पूर्णिया में गांजा की लत जवानी कर रही बर्बाद, युवा हो रहे बायपोलर डिसआर्डर का शिकार
पूर्णिया के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में बायपोलर डिसऑर्डर के मामले बढ़ रहे हैं, खासकर युवाओं में। मनोचिकित्सक डॉ. नायब अंजुम के अनुसार, ...और पढ़ें

गांजे की लत से मानसिक बीमारी। फाइल फोटो

समय कम है?
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दीपक शरण, पूर्णिया। राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में बायपोलर डिसआर्डर से ग्रसित मरीजों की संख्या बढ़ रही है।प्रत्येक माह 900 मरीजों में औसतन 50 से 60 केवल बायपोलर डिसआर्डर के पहुंच रहे हैं।
इसमें 20 से 30 आयुवर्ग के युवा भी बड़ी संख्या में होते हैं। ऐसे युवा आमतौर पर गांजा सेवन के आदि होते हैं। मानसिक विभाग के एचओडी मनोचिकित्सक डॉ. नायब अंजुम ने बताया कि इस बीमारी के कई कारण हैं, जिसमें आनुवांशिक और गंभीर तनाव है, लेकिन युवाओं में गांजा की आदत सबसे बड़ा कारण उभर के सामने आ रहा है।
नशा की लत से मानसिक समस्याओं में बायपोलर का कारण गांजा सेवन की आदत है। ओपीडी में प्रत्येक माह करीब 20 से 30 मरीज गांजा सेवन के कारण बायपोलर जैसी मानसिक बीमारी से ग्रसित होकर पहुंच रहे हैं।
मरीजों की काउंसिलिंग और दवा के माध्यम से इलाज किया जाता है। बायपोलर जैसी मानसिक स्थिति के प्रति सचेत करने के लिए प्रत्येक वर्ष 30 मार्च को विश्व बायपोलर दिवस मनाया जाता है। इस बीमारी रोगी के साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों की काउंसिलिंग की जाती है। इसमें मेनिया और अवसाद के दो चरण होते हैं।
लगातार बदलते हैं विचार
बायपोलर की समस्या से ग्रसित मरीजों के दिमाग में विचारों में काफी बदलाव आता है। पहला चरण बायपोलर मेनिया और दूसरा डिप्रेसिव का है। पहले चरण में मरीज अधिक सक्रिय रहता है। काफी अधिक गुस्सा करता है। अपने आपको भगवान के बराबर समझने लगता है। अधिक बोलने की आदत होती है।
मरीज कुछ घंटे की नींद में स्वयं तरोताजा महसूस करने लगता है। बेचैनी बनी रहती है। दूसरा चरण इस बीमारी में अवसाद में रोगी चला जाता है। किसी काम को करने में रूचि नहीं दिखाता है। रोजमर्रा के कार्य करने में मन नहीं लगता है। काफी चुप रहने लगता है। समय पर मरीज के पहुंचने से इलाज काम समय चलता है।
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इस बीमारी पारिवारिक सहयोग की आवश्यकता होती है। लोग अंधविश्वास के चक्कर में पड़ जाते हैं। लोगों को इस तरह की समस्या किसी में दिखे तो वह किसी अंधविश्वास के चक्कर में फंसने के बजाय इसको मानसिक रोग समझते हुए इसका इलाज करवानी चाहिए। इस बीमारी में इलाज के बाद मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।
अगर समय पर चिकित्सक के पास पहुंच गए हैं तो एक से दो वर्ष की दवा से मरीज ठीक हो सकता है। मानसिक विभाग के ओपीडी में बायपोलर डे के अवसर लोगों को जागरूक किया गया। इस मौके पर मानसिक विभाग के एचओडी मनोचिकित्सक डॉ. नायब अंजुम, डॉ. रजिया, ज्यानल एबी और नवल किशोर शर्मा मौजूद रहे।
विश्व बायपोलर दिवस पर लोगों को इस मानसिक अवस्था के बारे में जानकारी दी गई है। इसके लक्षण प्रकट होने पर इसे एक मानसिक रोग समझते हुए चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए और किसी भी तरह के अंधविश्वास के चक्कर में नहीं फंसनी चाहिए। आजकल युवावर्ग गांजा लत के कारण इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं। बीस से 30 आयुवर्ग के वैसे युवा जो गांजा का सेवन के आदि होते हैं वह इस बीमारी के शिकार होकर एक माह में 20 से 30 संख्या पहुंच रहे हैं। -डॉ. नायब अंजुम, मनोचिकित्सक, जीएमसीएच