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    सुबह 5 बजे शुरू होती है मेहनत, फिर नेशनल तक पहुंचता है सपना; रोहतास का कैथी बना 'वॉलीबॉल की नर्सरी'

    Updated: Sat, 18 Jul 2026 12:58 PM (IST)

    रोहतास जिले के संझौली प्रखंड का कैथी गांव वॉलीबॉल में अपनी बेटियों की प्रतिभा के लिए जाना जाता है। यहां की 18 बेटियां राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेल च ...और पढ़ें

    कोच के साथ वॉलीबॉल की ख‍िलाड़ी। जागरण

    कोच के साथ वॉलीबॉल की ख‍िलाड़ी। जागरण

    HighLights

    1. कैथी गांव की 18 बेटियां राज्य-राष्ट्रीय वॉलीबॉल में चमकीं।

    2. रोजाना 4 किमी चलकर करती हैं दो घंटे अभ्यास।

    3. प्रशिक्षक अंकित कुमार और डीएम से मिल रहा समर्थन।

    प्रमोद टैगोर, संझौली (रोहतास)। खेलों में प्रतिभा केवल बड़े शहरों या आधुनिक सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। जुनून, मेहनत और सही मार्गदर्शन मिले तो छोटे गांवों की बेटियां भी राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकती हैं।

    इसका जीता-जागता उदाहरण है रोहतास जिले के संझौली प्रखंड का कैथी गांव, जहां की बेटियां वॉलीबॉल में लगातार नई ऊंचाइयां छू रही हैं।

    करीब ढाई से तीन हजार की आबादी वाले इस गांव की 18 बेटियां राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर वॉलीबॉल में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं।

    इनमें 16 बेटियां राज्य स्तर और पांच बेटियां राष्ट्रीय स्तर पर बिहार का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद इन खिलाड़ियों ने साबित कर दिया है कि सफलता का रास्ता मेहनत और लगन से बनता है।

    नेशनल स्कूल कनेक्ट प्रोग्राम तक पहुंचीं गांव की बेटियां

    कैथी गांव की बेटियां भारत सरकार के नेशनल स्कूल कनेक्ट प्रोग्राम 'यस पे' (YES PE) का भी हिस्सा बन चुकी हैं। इस कार्यक्रम में देश के प्रत्येक राज्य से केवल दो लड़के और दो लड़कियों का चयन किया गया था।

    बिहार से चुनी गई दो लड़कियों में काजल और सलोनी, दोनों कैथी गांव की ही छात्राएं हैं। इसके अलावा इसी वर्ष मार्च में प्रीति कुमारी, पिंकी कुमारी और अर्चना कुमारी ने बिहार टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए सब जूनियर नेशनल वॉलीबॉल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और गांव का नाम रोशन किया।

    हर सुबह चार किलोमीटर का सफर, फिर दो घंटे का अभ्यास

    इन बेटियों की सफलता के पीछे कठिन परिश्रम की लंबी कहानी है। गांव में वॉलीबॉल अभ्यास के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। इसलिए सभी खिलाड़ी रोज सुबह पांच बजे उठकर चार किलोमीटर दूर संझौली खेल मैदान पहुंचती हैं।

    करीब दो घंटे तक कड़ा अभ्यास करने के बाद वे समय पर स्कूल भी जाती हैं। रोजाना का यह अनुशासन और समर्पण ही उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक लेकर गया है।

    ट्रेनर अंकित कुमार ने बदली तस्वीर

    इन खिलाड़ियों की सफलता के पीछे सबसे बड़ा योगदान उच्च माध्यमिक विद्यालय कैथी के शारीरिक शिक्षक एवं प्रशिक्षक अंकित कुमार सिंह का है।

    वे बिहार सब जूनियर वॉलीबॉल टीम के कोच भी हैं और स्वयं ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी तथा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बिहार का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

    स्कूल के नियमित समय के अलावा भी वे बेटियों को अतिरिक्त समय देकर अभ्यास कराते हैं। गांव के लोग बताते हैं कि उन्होंने फिल्म 'तारे ज़मीन पर' के शिक्षक की तरह इन बेटियों की प्रतिभा को पहचाना, उन्हें निखारा और राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का आत्मविश्वास दिया।

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    डीएम बोले- हर संभव सुविधा मिलेगी

    रोहतास के जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने भी इन बेटियों की उपलब्धियों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि कैथी गांव की खिलाड़ी वॉलीबॉल में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।

    डीएम ने बताया कि वे स्वयं इन खिलाड़ियों से मिल चुके हैं और जिला प्रशासन की ओर से उन्हें हरसंभव सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोहतास एवं बिहार का नाम और ऊंचा कर सकें।