एक बेहद ही गरीब परिवार अपनी 12 वर्ष की बच्ची की शादी करीब 40 वर्ष के व्यक्ति से कर रहा था। सविता को जानकारी मिली तो वह दौड़ पड़ीं।

    उनके प्रयास से शादी रुक गई। इसके बाद परिवार के सदस्यों की काउंसलिंग की गई। प्रशासन ने स्थानीय मुखिया को निगरानी का दायित्व सौंपा। वह बच्ची आज नौवीं कक्षा में पढ़ रही है। ऐसे करीब 20 मामले हैं, जिसमें उन्होंने बच्चियों की जिंदगी बर्बाद होने से बचाई। 

    गांव-गांव जाकर अभिभावकों को समझाया

    पटना के जानीपुर में लड़कियों की पढ़ाई छोड़ देने की समस्या आम थी। समाज की मानसिकता यह थी कि शादी ही सबसे बड़ा लक्ष्य है। सविता ने गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद किया। अभिभावकों को समझाया। उन्होंने शिक्षा का महत्व समझा। आज वहां लड़कियां स्कूल जा रही हैं। ड्रॉपआउट की शिकायत लगभग बंद हो गई है।

    महिला शिक्षा के प्रति जागरूकता के लिए उनकी सतत सक्रियता का ही परिणाम है कि आज उनमें कई लड़कियां उच्च शिक्षा की ओर बढ़ चुकी हैं। कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। इनमें निशा, सुमन, गोहर और रिया पासवान शामिल हैं। ये विभिन्न कालेजों में अध्ययन कर रही हैं। रिया जेएनयू, दिल्ली में प्रवेश के लिए तैयारी कर रही हैं। 

    आत्मनिर्भर बनाने को प्रशिक्षण भी

    जहानाबाद की एक महिला को उसके पति ने घर से निकाल दिया। सविता को जब जानकारी हुई तो उसे उसके अधिकार के बारे में बताया। उसका केस लड़ा और उसे हक दिलाया। उसे कंप्यूटर और प्रिंटर चलाने का प्रशिक्षण भी दिलाया, ताकि आत्मनिर्भर बन सके। आज गीता सम्मान के साथ आत्मनिर्भर है।

    मदद का एक उदाहरण

    सविता के पास एक बार एक फोन आया। उधर से आवाज आई, मैडम! एक नाबालिग लड़की की शादी जबरन कराई जा रही है, कुछ कीजिए। रात में फोन आता था तो सविता की नींद उड़ गई। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी।

    इसके बाद दोनों पक्षों को थाने पर बुलाकर बाल विवाह निषेध कानून के बारे में बताया गया। दोनों पक्षों से बॉन्ड भरवाया गया। इसके बाद लड़की सुरक्षित घर लौट गई। अभी वह अपने गांव में ही आठवीं कक्षा में पढ़ रही है। नियमित स्कूल जा रही है। यह मामला पटना के फुलवारी शरीफ क्षेत्र का है।