Leopard Behavior : इंसानों से डरता है तेंदुआ और शाम को करता है शिकार, दहशत के बीच वन विभाग ने खोले कई बड़े राज
पूर्णिया के टीकापटी में तेंदुए के डर के बीच वन विभाग के डीएफओ ने ग्रामीणों से मुलाकात की। उन्होंने स्पष्ट ...और पढ़ें

Leopard Alert: 'गोधूलि बेला' में शिकार पर निकलता है तेंदुआ, जानें इंसानों को देखते ही क्या करता है यह खूंखार शिकारी
HighLights
डीएफओ ने टीकापटी में ग्रामीणों का तेंदुए का डर दूर किया।
वन विभाग ने इलाके में तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की।
ग्रामीणों को समूह में निकलने और रात में रोशनी रखने की सलाह।
संवाद सूत्र, रूपौली (पूर्णिया)। टीकापटी क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से तेंदुए की अफवाह और खौफ के साए में जी रहे ग्रामीणों के लिए राहत की खबर है। शनिवार को वन विभाग के डीएफओ (डिस्ट्रिक्ट फॉरेस्ट ऑफिसर) राजीव रंजन खुद टीकापटी स्थित मां काली मंदिर पहुंचे और ग्रामीणों के साथ एक विशेष बैठक की। उन्होंने ग्रामीणों के दिल से तेंदुए का डर निकालते हुए उसके स्वभाव के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। डीएफओ ने स्पष्ट किया कि तेंदुआ हमेशा इंसान से दूरी बनाए रखता है और वह केवल गोधूलि बेला (शाम के वक्त) में ही शिकार के लिए बाहर निकलता है।
इलाके में नहीं है तेंदुआ, मिल रहे पग-चिन्ह भी नकली!
गौरतलब है कि बीते 27 मई को टीकापटी के चकला बहियार में एक तेंदुए के मारे जाने के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। ग्रामीण रोजाना किसी न किसी डर के साए में जी रहे हैं। इस पर स्थिति साफ करते हुए डीएफओ ने बताया कि वन विभाग की टीम लगातार मुस्तैद है, ड्रोन कैमरे उड़ाए गए हैं और संभावित जगहों पर पिंजरे भी लगाए गए हैं। लेकिन राहत की बात यह है कि वर्तमान में इलाके में तेंदुए की मौजूदगी की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जो पग-चिन्ह (Footprints) मिल रहे हैं, वे भी तेंदुए के नहीं हैं।
डरने की जरूरत नहीं, बस इन 3 बातों का रखें ध्यान
डीएफओ राजीव रंजन ने ग्रामीणों को जागरूक करते हुए सतर्क रहने की सलाह दी और कुछ जरूरी टिप्स साझा किए:
समूह में निकलें: खेतों या सुनसान रास्तों पर कभी भी अकेले न जाएं, हमेशा 4-5 लोगों के समूह में ही निकलें।
रोशनी का इंतजाम: रात के समय जहां मवेशी (पशु) बांधे जाते हैं या जो बासा क्षेत्र है, वहां लालटेन, हैलोजन या नाइट बल्ब जलता रहना चाहिए। रोशनी देखकर तेंदुआ कभी पास नहीं फटकता।
दिन में खतरा नहीं: तेंदुआ दिन के उजाले में कभी बाहर नहीं निकलता, इसलिए दिन में पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है।
मवेशियों की मौत पर मुआवजा और 'घोडपड़ास' से मुक्ति का उपाय
इस बैठक के दौरान दो पाटन के बीच पिस रहे ग्रामीणों ने डीएफओ के सामने मवेशियों के मारे जाने पर मुआवजे और 'घोडपड़ास' (नीलगाय) द्वारा फसलों की भारी तबाही का मुद्दा उठाया।
मुआवजे के लिए क्या करें: डीएफओ ने बताया कि पीड़ित मवेशी पालक सबसे पहले अपने मृत या घायल पशुओं का सीओ (CO) या बीडीओ (BDO) के माध्यम से सत्यापन (Verification) कराएं। इसके बाद जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदन वन विभाग को सौंपें, मुआवजा तुरंत मिलेगा।
घोडपड़ास से मुक्ति: नीलगायों के आतंक पर उन्होंने बताया कि सरकार ने इसके लिए घोषणा कर रखी है। किसान अपने क्षेत्र के मुखिया को आवेदन दें। मुखिया के पास यह अधिकार है कि वह शूटर बुलाकर फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले घोडपड़ास को मरवा सकती हैं।
बैठक में ये लोग रहे मौजूद
ग्रामीणों के बीच से डर का माहौल खत्म करने के लिए आयोजित इस बैठक में रेंजर रामप्रवेश ठाकुर, मुखिया शांति देवी, पंचायत समिति सदस्य सुनील कुमार सुमन, जदयू के पूर्व अध्यक्ष संजय कुमार मंडल, जैनेंद्र कुमार, कालेश्वर मंडल सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित थे।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।