रोहतास में नौसेना का जवान बना उद्यमी: कुल्हड़ प्लांट लगाकर रोका पलायन, 15 लोगों को मिला रोजगार
भारतीय नौसेना में कार्यरत संदीप दुबे ने बिहार के रोहतास स्थित अपने गांव योगिनी में पलायन रोकने के लिए एक कुल्हड़ निर्माण संयंत्र और ताइवानी पपीते की ख ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
पुरंजय कुमार मिश्रा, दावथ (रोहतास)। कहते हैं कि बदलाव की शुरुआत एक सोच से होती है। प्रखंड के नगर पंचायत कोआथ अंतर्गत वार्ड संख्या दो के योगिनी निवासी संदीप दुबे ने इस सोच को हकीकत में बदलकर एक मिसाल पेश की है।
भारतीय नौसेना में कार्यरत संदीप ने महानगरों में बिहार के प्रवासियों की स्थिति और उनके साथ होने वाले व्यवहार को करीब से देखा, जिसने उन्हें जन्मभूमि के लिए कुछ अलग करने की प्रेरणा दी।
संदीप ने संकल्प लिया कि वे अपने गांव में ऐसा उद्यम स्थापित करेंगे, जिससे स्थानीय लोगों को घर-आंगन में ही रोजगार मिल सके। इसी उद्देश्य से उन्होंने अपने खेत में मिट्टी के प्याले (कुल्हड़) बनाने का प्लांट लगाया है। वर्तमान में इस प्लांट के माध्यम से क्षेत्र के 10 से 15 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है।
आधुनिक खेती से आत्मनिर्भरता की ओर
सिर्फ उद्योग ही नहीं, संदीप ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए एक बीघे जमीन में ताइवान नस्ल के पपीते की खेती भी शुरू की है। उनका मानना है कि आधुनिक और उन्नत कृषि तकनीकों के जरिए कम जमीन से भी अधिक आय प्राप्त की जा सकती है, जिससे किसान और मजदूर दोनों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।
संदीप दुबे बताते हैं कि दिल्ली व मुंबई जैसे शहरों में अपने राज्य के लोगों की मजबूरी देखकर मन व्यथित होता था। तभी तय किया कि गांव में ही रोजगार के अवसर सृजित करने होंगे ताकि पलायन रुक सके। अभी यह शुरुआत है।
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वर्तमान में 15 लोग साथ हैं, लेकिन भविष्य में 100 से 200 लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य है। यदि बाहर कार्यरत लोग अपनी क्षमतानुसार गांव में छोटा निवेश या उद्योग शुरू करें, तो बिहार की तस्वीर बदल सकती है।
स्थानीय शिक्षक सुशील कुमार सिंह ने संदीप की पहल की सराहना करते हुए कहा कि अगर हर व्यक्ति संदीप जैसी सोच रखे, तो क्षेत्र का विकास तेजी से संभव है। यह युवाओं के लिए प्रेरणा हैं।
आज संदीप दुबे की यह पहल सिर्फ रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर गांव की दिशा में एक मजबूत कदम बनती दिख रही है। उनके प्रयास ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो गांव की मिट्टी से ही विकास की नई कहानी लिखी जा सकती है।