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    2 किलो से कम वजन वाले नवजात के लिए संजीवनी है कंगारू मदर केयर विधि; मां ही नहीं, परिजन भी दे सकते हैं KMC

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 07:15 AM (GMT+05:30)

    पूर्णिया में 'कंगारू मदर केयर' (KMC) विधि जन्म के समय कम वजन वाले नवजात शिशुओं के लिए बेहद कारगर साबित हो रही है। यह तकनीक मां या परिजनों द्वारा त्वचा ...और पढ़ें

    पूर्णिया के स्वास्थ्य केंद्र में कम वजन वाले नवजात शिशु को कंगारू मदर केयर (KMC) विधि से गर्माहट देती महिला।

    पूर्णिया के स्वास्थ्य केंद्र में कम वजन वाले नवजात शिशु को कंगारू मदर केयर (KMC) विधि से गर्माहट देती महिला।

    जागरण संवाददाता, पूर्णिया। जन्म के समय कम वजन वाले कमजोर नवजात शिशुओं को स्वस्थ और सुरक्षित रखने के लिए 'कंगारू मदर केयर' (KMC) विधि बेहद कारगर साबित हो रही है। जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत एएनएम (ANM) को इस तकनीक के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है, जो प्रसव के बाद माताओं और उनके परिजनों को अस्पताल में ही इसकी पूरी प्रक्रिया समझा रही हैं।

    चिकित्सकों के अनुसार, जन्म के समय यदि शिशु का वजन 2 किलोग्राम या उससे कम हो, तो उसे वार्मर से निकालने के बाद प्राकृतिक रूप से गर्माहट देने के लिए यह तकनीक सबसे बेहतर मानी जाती है। सामान्य रूप से कम वजन वाले बच्चों को घर पर भी इसी विधि से सुरक्षित और सेहतमंद रखा जा सकता है।

    जानिए कैसे काम करती है कंगारू मदर केयर (KMC) तकनीक

    स्वास्थ्य केंद्र के लेबर रूम में तैनात स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार, प्रसव के बाद नवजात की शुरुआती जांच और वजन लेने के बाद यदि वजन 2 किलो से कम निकलता है, तो केएमसी शुरू करने की सलाह दी जाती है:

    • त्वचा से त्वचा का संपर्क (Skin to Skin Contact): इसमें मां या घर का कोई अन्य सदस्य (पिता, दादी, नानी आदि) अपने सीने के ऊपरी कपड़े हटाकर शिशु को नग्न अवस्था (केवल लंगोट, सिर पर टोपी, हाथों में दस्ताने और पैरों में मोजे पहनाकर) अपनी छाती से सटाकर रखता है।

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  • गर्माहट से तेजी से होता है विकास: इसके बाद ऊपर से चादर या कंबल ओढ़ लिया जाता है। शरीर की इस प्राकृतिक गर्मी से शिशु का तापमान नियंत्रित रहता है, उसका शारीरिक विकास तेजी से होता है और वह जल्द स्वस्थ हो जाता है।

  • समय अवधि: बच्चे के त्वरित सुधार के लिए दिन में नियमित अंतराल पर कम से कम एक घंटा या उससे अधिक समय तक सीने से लगाकर रखना चाहिए।

  • अस्पताल से डिस्चार्ज के बाद आशा कर्मी रखेंगी नजर

    अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी बच्चे की सेहत और विकास की निगरानी बंद नहीं होती। स्थानीय आशा कार्यकर्ता (ASHA Workers) घर-घर जाकर शिशु के वजन, तापमान और विकास का लगातार फीडबैक लेती हैं। जरूरत पड़ने पर बच्चों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजकर आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।