सहरसा में सरकारी जमीन के दाखिल-खारिज का बड़ा खेल उजागर, पूर्व सीओ समेत राजस्व कर्मचारी पर कार्रवाई की सिफारिश
सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर अंचल में सरकारी पोखर और नदी की जमीन के अवैध दाखिल-खारिज का बड़ा मामला सामने आया है। जांच के बाद पूर्व अंचलाधिकारी और राजस्व ...और पढ़ें

सरकारी जमीन के अवैध दाखिल-खारिज का खुलासा, पूर्व सीओ पर कार्रवाई की सिफारिश
HighLights
सरकारी पोखर और नदी की जमीन का अवैध दाखिल-खारिज।
तत्कालीन अंचलाधिकारी शुभम वर्मा पर कार्रवाई की अनुशंसा।
डीसीएलआर की जांच में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं।
संवाद सूत्र, सिमरीबख्तियारपुर (सहरसा)। सिमरी बख्तियारपुर अंचल कार्यालय में सरकारी भूमि के दाखिल-खारिज से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि गैर मजरुआ खास पोखर तथा बिहार सरकार की नदी श्रेणी में दर्ज सरकारी जमीन का नियमों की अनदेखी करते हुए निजी व्यक्तियों के नाम जमाबंदी कायम कर दी गई।
मामले की जांच के बाद भूमि सुधार उप समाहर्त्ता (डीसीएलआर) ने विस्तृत प्रतिवेदन जिलाधिकारी सहरसा को भेजते हुए तत्कालीन अंचलाधिकारी शुभम वर्मा एवं संबंधित राजस्व कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की है।
मामले की शुरुआत डीएम के जनता दरबार में सरोजा गांव वार्ड संख्या-11 निवासी अजय यादव द्वारा की गई शिकायत से हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सरकारी पोखर एवं जलनिकाय की जमीन को निजी लोगों के नाम दर्ज कर दिया गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर डीसीएलआर ने मामले की जांच कराई, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
पोखर की जमीन पर कर दी गई जमाबंदी
जांच प्रतिवेदन के अनुसार मौजा सरोजा के खाता संख्या-272, खेसरा संख्या-1759 एवं 1760 राजस्व अभिलेखों में गैर मजरुआ खास पोखर एवं भिंड के रूप में दर्ज हैं। अंचल अमीन ने 26 नवंबर 2024 को अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख किया था कि संबंधित भूमि पोखर की है और इस पर किसी प्रकार की निजी जमाबंदी नहीं की जा सकती।
इसके बावजूद तत्कालीन अंचलाधिकारी द्वारा समय रहते आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी सामने आया कि प्रशासनिक उदासीनता का लाभ उठाकर दबंगों ने जेसीबी मशीन से पोखर में मिट्टी भर दी और वहां अवैध निर्माण करा लिया।
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बाद में इसी भूमि पर सुरेंद्र नारायण सिंह, सीताराम यादव, अरुणा देवी, विकास राय तथा ललिता देवी समेत अन्य लोगों के नाम फर्जी तरीके से जमाबंदी कायम कर दी गई।
बेलवारा में नदी की जमीन भी निजी नाम कर दी गई
जांच के दौरान बेलवारा गांव का एक और मामला भी सामने आया। ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि बिहार सरकार की जमीन का गलत तरीके से दाखिल-खारिज कर दिया गया है।
डीसीएलआर द्वारा अभिलेखों की जांच में पाया गया कि मौजा बेलवारा के खाता संख्या-1922, खेसरा संख्या-5750 की जमीन राजस्व रिकार्ड में "बिहार सरकार" की नदी श्रेणी में दर्ज है। इसके बावजूद वाद संख्या-1797/2024-25 के तहत तत्कालीन अंचलाधिकारी द्वारा निजी रैयत के पक्ष में दाखिल-खारिज की स्वीकृति प्रदान कर दी गई।
जलनिकाय का बदला स्वरूप, बढ़ा अतिक्रमण
जांच प्रतिवेदन में कहा गया है कि तत्कालीन अंचलाधिकारी शुभम वर्मा तथा संबंधित राजस्व कर्मचारी की लापरवाही एवं नियमों की अनदेखी के कारण सरकारी जलनिकायों का स्वरूप प्रभावित हुआ तथा अतिक्रमण को बढ़ावा मिला। इससे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की स्थिति उत्पन्न हो गई।
डीएम को भेजी गई रिपोर्ट, कार्रवाई की अनुशंसा
भूमि सुधार उप समाहर्त्ता ने अपनी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी सहरसा को भेजते हुए तत्कालीन अंचलाधिकारी शुभम वर्मा एवं संबंधित राजस्व कर्मचारी से स्पष्टीकरण लेने तथा उनके विरुद्ध विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की अनुशंसा की है। अब इस मामले में जिलाधिकारी स्तर पर आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी हुई है।