कारगिल योद्धा के बेटे ने रचा इतिहास; IIM का मौका छोड़ चुना देशसेवा का रास्ता, भारतीय नौसेना अधिकारी बने रितेश
रोहतास के राघोडिहरा गांव के रितेश कुमार सिंह भारतीय नौसेना में सब लेफ्टिनेंट बन गए हैं, जो गांव के पहले कमीशंड सैन्य अधिकारी हैं। उनकी यह उपलब्धि पूरे ...और पढ़ें

अपने माता-पिता के साथ रितेश। सौ-स्वजन
HighLights
रितेश कुमार सिंह भारतीय नौसेना में सब लेफ्टिनेंट पद पर नियुक्त।
राघोडिहरा गांव के पहले कमीशंड सैन्य अधिकारी बने रितेश।
पिता की प्रेरणा से देश सेवा का सपना किया साकार।
संवाद सूत्र, सूर्यपुरा (रोहतास)। गुरुवार को दिन स्थानीय प्रखंड के राघोडिहरा गांव के लिए गौरवपूर्ण रहा। गांव के युवा रितेश कुमार सिंह ने भारतीय नौसेना में सब लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन प्राप्त किया।
28 मई को मिली इस उपलब्धि के साथ ही वह राघोडिहरा गांव के पहले कमीशंड सैन्य अधिकारी बन गए हैं। उनकी सफलता से पूरे गांव, प्रखंड और आसपास के क्षेत्र में हर्ष और गर्व का माहौल है।
रितेश कुमार सिंह, सेवानिवृत्त सूबेदार जनार्दन सिंह एवं गृहिणी पुष्पा देवी के छोटे पुत्र हैं। उनके पिता ने भारतीय सेना में लगभग 30 वर्षों तक सेवा दी है तथा कारगिल युद्ध में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
पिता की देशभक्ति, अनुशासन और सैन्य जीवन से प्रेरित होकर रितेश ने बचपन में ही सेना में अधिकारी बनने का सपना देख लिया था।
माता-पिता ने कंधे पर सजाया स्टार
कमीशन प्राप्ति समारोह के दौरान माता-पिता ने जब उनके कंधों पर सुनहरी स्टार और पट्टियां सजाईं, तो वह क्षण पूरे परिवार के लिए भावुक और गर्व से भरा हुआ था।
रितेश ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद 10वीं कक्षा से ही सैन्य सेवाओं की तैयारी शुरू कर दी थी। इस कठिन सफर में उन्हें कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
बताया जाता है कि उन्होंने 10 से अधिक एसएसबी इंटरव्यू दिए। हर असफलता के बाद उन्होंने और अधिक मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ खुद को तैयार किया।
आखिरकार जून 2025 में उनका चयन भारतीय नौसेना में हुआ और अब वह सब लेफ्टिनेंट के रूप में देश सेवा के गौरवपूर्ण दायित्व का निर्वहन करेंगे।
CAT में किया बेहतर प्रदर्शन
शैक्षणिक क्षेत्र में भी रितेश का प्रदर्शन अत्यंत उत्कृष्ट रहा है। उन्होंने 12वीं की पढ़ाई आर्मी पब्लिक स्कूल, इलाहाबाद से तथा बीएससी की शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्राप्त की।
उन्होंने कैट परीक्षा में 90 परसेंट अंक हासिल किए थे, जिसके आधार पर उन्हें भारतीय प्रबंधन संस्थान अमृतसर और भारतीय प्रबंधन संस्थान गया में प्रवेश का अवसर भी मिला।
हालांकि परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े, इस सोच के साथ उन्होंने बीएचयू से एमबीए करने का निर्णय लिया।
बड़े भाई ने इंफोसिस में पदाधिकारी
रितेश के बड़े भाई विकास कुमार सिंह ने भी बीटेक इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है और वर्तमान में इंफोसिस में टीम लीडर के पद पर कार्यरत हैं।
परिवार के दोनों बेटों की उपलब्धियों ने गांव और क्षेत्र का मान बढ़ाया है। रितेश की सफलता आज क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
छोटे से गांव से निकलकर भारतीय नौसेना में अधिकारी बनने तक का उनका संघर्षपूर्ण सफर यह संदेश देता है कि दृढ़ संकल्प, कठिन परिश्रम और धैर्य के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
गांव एवं आसपास के लोगों ने रितेश और उनके परिवार को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और सफल सैन्य जीवन की कामना की है।