जो इलाका था नक्सलियों का गढ़, अब वहां अधिकारी बन रहीं बेटियां; सीमा ने गरीबी को हराकर BPSC में लहराया परचम
सीमा कुमारी ने नक्सल प्रभावित रोहतास के रसूलपुर गांव से निकलकर 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 1036वीं रैंक हासिल कर प्रखंड कल्याण पदाधिकारी का पद प्राप्त किया है।

सीमा कुमारी। फोटो एडिटेड बाय एआई
HighLights
सीमा कुमारी ने 70वीं बीपीएससी में 1036वीं रैंक हासिल की।
नक्सल प्रभावित रोहतास क्षेत्र से निकलकर बनीं प्रखंड कल्याण पदाधिकारी।
गरीबी और अभावों के बावजूद शिक्षा से रचा नया इतिहास।
प्रेम पाठक, डेहरी आन सोन (रोहतास)। यह कहानी उस बेटी की है, जिसने बंदूकों के साये में सिसकती माटी से उम्मीद का नया सूरज उगाया है।
कभी नौहट्टा, रोहतास प्रखंड लाल गलियारे के रूप में विख्यात था। वर्ष 2011 तक नक्सली हिंसा और लाल आतंक के साये में यह क्षेत्र कराहता रहा।
अभाव से अधिकारी तक
जहां कभी बेटियों की पढ़ाई और उनके सपने गांव की दहलीज लांघने से पहले ही दम तोड़ देते थे। खौफ और अशिक्षा के उसी दुर्गम परिवेश से निकलकर रोहतास प्रखंड के रसूलपुर गांव की सीमा कुमारी ने इतिहास रच दिया है।
उन्होंने बीपीएससी 70वीं परीक्षा में 1036वीं रैंक से उत्तीर्ण होकर प्रखंड कल्याण पदाधिकारी का पद हासिल किया है।
निहायत ही गरीब परिवार में जन्मीं सीमा की यह सफलता केवल एक पद की प्राप्ति नहीं, बल्कि परिस्थितियों के खिलाफ एक महासंग्राम की जीत है।
सीमा के पिता धर्मेंद्र सिंह परिवार का पेट पालने के लिए दूसरे राज्यों में मजदूरी करते थे। बाद में रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) की गंभीर समस्या और ऑपरेशन के कारण वे घर लौटने को मजबूर हुए और अब गांव में ही मजदूरी करते हैं।
मजबूत इरादों से पाई सफलता
सीमित संसाधनों के बावजूद सीमा की लगन अडिग रही। उन्होंने गांव के ही वित्त रहित सरकारी विद्यालय से 2015 में मैट्रिक पास किया।
इसके बाद 2017 में जवाहर लाल नेहरू कॉलेज, डेहरी से इंटर की पढ़ाई पूरी की। मेधा के बल पर बीसीईसी परीक्षा उत्तीर्ण कर छपरा स्थित लोक नायक जयप्रकाश नारायण इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी से 2021 में ईईई ट्रेड से बीटेक किया।
वर्ष 2022 में सेल्फ स्टडी कर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू की। उनकी कड़ी तपस्या का ही परिणाम था कि 2024 में बिहार पुलिस में दारोगा के पद पर उनका चयन हुआ और शिवहर जिला आवंटित हुआ, लेकिन सीमा की मंजिल और आगे थी।
बीपीएससी के नतीजों ने उनके सपनों को पंख लगा दिए। फिलहाल वे बिपार्ड (पटना) में प्रशिक्षण ले रही हैं। सीमा की इस सफलता के बारे में उनकी गृहिणी माता और बहन ममता कुमारी ने बताया कि बंजारी की सुप्रिया आनंद को बीपीएससी से सीओ बनते देख सीमा का मनोबल बढ़ा।
इस तरह सीमा ने भी साबित कर दिया कि हौसले अगर बुलंद हों तो गरीबी सफलता में रोड़ा नहीं बन सकती। सीमा आज रोहतास की हर उस बेटी के लिए प्रेरणा हैं जो अभावों में भी आसमान छूने का माद्दा रखती हैं।
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