खेल तो किया था ‘दृश्यम’ जैसा, लेकिन पत्नी की हत्या का राज नहीं छिप सका, पूर्णिया और अररिया के बीच हुआ सारा खेल
पति ने अपनी पत्नी नुसरत परवीन की हत्या कर शव को अररिया के एक निर्माणाधीन स्कूल में दफना दिया। दो महीने तक गुमराह करने के बाद, पुलिस ने पति महबूब आलम क ...और पढ़ें

पत्नी की हत्या और निर्माणाधीन स्कूल में दफनाया शव
जागरण टीम, पूर्णिया/अररिया। चर्चित फिल्म ‘दृश्यम’ में अजय देवगण की तरह ही पति ने पत्नी की हत्या कर शव को निर्माणाधीन विद्यालय परिसर में दफन कर दिया, लेकिन इस बार षड्यंत्र खुल गया। 23 वर्षीय नुसरत परवीन की हत्या के मामले में उसके पति महबूब आलम को गिरफ्तार किया गया है। आरोपित ने शव को अररिया जिले के बथनाहा थाना क्षेत्र स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालय के निर्माण स्थल में गड़ा दिया था। दोनों उस विद्यालय निर्माण में मजदूरी कर रहे थे।
दो माह तक गुमराह करता रहा पति
महबूब पिछले दो महीनों से नुसरत के स्वजनों को लगातार गुमराह करता रहा। जब परिवार वाले नुसरत से बात कराने की मांग करते, वह बहाना बनाकर बात टाल देता। इस दौरान परिवार ने देखा कि दो वर्षीय बच्ची तो घर में है, लेकिन नुसरत का कहीं पता नहीं। मामला संदिग्ध होने पर स्वजन ने केनगर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।
पति ने पुलिस पूछताछ में किया खुलासा
महबूब को हिरासत में लेने के बाद पुलिस की सख्ती से पूछताछ में वह टूट गया। रविवार को पुलिस टीम उसे लेकर घटनास्थल पर पहुंची। उसकी निशानदेही पर खोदाई कराई गई, जिसमें जमीन के नीचे बोरी में बंद सड़-गल चुका शव बरामद हुआ। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हत्या में किसी और का हाथ तो नहीं था।
पारिवारिक विवाद के चलते हत्या
मृतका नुसरत परवीन की मां कमरून निशा ने बताया कि नुसरत और महबूब पांच वर्ष पूर्व प्रेम विवाह के बंधन में बंधे थे। शुरू में घर वालों के विरोध के कारण महबूब दो साल तक नुसरत के घर रहा, फिर अररिया चला गया। शादी के बाद से ही दोनों के बीच पारिवारिक तनाव और विवाद बना हुआ था। जनवरी 2026 में दोनों अररिया चले गए और निर्माणाधीन विद्यालय परिसर में मजदूरी करने लगे। ईद के आसपास दोनों के बीच विवाद हुआ, इसी दौरान महबूब ने गुस्से में ईंट से सिर पर वार कर पत्नी की हत्या कर दी।
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हत्या का तरीका और छुपाने की कोशिश
महबूब ने शव को बोरी में बंद किया और देर रात निर्माण स्थल पर चार से पांच फीट गहरा गड्ढा खोदकर उसे दफना दिया। इसके बाद वह अपनी बेटी के साथ सामान्य जीवन जीता रहा ताकि किसी को शक न हो।