39 साल बाद कैमूर में लौटेगी औद्योगिक रौनक; हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार, मिला करोड़ों टन ग्लूकोनाइट भंडार
कैमूर पहाड़ी में चूना पत्थर और ग्लूकोनाइट के विशाल भंडार मिलने से रोहतास में बड़े औद्योगिक निवेश की तैयारी है। रूंगटा माइंस द्वारा खनन कार्य नवंबर-दिस ...और पढ़ें

कैमूर की पहाड़ी बदलेगी क्षेत्र की तस्वीर। फाइल
HighLights
कैमूर पहाड़ी में चूना पत्थर और ग्लूकोनाइट के भंडार मिले।
141 मिलियन टन ग्लूकोनाइट भंडार की पुष्टि हुई।
रूंगटा माइंस द्वारा नवंबर-दिसंबर से खनन शुरू होगा।
प्रेम कुमार पाठक, डेहरी ऑन सोन (रोहतास)। कैमूर पहाड़ी के तटीय इलाकों में प्राकृतिक संपदा का ऐसा खजाना छिपा है, जो आने वाले वर्षों में यहां बसे पांच दर्जन से अधिक गांवों की तस्वीर बदल सकता है।
चूना पत्थर और ग्लूकोनाइट जैसे बहुमूल्य खनिजों के विशाल भंडार से न केवल स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
पिछले वर्ष भरुही क्षेत्र में चूना पत्थर के उत्खनन के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी की गई थी। वहीं, नौहट्टा प्रखंड के पिपराडीह और भुड़वा गांव के आसपास ग्लूकोनाइट का बड़ा भंडार मिलने के बाद खनन प्रक्रिया को लेकर तेजी आई है।
इस परियोजना के लिए रूंगटा माइंस के साथ इकरारनामा भी किया जा चुका है। कंपनी द्वारा सर्वेक्षण और पूर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, यदि सब कुछ योजना के अनुरूप रहा तो नवंबर-दिसंबर से यहां खनन कार्य शुरू हो सकता है।
करीब 39 वर्षों बाद यह इलाका फिर से किसी बड़े औद्योगिक समूह की गतिविधियों का केंद्र बनने जा रहा है। इससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
463 हेक्टेयर क्षेत्र में विशाल ग्लूकोनाइट भंडार
खान एवं भूतत्व मंत्रालय के आकलन के अनुसार, 463.995 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 141.13 मिलियन टन ग्लूकोनाइट पोटाश का भंडार मौजूद है। इस खनन कार्य का जिम्मा रूंगटा माइंस को सौंपा गया है।
खनन परियोजना से पिपराडीह, पड़रिया, नौहट्टा, टीपा, निमाहत, भुड़वा, चुनहट्टा, केसीक्स और डबुआ सहित करीब पांच दर्जन गांवों के लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है।
यहां से निकलने वाला ग्लूकोनाइट उर्वरक निर्माण में उपयोगी होगा, जिससे कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा। इसी कड़ी में 20 मई को टीपा, नवारा-नवाडीह और शाहपुर-अकबरपुर राजस्व गांवों के निकट नए ग्लूकोनाइट ब्लॉकों की निविदा प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।
जून के दूसरे सप्ताह में इसके आवंटन की घोषणा होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में करीब 88.38 मिलियन टन ग्लूकोनाइट होने का अनुमान लगाया गया है।
2017 के सर्वे में मिली थी बड़ी संभावना
वर्ष 2017 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में इस क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता का ग्लूकोनाइट मिलने की पुष्टि हुई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, इससे पोटाश उर्वरक और रंग-द्रव्य निर्माण के लिए पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध हो सकेगा। साथ ही यह भू-वैज्ञानिक अनुसंधान के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि यदि क्षेत्र की बंद पड़ी खदानें दोबारा शुरू होती हैं, तो पूरे इलाके की किस्मत बदल सकती है। रोजगार बढ़ने से युवाओं का पलायन रुकेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
क्या बोले कंपनी अधिकारी
रूंगटा माइंस के अधिकारी रामराज सिंह ने बताया कि ड्रिलिंग के माध्यम से सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है। किस क्षेत्र में कितनी मात्रा में ग्लूकोनाइट मौजूद है, इसकी विस्तृत रिपोर्ट विभाग को भेजी जा रही है।
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उन्होंने कहा कि यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो गईं, तो नवंबर तक खनन कार्य औपचारिक रूप से शुरू होने की पूरी संभावना है।