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    बिहार में भी है इंद्रधनुष वाला झरना, धुंआ कुंड का नजारा कर देगा मंत्रमुग्‍ध; कैमूर की वादियों में छिपा स्वर्ग

    Updated: Wed, 06 May 2026 10:13 AM (IST)

    रोहतास जिले की कैमूर पहाड़ियों में मांझर कुंड, धुंआ कुंड और तुतला भवानी जैसे 12 से अधिक मनमोहक जलप्रपात हैं। ये प्राकृतिक स्थल जुलाई से अक्टूबर के बीच ...और पढ़ें

    धुआं कुंड और मांझर कुंड झरना। जागरण

    धुआं कुंड और मांझर कुंड झरना। जागरण

    HighLights

    1. कैमूर पहाड़ियों में 12 से अधिक मनमोहक जलप्रपात।

    2. धुंआ कुंड में पानी से बनता इंद्रधनुषी धुआं।

    3. जुलाई से अक्टूबर तक झरनों की सुंदरता चरम पर।

    सतीश कुमार, सासाराम (रोहतास)। यदि कैमूर पहाड़ियों की हरियाली के बीच गिरते झरनों की कल-कल ध्वनि का आनंद लेना हो, तो रोहतास जिले की सैर जरूर करनी चाहिए।

    यहां कैमूर पर्वत श्रृंखला की गोद में बसे मांझर कुंड, धुंआ कुंड, सीता कुंड, तुतला भवानी और कशिश जलप्रपात जैसे प्राकृतिक स्थल पर्यटकों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

    कैमूर और रोहतास जिले के आठ प्रखंडों तक फैली पर्वत श्रृंखला के करीब 90 किलोमीटर के दायरे में लगभग 12 जलप्रपात मौजूद हैं।

    ये झरने प्रकृति की जीवंतता और निरंतरता का अद्भुत अनुभव कराते हैं। खासकर जुलाई से अक्टूबर के बीच इनकी खूबसूरती अपने चरम पर होती है। बरसात में पहाड़ों से उतरता जलप्रवाह झरनों को और अधिक मनोहारी बना देता है।

    हालांकि कुछ स्थानों तक पहुंचने के रास्ते पथरीले हैं, लेकिन यात्रा रोमांच और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर रहती है। सासाराम, तिलौथू, रोहतास, नौहट्टा और चेनारी प्रखंडों में सबसे अधिक जलप्रपात स्थित हैं।

    Tutla Bhawani

    (तुतला भवानी जलप्रपात का मनोरम दृश्‍य।)

    धुंआ कुंड : जहां पानी बन जाता है धुएं की चादर

    सासाराम से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित धुंआ कुंड अपनी अनोखी बनावट और प्राकृतिक छटा के लिए प्रसिद्ध है। यहां लगभग 130 फीट की ऊंचाई से गिरता पानी नीचे चट्टानों से टकराकर महीन कणों में बंट जाता है।

    इससे धुएं जैसा दृश्य बनता है। इसी कारण इसे धुंआ कुंड कहा जाता है। चारों ओर फैली पहाड़ियों के बीच जब सूर्य की किरणें इस जलप्रपात पर पड़ती हैं, तो पानी में इंद्रधनुष जैसी सतरंगी छटा दिखाई देती है।

    यह दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। काव और कुदरा नदियों का उद्गम भी इसी धुंआ कुंड से माना जाता है।

    मांझर कुंड : प्रकृति और रोमांच का संगम

    मांझर कुंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शीतल जल के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। कैमूर पहाड़ियों से गिरने वाला इसका पानी खनिजों से भरपूर माना जाता है। गर्मी के दिनों में इसका ठंडा और स्वच्छ जल लोगों को राहत पहुंचाता है।

    सावन और भादो के महीनों में इस झरने की सुंदरता और भी निखर जाती है। ऊंचाई से गिरते पानी की आवाज मानो प्रकृति का मधुर संगीत सुनाती है।

    जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थल हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता है। बरसात के मौसम में जब जलप्रवाह तेज होता है, तब यहां का दृश्य किसी प्राकृतिक स्वर्ग से कम नहीं लगता।

    Trara Chandi

    (कैमूर पहाड़ी की गुफा में स्थित मां ताराचंडी।)

    सीता कुंड : आस्था और शांति का प्रतीक

    मांझर कुंड से लगभग 400 मीटर पहले स्थित सीता कुंड धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि वनवास के दौरान माता सीता के चरण यहां पड़े थे।

    यह झरना अपेक्षाकृत शांत और सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि यहां पानी का प्रवाह धीमा रहता है। इसी कारण परिवार और बच्चों के साथ आने वाले पर्यटक यहां अधिक सहज महसूस करते हैं।

    Mahadev Cave

    (रोहतास स्‍थ‍ित महादेव खोह।)

    तुतला भवानी जलप्रपात : गुफा मंदिर और झरने का अद्भुत संगम

    तिलौथू से करीब पांच किलोमीटर दूर रामडिहरा गांव के पास स्थित मां तुतला भवानी जलप्रपात धार्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है।

    पहाड़ी गुफा में मां तुतला भवानी विराजमान हैं और मंदिर के ठीक ऊपर से गिरता झरना नीचे कुंड में समाहित होता है। यहां का दृश्य अत्यंत मनमोहक और शांतिपूर्ण है। तुतराही नदी का उद्गम भी इसी क्षेत्र से होता है।

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    कशिश जलप्रपात : गर्जना से गूंजती कैमूर की पहाड़ियां

    कछुअर चाकडीह गांव के समीप स्थित कशिश जलप्रपात बिहार के प्रमुख जलप्रपातों में गिना जाता है। यहां पहुंचने से करीब एक किलोमीटर पहले ही पानी की तेज गर्जना सुनाई देने लगती है।

    लगभग 850 फीट की ऊंचाई से चार धाराओं में गिरता पानी अत्यंत आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करता है। प्राकृतिक रोमांच के शौकीनों के लिए यह स्थान खास आकर्षण का केंद्र है।

    महादेव खोह और वंशी खोह : आस्था के साथ रोमांच

    नौहट्टा प्रखंड में स्थित महादेव खोह जलप्रपात सतियाड़ गांव के पास भूखी खोह से दक्षिण दिशा में लगभग तीन किलोमीटर दूर है।

    यहां प्राचीन शिवलिंग के दर्शन के साथ झरने की मनमोहक छटा श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आध्यात्मिक अनुभूति कराती है। इसके आगे स्थित वंशी खोह जलप्रपात भी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है।

    कैमूर की पहाड़ियों में बसे ये जलप्रपात न केवल बिहार की प्राकृतिक धरोहर हैं, बल्कि पर्यटन की अपार संभावनाओं से भी भरपूर हैं।

    मानसून के मौसम में यहां की हरियाली, झरनों की गर्जना और पहाड़ियों का सौंदर्य पर्यटकों को प्रकृति के बेहद करीब ले जाता है।