Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    कचरे से कमाई, सफाई में नंबर वन: सोनवर्षा बनी बिहार के अन्य पंचायतों के लिए मिसाल

    Updated: Tue, 07 Apr 2026 01:19 PM (GMT+05:30)

    काराकाट प्रखंड की सोनवर्षा पंचायत लोहिया स्वच्छता अभियान के तहत एक मिसाल बन गई है। यहां सफाई व्यवस्था बेहतर हुई है और कचरे से आय का नया रास्ता भी खुला ...और पढ़ें

    गांव में उठाया जा रहा कचरा और कचरे की हो रही छंटनी। जागरण

    गांव में उठाया जा रहा कचरा और कचरे की हो रही छंटनी। जागरण

    HighLights

    1. कचरे से आय का नया मॉडल विकसित किया गया।

    2. मुखिया राजीव रंजन सिंह स्वयं निगरानी करते हैं।

    3. सामुदायिक प्रयासों से पंचायत की गलियां साफ रहती हैं।

    मुक्ति नाथ पांडेय, सासाराम (रोहतास)। जहां कई पंचायतों में स्वच्छता व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित रहती है, वहीं काराकाट प्रखंड की सोनवर्षा पंचायत आज एक मिसाल बनकर उभरी है।

    लोहिया स्वच्छता अभियान के तहत यहां न सिर्फ सफाई व्यवस्था बेहतर हुई है, बल्कि कचरे से आमदनी का नया रास्ता भी खुला है।

    सफाईकर्मियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से पंचायत की गलियां और नालियां साफ-सुथरी नजर आती हैं। गांव में प्रवेश करते ही लोग खुद कह उठते हैं—“यहां तो गजब की सफाई है।”

    कचरे से कमाई का मॉडल बना उदाहरण

    पंचायत में घर-घर से अब तक करीब 25 हजार उपयोगिता शुल्क वसूले जा चुके हैं। घरेलू कचरे के निस्तारण और उसकी बिक्री से करीब 7 हजार रुपये की  आय हुई है। इससे सामुदायिक शौचालय की मरम्मत भी कराई गई है।

    अभी छांटे गए कचरे की बिक्री बाकी है, जिससे और आय होने की उम्मीद है। इसी फंड से समय-समय पर स्वच्छताकर्मियों को पारिश्रमिक भी दिया जाता है।

    Garbage

    (कचरे की हो रही प्रोसेसिंग।)

    हर दिन होती है कचरे की वैज्ञानिक प्रोसेसिंग

    सफाईकर्मी प्रतिदिन घरों से कचरा इकट्ठा कर उसे प्रसंस्करण इकाई तक पहुंचाते हैं, जहां गीले और सूखे कचरे को अलग किया जाता है।

    प्लास्टिक, लोहा जैसे बिक्री योग्य सामान को अलग कर बेच दिया जाता है, जिससे पंचायत की आय बढ़ती है।

    व्यवस्था पर खुद नजर रखते हैं मुखिया

    करीब 2000 की आबादी और 14 वार्ड वाले इस पंचायत में नालियां कभी ओवरफ्लो नहीं होतीं। नियमित सफाई के कारण गलियां हमेशा स्वच्छ रहती हैं।

    ग्रामीणों के अनुसार, मुखिया राजीव रंजन सिंह खुद सुबह-सुबह गांव का निरीक्षण करने निकलते हैं, जिससे व्यवस्था और मजबूत होती है।

    चुनौतियों के बावजूद जारी है प्रयास

    स्वच्छता पर्यवेक्षक कन्हैया कुमार सिंह बताते हैं कि घर-घर से शुल्क वसूली आसान नहीं है, कई बार विरोध का सामना भी करना पड़ता है।

    बावजूद इसके, इसी राशि से कुशी गांव के सामुदायिक शौचालय की मरम्मत कराई गई है। ग्रामीणों का मानना है कि अगर सभी लोग पूरी तरह सहयोग करें, तो यह मॉडल और भी बेहतर बन सकता है।