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    ‘मेरे जीते जी कोई मुझसे बड़ा नहीं’: अनोखे संकल्प वाले बिहार के मजिस्ट्रेट साहब की कहानी, बेटा-पोता बने बड़े हाक‍िम

    Updated: Sat, 04 Apr 2026 08:21 AM (IST)

    करगहर (रोहतास) के रामबचन पांडेय एक अद्वितीय बिहार प्रशासनिक सेवा अधिकारी थे, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत से लेकर आजादी के बाद तक सेवा दी। 1975 में एडीएम ...और पढ़ें

    हर छोटी-बड़ी बात डायरी में ल‍िखते थे मज‍िस्‍ट्रेट साहब। प्रतीकात्‍मक फोटो

    हर छोटी-बड़ी बात डायरी में ल‍िखते थे मज‍िस्‍ट्रेट साहब। प्रतीकात्‍मक फोटो

    HighLights

    1. रामबचन पांडेय ने 1975 में एडीएम पद से सेवानिवृत्ति ली।

    2. उन्होंने अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी की, जो सच हुई।

    3. उनके बेटे और पोते बाद में IAS अधिकारी बने।

    सुरेंद्र तिवारी, करगहर (रोहतास)। बिहार में आजादी से पहले और बाद में सैकड़ों बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी बने, लेकिन करगहर प्रखंड मुख्यालय निवासी रामबचन पांडेय की कहानी सबसे अलग और प्रेरणादायक है।

    अंग्रेजी हुकूमत के दौर में सेवा में आए रामबचन पांडेय ने अपने कर्तव्यनिष्ठ और अनुशासित कार्यशैली से विशेष पहचान बनाई।

    उन्होंने 25 दिसंबर 1975 को बक्सर में एडीएम पद से सेवानिवृत्ति ली। इससे पहले वे पलामू, गया और हाजीपुर जैसे स्थानों पर अपनी सेवाएं दे चुके थे।

    रामबचन पांडेय की एक खास आदत थी, वे अपने जीवन की हर छोटी-बड़ी घटना और खर्च का विवरण डायरी में दर्ज करते थे, जो उनके अनुशासन और पारदर्शिता को दर्शाता है।

    राम और हनुमान के परम भक्त

    प्रशासनिक सेवा में रहते हुए भी वे धार्मिक आस्था से जुड़े रहे। वे भगवान राम और हनुमान के अनन्य भक्त थे। सेवानिवृत्ति के बाद तो उन्होंने पूरी तरह भक्ति का मार्ग अपना लिया और प्रतिदिन सवा लाख राम-नाम का जाप करते थे।

    करगहर निवासी सेवानिवृत्त सैनिक झारखंडे पांडेय बताते हैं कि रामबचन पांडेय स्वभाव से जिद्दी लेकिन बेहद सरल और शालीन व्यक्ति थे। आम लोगों के बीच उनका व्यवहार इतना सहज था कि लोग उन्हें प्यार से “मजिस्ट्रेट साहब” कहकर बुलाते थे।

    संकल्प और अद्भुत भविष्यवाणी

    रामबचन पांडेय ने जीवन में एक अनोखा संकल्प लिया था, वे चाहते थे कि उनके जीवित रहते उनकी कोई संतान उनसे बड़े पद पर न पहुंचे।

    उनके पांचवें पुत्र विवेकानंद पांडेय उर्फ मुन्ना बताते हैं कि 1993 में पारिवारिक बंटवारे से आहत होकर उन्होंने घोषणा की कि वे 25 दिसंबर 1995 को अपना शरीर त्याग देंगे।

    उन्होंने परिवार के सभी सदस्यों को उस दिन उपस्थित रहने के लिए कहा। शुरू में किसी को उनकी बात पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने अपने पुत्रों से पैसे भी मंगवाए और नियमित राम-नाम जाप में लीन हो गए।

    आखिरकार, 25 दिसंबर को उन्होंने अपने संकल्प के अनुसार ही देह त्याग दिया, जो आज भी लोगों के बीच आश्चर्य और चर्चा का विषय बना हुआ है।

    संतानों ने बढ़ाया गौरव

    रामबचन पांडेय के छह पुत्र हुए, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में सफलता हासिल की। इनमें सच्चिदानंद पांडेय (डिफेंस अकाउंट अधिकारी), कृष्णानंद पांडेय (कार्यपालक अभियंता, आरईओ) बने। 

    इसी तरह रामानंद पांडेय (जनरल मैनेजर, एनटीपीसी), परमानंद पांडेय (स्पोर्ट्स कंपनी मैनेजर), विवेकानंद पांडेय (कृषि कार्य) और आईएएस अधिकारी पी. दयानंद शामिल हैं, जो छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के सचिव रहे।

    उनके परिवार की उपलब्धियां यहीं नहीं रुकीं। उनके पोते भी विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं, रवि रंजन (सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता), डॉ. मधु रंजन (एमबीबीएस, कर्नाटक), राहुल आनंद (इंजीनियर), रोहित कृष्ण (अमेरिका की मल्टीनेशनल कंपनी में डायरेक्टर) और पी. ऋत्विक, जो देहरादून में वित्त विभाग में डायरेक्टर हैं।

    विशेष बात यह है कि रामबचन पांडेय के निधन के बाद उनके पुत्र पी. दयानंद वर्ष 2006 में पूरे देश में 52वीं रैंक लाकर आईएएस बने, वहीं उनके पोते पी. ऋत्विक ने 2013 में आईएएस बनकर परिवार का नाम और ऊंचा किया।

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    सादगी और उच्च विचार की मिसाल

    रामबचन पांडेय का जीवन सादा जीवन और उच्च विचार का जीवंत उदाहरण था। उन्होंने प्रशासनिक सेवा में रहते हुए ईमानदारी, अनुशासन और मानवता की जो मिसाल पेश की, वह आज भी लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है।