तेज प्रताप यादव की जमानत याचिका दाखिल; वकील का बड़ा दावा- पहले गिरफ्तार किया, बाद में दर्ज की गई FIR
पटना में 25 जुलाई को हुए उपद्रव मामले में गिरफ्तार JJD अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने जमानत याचिका दाखिल की है। उनके वकील ने गिरफ्तारी और प्राथमिकी की प्र ...और पढ़ें
डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार बंद के दौरान 25 जुलाई को पटना में हुए उपद्रव और हिंसा के मामले में गिरफ्तार JJD के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव की ओर से सोमवार को जमानत याचिका दाखिल की गई।
तेज प्रताप फिलहाल 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेऊर केंद्रीय कारा में बंद हैं। उनकी ओर से अधिवक्ता निशा सिंह ने एसडीजेएम कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की। पुलिस की कार्रवाई और प्राथमिकी की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
जेल पहुंचने के बाद सीने में दर्द की शिकायत
बेऊर जेल पहुंचने के बाद तेज प्रताप यादव ने सीने में दर्द की शिकायत की। इसके बाद जेल प्रशासन ने उन्हें चिकित्सकीय निगरानी (मेडिकल ऑब्जर्वेशन) में रखा है।
वकील निशा सिंह ने बताया कि तेज प्रताप पहले से ही ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की समस्या से जूझ रहे हैं। अब उन्हें हृदय में दर्द की भी शिकायत हुई है, इसलिए मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए जेल में रखना उचित नहीं है।
'उलूल-जुलूल धाराएं लगाई गईं'
कोर्ट परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए अधिवक्ता निशा सिंह ने कहा कि तेज प्रताप यादव पर बिना पर्याप्त आधार के गंभीर धाराएं लगा दी गई हैं।
उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर धारा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (हत्या के प्रयास से संबंधित आरोप) लगाई गई है, जबकि मामले के तथ्यों से इसका कोई संबंध नहीं दिखता।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने जल्दबाजी में कार्रवाई करते हुए ऐसे प्रावधान जोड़ दिए, जिनका घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
गिरफ्तारी और एफआईआर की टाइमिंग पर उठाए सवाल
तेज प्रताप की वकील ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि गिरफ्तारी पहले हुई और प्राथमिकी बाद में दर्ज की गई।
उन्होंने दावा किया कि तेज प्रताप यादव को शाम करीब 7:15 बजे हिरासत में लिया गया, जबकि गांधी मैदान थाना में प्राथमिकी रात करीब 12:50 बजे दर्ज की गई। उनके अनुसार, यह पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के विपरीत प्रतीत होती है।
निशा सिंह ने कहा, यह बहुत बड़ा नेग्लिजेंस है। एफआईआर दर्ज होने से पहले गिरफ्तारी कर ली गई। गिरफ्तारी के बाद उन्हें दीघा थाना, फिर दानापुर और उसके बाद नौबतपुर थाना ले जाया गया।
दंगा भड़काने के आरोप को बताया निराधार
वकील ने तेज प्रताप यादव पर लगाए गए दंगा भड़काने के आरोप को भी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि न तो तेज प्रताप ने कोई भड़काऊ बयान दिया और न ही किसी को हिंसा के लिए उकसाया।
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उन्होंने कहा, वह वहां किसी प्रदर्शन का नेतृत्व करने नहीं गए थे। वह अपनी गाड़ी से गुजर रहे थे। कुछ युवकों के आग्रह पर थोड़ी देर के लिए गाड़ी से उतरे।
इसके बाद राष्ट्रीय ध्वज लहराया और फिर वहां से चले गए। ऐसे में उन पर दंगा भड़काने या हिंसा फैलाने का आरोप कैसे लगाया जा सकता है?
एक दर्जन से अधिक धाराओं में दर्ज है केस
गौरतलब है कि पटना के गांधी मैदान थाना में तेज प्रताप यादव के खिलाफ 12 से अधिक धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
उन पर हत्या के प्रयास, दंगा, सरकारी कार्य में बाधा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस का आरोप है कि बिहार बंद के दौरान हुई हिंसा और उपद्रव के मामले में उनकी भूमिका सामने आने के बाद कार्रवाई की गई।
शनिवार देर रात करीब 12:15 बजे उन्हें नौबतपुर थाना से छज्जूबाग में न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेजने का आदेश दिया।