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    गर्भवती महिलाओं में टीबी का खतरा अधिक: जानलेवा हो सकती है लापरवाही, जानें लक्षण और बचाव

    Updated: Wed, 04 Feb 2026 11:55 AM (IST)

    यह लेख बताता है कि क्षय रोग (टीबी) केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि महिलाओं के प्रजनन अंगों को भी प्रभावित करता है, जिससे बांझपन का खतरा बढ़ता है। गर ...और पढ़ें

    गर्भवती महिलाओं में टीबी का खतरा अधिक। फाइल फोटो

    गर्भवती महिलाओं में टीबी का खतरा अधिक। फाइल फोटो

    HighLights

    1. टीबी महिलाओं के प्रजनन अंगों को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।

    2. गर्भवती महिलाओं में टीबी मां-शिशु दोनों के लिए घातक।

    3. समय पर जांच व इलाज से जटिलताओं से बचा जा सकता है।

    मुक्तिनाथ पांडेय, काराकाट (रोहतास)। क्षय रोग (टीबी) को केवल फेफड़ों की बीमारी समझना बड़ी भूल हो सकती है। यह बीमारी महिलाओं के गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब व प्रजनन तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।

    खासकर गर्भवती महिलाओं में टीबी का खतरा अधिक होता है, जो जच्चा-बच्चा यानी मां और शिशु दोनों के लिए घातक साबित हो सकता है।

    प्रखंड में टीबी ग्रसित महिलाओं की संख्या कम नहीं है। यह बात दीगर है कि हाल के दिनों में कुछ कमी आई है। वर्ष 2024 में कुल 836 संदिग्धों की जांच की गई, जिसमें 196 पाजीटिव थे। 2025 में 666 की जांच के दौरान 183 मरीज गंभीर रूप से पीड़ित मिले।

    एसटीएलएस भूतेश कुमार तांती व यक्ष्मा पर्यवेक्षक संजय कुमार के अनुसार माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया से होने वाली टीबी महिलाओं में बांझपन का बड़ा कारण बन रही है।

    गर्भावस्था के दौरान यदि समय पर टीबी होने का पता चल जाए और उचित इलाज शुरू कर दिया जाए, तो जटिलताओं से बचा जा सकता है

    लक्षणों को नहीं करें नजर अंदाज

    एक सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, तेज बुखार, भूख न लगना, अत्यधिक थकान, वजन का तेजी से गिरना, बलगम में खून आना या गर्दन के ग्रंथियों में सूजन दिखे तो तुरत टीबी की जांच करानी चाहिए।

    गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है। इसमें कमजोरी महसूस होती है। सीने में दर्द होता है तथा लंबे समय तक खांसी रहता है। सोते समय पसीना छूटने लगता है।

    महिलाओं में जेनिटल टीबी से बढ़ता है बांझपन

    प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. राजीव कुमार के अनुसार किसी भी टीबी से पीड़ित महिला में यूटरस टीबी होने की संभावना लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। कई मामलों में फैलोपियन ट्यूब बंद हो जाती है, जिससे पीरियड्स अनियमित होते हैं और महिला गर्भधारण नहीं कर पाती।

    पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द, सहवास के दौरान पीड़ा और असामान्य विजाइनल डिस्चार्ज इसके प्रमुख संकेत हैं।

    टीबी क्या है?

    माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया से होने वाली संक्रामक बीमारी, जो फेफड़ों के अलावा गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है।

    यह किडनी, मस्तिक और रीढ़ को भी प्रभावित करती है। सेंटर फार डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार गर्भावस्था में ट्यूबरकुलिन स्किन टेस्ट और टीबी ब्लड टेस्ट पूरी तरह सुरक्षित है। समय पर टीबी का इलाज संभव है ।इलाज न कराने पर शिशु को भी यह बीमारी होने का खतरा रहता है।

    खबरें और भी

    टीबी के प्रमुख लक्षण

    • एक सप्ताह से अधिक खांसी
    • तेज बुखार और कमजोरी
    • भूख न लगना, वजन घटना
    • बलगम में खून
    • गर्दन की ग्रंथियों में सूजन

    कब कराएं जांच

    • टीबी मरीज के अधिक संपर्क में रहने पर
    • लगातार कमजोरी या दर्द होने पर, गर्भावस्था में संदिग्ध लक्षण होने पर।

    संदिग्ध मरीजों की मासिक आंकड़े

    🦠 वर्ष 2024 vs 2025 – माहवार जांच एवं पॉजिटिव मामले

    2024

    माह जांच पॉजिटिव %
    जनवरी 52 17 32.7%
    फरवरी 53 12 22.6%
    मार्च 56 12 21.4%
    अप्रैल 79 22 27.8%
    मई 81 16 19.8%
    जून 50 14 28.0%
    जुलाई 70 14 20.0%
    अगस्त 75 20 26.7%
    सितंबर 75 19 25.3%
    अक्टूबर 86 20 23.3%
    नवंबर 75 17 22.7%
    दिसंबर 84 13 15.5%
    कुल 836 196 23.4%

    2025

    माह जांच पॉजिटिव %
    जनवरी 76 15 19.7%
    फरवरी 58 12 20.7%
    मार्च 62 12 19.4%
    अप्रैल 44 12 27.3%
    मई 68 14 20.6%
    जून 49 18 36.7%
    जुलाई 51 17 33.3%
    अगस्त 50 23 46.0%
    सितंबर 58 25 43.1%
    अक्टूबर 47 14 29.8%
    नवंबर 40 08 20.0%
    दिसंबर 63 13 20.6%
    कुल 666 183 27.5%

    2024 कुल जांच: 836 • पॉजिटिव: 196 (23.4%) 2025 कुल जांच: 666 • पॉजिटिव: 183 (27.5%) 2025 में जांच कम हुई लेकिन पॉजिटिव प्रतिशत में वृद्धि दर्ज