पूर्णिया के किसानों को लखपति बनाएगी ये नई खेती, बिहार सरकार दे रही 60% सब्सिडी
पूर्णिया जिले में मीठे पानी में मोती संवर्धन की पहल शुरू हुई है, जिसमें दो किसानों का चयन कर उन्हें प्रशिक्षित किया गया है।

पूर्णिया के किसानों को लखपति बनाएगी ये नई खेती, बिहार सरकार दे रही 60% सब्सिडी (AI Generated Image)
HighLights
पूर्णिया में मीठे पानी में मोती संवर्धन की शुरुआत।
दो किसानों का चयन, 60% सरकारी अनुदान मिलेगा।
50 डिसमिल से 25,000 मोती, 10 लाख से अधिक आय।
मनोज कुमार, पूर्णिया। समुद्र में पाए जाने वाला प्राकृतिक रत्न मोती अब हमारे खेतों में उपजेगा। इसके लिए जिले में कवायद तेज हो गई है। मीठे पानी में मोती संवर्धन के लिए जिला मत्स्य विभाग ने पहल शुरू की है। शुरुआती दौर में इसके लिए दो किसानों का चयन हुआ है और इसकी आवश्यक प्रकिया शुरू हो गई है।
राज्य सरकार द्वारा संचालित इस योजना के तहत मोती उत्पादन के लिए पूर्णिया पूर्व एवं वैसा प्रखंड के दो किसान आगे आए हैं। लगभग ढाई लाख के इस प्रोजेक्ट में सरकार द्वारा लगभग 60 फीसद अनुदान दिया जाएगा।
जिला मत्स्य पदाधिकारी शशि रंजन ने बताया कि जिले में फिलहाल दो यूनिट मोती उत्पादन शुरू किया जा रहा है। योजना अंतर्गत दो किसानों का चयन कर 50-50 डिसमिल तालाब तैयार कर उसमें सिप के माध्यम से मोती तैयार किया जाएगा। दोनों किसानों को बाहर भेजकर प्रशिक्षित किया गया है।
उत्पादन शुरू करने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है। माेती उत्पादन के बाद विभाग किसानों को बाजार उपलब्ध कराने में भी मदद करेगा।
कैसे होगा मोती का उत्पादन?
भारत तथा अन्य देशों में मोती की मांग लगातार बढ़ रही है। आवश्यकता से अधिक दोहन एवं प्रदूषण के कारण प्रकृति से इसके आपूर्ति में कमी आई है, इसलिए देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से काफी अत्यधिक मात्रा में संवर्धित मोती का आयात किया जा रहा है।
आधुनिक संवर्धित मोती पालन में चीन एवं जापान अग्रणी देश है। इसके द्वारा बड़े पैमाने पर मोती उत्पादन किया जाता है। दरअसल मीठे पानी में मोती संवर्धन समुद्री मोती की तुलना में कई फायदे हैं। यहां प्रचुर मात्रा में खेती योग्य क्षेत्र उपलब्ध हैं। साथ ही दूषित, छेद करने वाला और शिकारी जीवों की यहां कमी है।
इस कारण सिप को नुकसान नहीं पहुंचता है तथा अधिक किफायती है। हाल के वर्षों में मोती के कुल उत्पादन में मीठे पानी के मोती संवर्धन का एक बड़ा हिस्सा शामिल है।
अब देश में भी इसका उत्पादन होने लगा है। राज्य में भी मीठे पानी में मोती उत्पादन की योजना शुरू की गई है। इसी के तहत जिले में भी इसकी शुरुआत हुई है।
किसानों के लिए है काफी लाभदायक
मोती का उत्पादन किसानों के लिए आर्थिक आय का प्रमुख स्रोत साबित हो सकता है। तालाब में मोती का उत्पादन मुख्य रूप से मीठे पानी के सीप के जरिए किया जाता है। स्वस्थ और जीवित सीप (मसल) को नदियों या तालाबों से इकट्ठा किया जाता है।
सीप के अंदर सर्जरी करके एक छोटा बाहरी कण या मनका डाला जाता है। यह कण सीप को परेशान करता है, जिससे वह सुरक्षा के लिए इसके चारों ओर नैकर (कैल्सियम कार्बोनेट की परत) स्रावित करना शुरू कर देता है।
ऑपरेशन किए गए सीपों को नायलॉन बैग या जालीदार थैलियों में रखकर तालाब के पानी में बांस या ट्रे के सहारे लटका दिया जाता है। सीप को तालाब में एक से दो साल तक रखा जाता है। इस दौरान सीप उस मनके पर नैकर की परतें जमाता रहता है, जिससे मोती तैयार होता है।
समय पूरा होने पर सीप को सावधानी से खोलकर मोती बाहर निकाला जाता है। जिला मत्स्य पदाधिकारी ने बताया कि पचास डिसमिल में कम से कम 25,000 मोती तैयार होता है, जिसका बाजार मूल्य 10 लाख रुपये से अधिक है।
