सहरसा की लेडी डॉक्टर ने दूसरी बेटी को दिया जन्म, पिता की गोद में बड़ी बेटी बोली- नन्हीं परी आई
सहरसा के महुआ बाजार में एक दंपती ने अपनी दूसरी बेटी के जन्म का भव्य जश्न मनाकर समाज को लैंगिक समानता का संदेश दिया। अस्पताल से घर लाते समय सजी कार में ...और पढ़ें

सहरसा में दूसरी बेटी के जन्म पर सजाई गुब्बारों वाली कार, गाजे-बाजे से घर लाईं लक्ष्मी, पेश की अनोखी मिसाल
HighLights
सहरसा दंपती ने दूसरी बेटी के जन्म का जश्न मनाया।
सजी कार में घर लाई गई नवजात, बड़ी बेटी हुई खुश।
आरती उतारकर भव्य गृह प्रवेश, समाज को दिया संदेश।
संवाद सूत्र, महुआ बाजार (सहरसा)। समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच और लैंगिक समानता का एक बेहद प्रेरक और भावुक कर देने वाला उदाहरण सहरसा जिले में देखने को मिला है। यहां महुआ बाजार के एक दंपती ने अपने घर दूसरी बेटी के जन्म पर किसी प्रकार का दुराव न करते हुए पूरे उत्साह और सम्मान के साथ जश्न मनाया।
सजी हुई कार में स्वागत
मधेपुरा स्थित अस्पताल में डॉ. लवली ने अपनी दूसरी बेटी को जन्म दिया। जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जब परिजन नवजात को घर ले जाने पहुंचे, तो वे फूलों और रंग-बिरंगे गुब्बारों से विशेष रूप से सजी कार लेकर पहुंचे, जिसे देखकर अस्पताल परिसर में मौजूद हर शख्स का दिल खुशी से भर गया।
बड़ी बेटी के मुंह से निकले बोल
अस्पताल से घर लौटते समय एक बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। गाड़ी में पिता राज आर्यन की गोद में बैठी उनकी बड़ी बेटी अपनी छोटी बहन को देखकर बेहद खुश थी। उसने अपनी तोतली और मासूम आवाज में अपनी खुशी जताते हुए कहा— "नन्हीं परी आई!" बच्ची के ये बोल सुनकर अस्पताल से लेकर घर तक मौजूद सभी लोगों की आंखें खुशी से छलक आईं।
आरती उतारकर गृह प्रवेश
नवजात बच्ची को पूरे आदर और दुलार के साथ महुआ बाजार स्थित पैतृक घर लाया गया। घर पहुँचने पर परिजनों ने नवजात की भव्य आरती उतारकर और फूल बरसाकर गृह प्रवेश कराया। इस दौरान पिता की गोद में बड़ी बेटी और मां की गोद में नवजात बच्ची का यह सुंदर नजारा राह चलते लोगों का भी ध्यान अपनी ओर खींच रहा था।
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समाज के लिए बनी मिसाल
आज भी समाज के कुछ हिस्सों में दूसरी बेटी के जन्म पर संकीर्ण सोच देखने को मिलती है। ऐसे समय में इस परिवार ने बिना किसी दिखावे के अपने आचरण से यह सिद्ध कर दिया कि संतान का मोल उसके लिंग से नहीं, बल्कि उसके जीवन की खुशियों से होता है। बेटियों को बेटों के बराबर स्नेह और सम्मान देना ही सच्चे सामाजिक सुधार की पहचान है।