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नेपाल व तिब्बत सीमा पर झील फटने की आशंका से ब‍िहार के सीमांचल में हलचल: कोसी, परमान व महानंदा नद‍ियों का जलस्तर शांत

Published: Fri, 28 Aug 2026 08:05 PM (GMT+05:30)

नेपाल से सटी तिब्बत सीमा पर एक अस्थायी झील फटने की आशंका के चलते पूर्णिया सहित सीमांचल में विशेष सतर्कता ...और पढ़ें

तिब्बत सीमा पर बनी अस्थायी झील से उत्पन्न खतरे को लेकर सीमांचल में अलर्ट; कोसी, महानंदा, परमान व कनकई का जलस्तर खतरे के निशान से 1.5 से 2 मीटर नीचे

तिब्बत सीमा पर बनी अस्थायी झील से उत्पन्न खतरे को लेकर सीमांचल में अलर्ट; कोसी, महानंदा, परमान व कनकई का जलस्तर खतरे के निशान से 1.5 से 2 मीटर नीचे

HighLights

  1. नेपाल-तिब्बत सीमा पर झील फटने की आशंका से सतर्कता।

  2. प्रमुख नदियां शांत, पर प्रशासन और ग्रामीण तैयार।

  3. बाढ़ नियंत्रण कक्ष सक्रिय, आकस्मिक योजनाएं तैयार।

जागरण संवाददाता, पूर्णिया। नेपाल से सटी तिब्बत सीमा पर पहाड़ी क्षेत्र में बनी एक अस्थायी झील के फटने की आशंका को देखते हुए पूर्णिया सहित पूरे सीमांचल क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। राहत की बात यह है कि फिलहाल इलाके से गुजरने वाली प्रमुख नदियां पूरी तरह शांत हैं। कोसी, परमान, कनकई और महानंदा जैसी नदियां अभी खतरे के निशान से लगभग डेढ़ से दो मीटर नीचे बह रही हैं, जिससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने राहत की सांस ली है। इसके बावजूद किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

जिलाधिकारी के सख्त निर्देश पर जल संसाधन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा नदियों के जलस्तर, तटबंधों की मजबूती, संवेदनशील इलाकों और कटाव स्थलों पर लगातार पैनी नजर रखी जा रही है। अधिकारी लगातार प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। विशेष रूप से रुपौली प्रखंड से होकर गुजरने वाली कोसी नदी के जलस्तर और धाराओं की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

ग्रामीणों ने शुरू की संभावित आपात स्थिति से निपटने की तैयारी

दूसरी ओर, संभावित खतरे को भांपते हुए बाढ़ प्रभावित निचले इलाकों के लोग भी पहले से सजग हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीण आपातकालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपने मवेशियों की सुरक्षा, सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर अस्थायी बसेरा बनाने तथा आवश्यक राशन-पानी और चारे का अग्रिम प्रबंध करने में जुट गए हैं। क्षेत्र के लोगों की नजर नेपाल और पहाड़ी इलाकों में हो रही हर मौसमी गतिविधि पर टिकी हुई है।

ग्रामीणों की यह सजगता स्वाभाविक है, क्योंकि सीमांचल की अधिकांश प्रमुख नदियां नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों से होकर ही भारतीय सीमा में प्रवेश करती हैं। ऐसे में वहां झील टूटने या भारी जलप्रवाह होने से इन नदियों में अचानक उफान आने का खतरा बना रहता है।

सीमांचल के सभी जिलों को अलर्ट, प्रशासन की पुख्ता तैयारी

इस संभावित खतरे के मद्देनजर सीमांचल के सभी सीमावर्ती जिलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। जिला प्रशासन ने बाढ़ नियंत्रण कक्ष को सक्रिय कर दिया है और आपात स्थिति से तत्काल निपटने के लिए क्षेत्रवार त्वरित कार्ययोजना (Contingency Plan), नावों की व्यवस्था और राहत सामग्री का खाका तैयार कर लिया है, ताकि किसी भी विपरीत परिस्थिति में जान-माल का नुकसान न हो।