हार के बाद नई रणनीति? Tejashwi Yadav का कोलकाता दौरा बढ़ा रहा सियासी हलचल
बिहार राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन की हार के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अचानक कोलकाता रवाना हो गए। इस दौरे ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को ...और पढ़ें

राज्यसभा चुनाव में करारी हार मिलते ही कोलकाता निकले तेजस्वी
HighLights
बिहार राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने सभी पांचों सीटें जीतीं।
महागठबंधन की हार, चार विधायकों की गैरमौजूदगी बनी वजह।
तेजस्वी यादव का कोलकाता दौरा, नई सियासी रणनीति की अटकलें।
डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसी के तुरंत बाद नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav पटना से कोलकाता के लिए रवाना हो गए। उनके इस अचानक दौरे ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
NDA का क्लीन स्वीप, विपक्ष बैकफुट पर
इस चुनाव में National Democratic Alliance (एनडीए) ने सभी पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर पूरी तरह बाजी मार ली। वहीं महागठबंधन की ओर से उतारे गए उम्मीदवार ए.डी. सिंह को हार का सामना करना पड़ा, जिससे विपक्ष को बड़ा झटका लगा है।
आंकड़ों में दिखी हार की असली वजह
जीत के लिए जहां 41 वोट जरूरी थे, वहीं एनडीए के सभी विधायकों ने मतदान किया। दूसरी ओर महागठबंधन के सिर्फ 37 विधायक ही वोट डालने पहुंचे। चार विधायकों की गैरमौजूदगी-जिसमें कांग्रेस के तीन और राजद का एक विधायक शामिल था-हार का बड़ा कारण मानी जा रही है।
बड़े नेताओं की जीत ने बढ़ाया दबाव
एनडीए की ओर से Nitish Kumar और Nitin Nabin समेत अन्य उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। इसके अलावा Ram Nath Thakur और Upendra Kushwaha भी राज्यसभा पहुंच गए, जिससे सत्ता पक्ष की स्थिति और मजबूत हुई।
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पांचवीं सीट पर बदला खेल
पांचवीं सीट के लिए मुकाबला दिलचस्प रहा। भाजपा उम्मीदवार Shivesh Ram को पहली वरीयता में कम वोट मिले थे, लेकिन दूसरी वरीयता की गिनती में उन्होंने बाजी पलट दी। वहीं राजद के ए.डी. सिंह कुल 37 वोट पर सिमट गए।
कोलकाता दौरे के सियासी मायने
नतीजों के बाद Tejashwi Yadav का कोलकाता जाना महज संयोग नहीं माना जा रहा। राजनीतिक जानकार इसे आगामी रणनीति, संभावित बैठकों या नए समीकरणों की तलाश से जोड़कर देख रहे हैं।
बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर एनडीए अपनी जीत से उत्साहित है, वहीं महागठबंधन के भीतर मंथन और रणनीतिक बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष इस हार से कैसे उबरता है।