Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    जहरीला चारा बना काल! हरी घास खाने के बाद बछड़ों समेत सात मवेशियों की मौत, गांव में हड़कंप

    Updated: Sat, 27 Jun 2026 08:01 PM (IST)

    रोहतास के शिवसागर प्रखंड में हरी घास खाने के बाद दो बछड़ों समेत सात मवेशियों की मौत हो गई, जिससे पशुपालक को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। पशु चिकित्सा अध ...और पढ़ें

    दो बछड़ों समेत सात मवेशियों की मौत(AI फोटो)

    दो बछड़ों समेत सात मवेशियों की मौत(AI फोटो)

    HighLights

    1. शिवसागर में हरी घास खाने से सात मवेशियों की मौत।

    2. मृत मवेशियों में दो बछड़े, एक गाय और चार भैंस शामिल।

    3. जहरीली घास से विषाक्तता की आशंका, पोस्टमार्टम जारी।

    संवाद सूत्र, शिवसागर(सासाराम)। रोहतास जिले के शिवसागर प्रखंड के सोनहर पंचायत अंतर्गत तेलिपोखर गांव में हरी घास खाने के बाद बछड़ों समेत सात मवेशियों की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया। पशुपालक को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और प्रशासन से मुआवजे की मांग उठने लगी है।

    चारा खाने के कुछ देर बाद बिगड़ी तबीयत

    जानकारी के अनुसार, गांव निवासी राधेश्याम सिंह ने शुक्रवार शाम अपने मवेशियों को चारे के साथ हरी घास खिलाई थी।

    चारा खाने के कुछ ही देर बाद एक-एक कर सभी मवेशियों की तबीयत बिगड़ने लगी। हालात गंभीर होते देख उन्होंने तत्काल स्थानीय पशु चिकित्सक को बुलाया।

    इलाज शुरू होने से पहले सात मवेशियों ने तोड़ा दम

    पशु चिकित्सक के पहुंचने से पहले ही सात मवेशियों की मौत हो गई। मृत मवेशियों में दो बछड़े, एक गाय और चार भैंस शामिल हैं।

    एक साथ इतने मवेशियों की मौत से पशुपालक के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    जहरीली घास से विषाक्तता की आशंका

    पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार ने बताया कि बाजरा जैसी कुछ घासों में विशेष परिस्थितियों में साइनाइड उत्पन्न करने वाले यौगिकों की मात्रा बढ़ सकती है।

    ऐसी घास खाने से पशुओं में विषाक्तता होने का खतरा रहता है। हालांकि, मौत के सही कारणों की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

    पोस्टमार्टम के लिए पहुंची विशेषज्ञों की टीम

    घटना के बाद शनिवार को पटना से पशु चिकित्सकों की टीम गांव पहुंची। सभी मृत मवेशियों का पोस्टमार्टम कराया गया है।

    अब पोस्टमार्टम और प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट के आधार पर मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाएगा।

    पशुपालक के लिए मवेशी ही थे आजीविका का सहारा

    पशुपालक राधेश्याम सिंह ने बताया कि मवेशी ही उनके परिवार की आय का मुख्य साधन थे। समाजसेवी बबलू जायसवाल ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।