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मद्य निषेध विभाग के SI से CISF असिस्टेंट कमांडेंट बने रोहित; रोहतास के किसान बेटे की ऊंची छलांग

Published: Wed, 17 Jun 2026 08:37 AM (IST)

रोहतास जिले के करूप गांव के रोहित कुमार ने कड़ी मेहनत और लगन से सीआईएसएफ में असिस्टेंट कमांडेंट का पद ...और पढ़ें

माता-पिता के साथ रोह‍ित कुमार। सौ-स्‍वजन

माता-पिता के साथ रोह‍ित कुमार। सौ-स्‍वजन

HighLights

  1. रोहित कुमार रोहतास के करूप गांव के निवासी हैं।

  2. सीआईएसएफ में असिस्टेंट कमांडेंट बनकर देश का नाम रोशन किया।

  3. मद्य निषेध विभाग के एसआई पद से यह मुकाम हासिल किया।

मुक्तिनाथ पांडेय, काराकाट (रोहतास)। कड़ी मेहनत, अटूट लगन और देशसेवा के जज्बे के बल पर रोहतास जिले के करूप गांव के लाल रोहित कुमार ने बड़ा मुकाम हासिल किया है।

हाल ही में हैदराबाद में आयोजित पासिंग आउट परेड के बाद केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में असिस्टेंट कमांडेंट बने रोहित कुमार जब अपने गांव पहुंचे तो उनका जोरदार स्वागत किया गया।

गांव की गलियों में उत्साह का माहौल था। स्वजन, रिश्तेदार और ग्रामीण अपने बीच पहुंचे युवा अधिकारी की एक झलक पाने को उत्सुक दिखे।

रोहित के कंधों पर चमकते सितारे और वर्दी देखकर परिजनों की आंखें गर्व से भर उठीं। चाचा हरिनारायण सिंह सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने इसे पूरे परिवार के लिए गौरव का क्षण बताया।

गांव पहुंचते ही मां काली का लिया आशीर्वाद

गांव पहुंचने के बाद रोहित अपने माता-पिता के साथ स्थानीय काली मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर मां काली का आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर में भी ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया और उनकी उपलब्धि पर बधाई दी।

किसान परिवार से निकलकर तय किया सफलता का सफर

रोहित कुमार एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता अटल बिहारी सिंह खेती-किसानी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं! 

माता सीमा देवी ने बेटे की पढ़ाई और सपनों को साकार करने में हर कदम पर साथ दिया। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद रोहित ने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।

उनके चचेरे भाई मुकेश कुमार और वार्ड पार्षद संतोष तिवारी ने बताया कि रोहित की प्रारंभिक शिक्षा बिहार बोर्ड से हुई। उन्होंने रामरूप उच्च विद्यालय, गोड़ारी से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की।

इसके बाद इंटरमीडिएट और स्नातक की पढ़ाई पटना में पूरी की। वहीं रहकर उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी की।

सब इंस्पेक्टर की नौकरी के साथ जारी रखी तैयारी

रोहित की सफलता की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने बिहार मद्य निषेध विभाग में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्य करते हुए भी अपने बड़े लक्ष्य को नहीं छोड़ा।

नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच समय निकालकर उन्होंने निरंतर तैयारी जारी रखी और आखिरकार सीआइएसएफ में असिस्टेंट कमांडेंट बनने का सपना पूरा कर दिखाया।

गांव की पगडंडियों से भी पहुंचा जा सकता है ऊंचाइयों तक

रोहित अक्सर कहा करते थे कि यदि इरादे मजबूत हों और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो गांव की पगडंडियों से निकलकर भी देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंचा जा सकता है।

उनका मानना है कि सफलता के लिए संसाधनों से अधिक जरूरी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास है। उन्होंने कहा कि सेना और अर्धसैनिक बलों में अधिकारी बनकर देश सेवा करना उनका बचपन का सपना था।

वह आज साकार हो गया है। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि माता-पिता और गांव का नाम रोशन करना हर युवा का दायित्व है।

युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत

रोहित की उपलब्धि से पूरे करूप गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सफलता क्षेत्र के युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करेगी।

गांव के लोगों ने उम्मीद जताई कि रोहित आगे भी अपनी सेवाओं और उपलब्धियों से जिले तथा राज्य का नाम रोशन करेंगे।