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    बिहार के महान लोक नर्तक को मरणोपरांत मिला पद्मश्री, नेहरू ने चीन से युद्ध में अलख जगाने पर की थी विश्व बंधु की तारीफ

    Updated: Tue, 26 May 2026 12:49 AM (IST)

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बिहार के तीन विभूतियों को पद्मश्री से सम्मानित किया, जिनमें लोक नृत्य कलाकार स्व. विश्व बंधु भी शामिल हैं। ...और पढ़ें

    लोक नृत्य कलाकार स्व. विश्व बंधु को मिला पद्मश्री। (सोशल मीडिया)

    लोक नृत्य कलाकार स्व. विश्व बंधु को मिला पद्मश्री। (सोशल मीडिया)

    HighLights

    1. राष्ट्रपति ने बिहार के तीन विभूतियों को पद्मश्री से नवाजा।

    2. स्व. विश्व बंधु ने लोक नृत्यों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

    3. उन्होंने 'सुरांगन' संस्था स्थापित कर संस्कृति को समृद्ध किया।

    जागरण संवाददाता, पटना। कला और विज्ञान के क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रदेश के तीन विभूतियों को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

    इसमें भोजपुरी लोक संगीत के वरिष्ठ लोक गायक भरत सिंह भारती, लोक नृत्य कलाकार स्व. विश्व बंधु एवं विज्ञान व इंजीनियरिंग के क्षेत्र में योगदान के लिए स्व. गोपाल जी त्रिवेदी को मरणोपरांत पद्मश्री पुरस्कार से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सम्मानित किया।

    राजधानी के दानापुर (दाउदपुर) के रहने वाले विश्वबंधु बिहार के लोक नृत्य के स्तंभ माने जाते हैं। पंडित उदय शंकर व पंडित राम जीवन प्रसाद से नृत्य की बारीकियों से अवगत हुए।

    उन्होंने बिहार के पारंपरिक लोक नृत्यों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनके शिष्य जितेंद्र कुमार ने बताया कि विश्व बंधु लोक नृत्य के एक अग्रणी प्रवर्तक और बिहार के सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक व्यक्तियों में से एक थे।

    वे एक प्रख्यात नर्तक, कोरियोग्राफर, गुरु और संस्था निर्माता के रूप में अपना पूरा जीवन भारतीय नृत्य परंपराओं के संरक्षण, पुनरुद्धार और रचनात्मक पुनव्याख्या के लिए समर्पित कर दिया।

    Vishwa Bandhu Padma Shri

    वे आधुनिक नृत्य आंदोलन को आकार देने और लोक नृत्य को समृद्ध किया। विश्वबंधु के शिष्य जितेंद्र कुमार ने बताया कि सोमवार को राष्ट्रपति के हाथों विश्वबंधु की पत्नी इंदु देवी ने पुरस्कार ग्रहण किया।

    संस्थान की स्थापना 

    कलाकार विश्वबंधु ने लोक नृत्य के प्रचार-प्रसार करने को लेकर सुरांगन नामक संस्था की स्थापना 1959 में किया था। विश्वबंधु का जन्म 23 नवंबर 1930 को एवं निधन 30 मार्च 2025 को हुआ।

    बचपन से लोक नृत्य के प्रति रूचि रखने वाले विश्वबंधु ने नृत्य गुरु पंडित उदय शंकर तथा शास्त्रीय संगीत की शिक्षा पंडित रामजीवन प्रसाद से प्राप्त की।

    शिक्षा ग्रहण करने के बाद वे बिहार के ग्रामीण अंचलों में पारंपरिक लोक नृत्यों का प्रचार-प्रसार कर समृद्ध किए। संस्था के जरिए देश-विदेश में सांस्कृतिक कार्यक्रम छह हजार से अधिक प्रदर्शित कर चुके थे।

    1962 में कांग्रेस अधिवेशन में ग्रामीण विकास पर आधारित नृत्य नाटिका ये भारत के गांव की प्रस्तुति की गई थी। जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु की सराहना प्राप्त हुई थी।

    चीनी आक्रमण के समय नृत्य नाटिका ई हमर हिमालय का प्रदर्शन संपूर्ण भारतवर्ष में जन जागृति एवं जन चेतना लाने के लिए किया गया था।

    नृत्य नाटकों का किया निर्देशन 

    विश्वबंधु ने नृत्य एवं संगीत की परंपरा को बरकरार रखने के लिए नृत्य शैली का निशुल्क प्रशिक्षण युवा पीढ़ियों को देते रहे। वे पटना स्थित भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) के मंच से अनेक नृत्य नाटकों का निर्देशन किया।

    उनके अतुलनीय सेवाओं के लिए उन्हें राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक सम्मानों से अलंकृत किया गया। बिहार सरकार की ओर से 2013 में लाइफ टाइम पुरस्कार, 2012 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार समेत अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें बिहार के कला और संस्कृति के 100 रत्नों में भी शामिल किया गया।