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    सहरसा की ब्यूटी क्वीन सोना झा का रैंप पर जलवा, मिस छत्तीसगढ़ का खिताब जीतकर बिहार का नाम भारत भर में किया रोशन

    Updated: Fri, 24 Jul 2026 09:16 AM (GMT+05:30)

    सहरसा जिले के महिषी गांव की सोना झा ने मिस छत्तीसगढ़ का प्रतिष्ठित खिताब जीतकर बिहार का नाम रोशन किया है। पिता के निधन के बावजूद मां के अटूट विश्वास औ ...और पढ़ें

    सहरसा की ग्लैमरस बेटी का बड़ा धमाल, 18 की उम्र में सोना झा के सिर सजा मिस छत्तीसगढ़ का ताज, हर तरफ चर्चा

    सहरसा की ग्लैमरस बेटी का बड़ा धमाल, 18 की उम्र में सोना झा के सिर सजा मिस छत्तीसगढ़ का ताज, हर तरफ चर्चा

    संवाद सूत्र, महिषी (सहरसा)। बिहार की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी मेधा, प्रतिभा और लगन का परचम लहरा रही हैं। शिक्षा और खेल के बाद अब फैशन व ग्लैमर की दुनिया में भी सूबे की बेटियों ने अपनी अमिट छाप छोड़नी शुरू कर दी है।

    इसी कड़ी में सहरसा जिले के महिषी गांव की लगभग 18 वर्षीय बेटी सोना झा ने मिस छत्तीसगढ़ का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम कर पूरे देश में गांव और प्रदेश का मान बढ़ाया है। सोना झा को मिस छत्तीसगढ़ प्रतियोगिता की विजेता घोषित किया गया है।

    गांव में खुशी की लहर

    जैसे ही सोना झा के मिस छत्तीसगढ़ बनने की सूचना महिषी पहुंची, पूरे गांव में जश्न का माहौल कायम हो गया। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाइयां बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया। महिषी की ऐतिहासिक और पौराणिक पहचान का जिक्र करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि यह धरती सदियों से विद्वानों और ज्ञान की उर्वरक भूमि रही है।

    सोना झा ने अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से यह साबित कर दिया है कि यदि मन में पक्का इरादा और कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति हो, तो ग्रामीण परिवेश से निकलकर भी बड़े से बड़े सपनों को साकार किया जा सकता है।

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    पिता का साया उठने का दर्द

    सोना झा के जीवन का यह सफर आसान नहीं रहा। बेहद कम उम्र में ही उनके पिता स्वर्गीय संजीत उर्फ मुन्ना झा का साया उनके सिर से उठ गया था। पिता के असमय निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था, लेकिन सोना की मां संजू झा ने हिम्मत नहीं हारी।

    विपरीत परिस्थितियों में भी मां और परिवार के अन्य सदस्यों ने बच्चों को संभाला और उनके सपनों को टूटने नहीं दिया। परिवार के निरंतर सहयोग और प्रेरणा के बल पर ही सोना आज इस मुकाम तक पहुंच सकी हैं।

    मां के संघर्षों को दिया श्रेय

    अपनी इस शानदार सफलता पर सोना झा ने बेहद भावुक होकर इसका श्रेय अपनी मां संजू झा और परिवार के सदस्यों को दिया। उन्होंने कहा कि एक बिना पिता की बेटी के लिए इतने बड़े मंच तक पहुंचना और जीत हासिल करना मां के अटूट विश्वास के बिना संभव नहीं था।

    मां ने हर मोड़ पर उनका हौसला बढ़ाया और एक ढाल बनकर खड़ी रहीं। तीन बहनों और एक भाई में दूसरे स्थान पर मौजूद सोना ने अपनी इस जीत को अपनी मां के संघर्षों को समर्पित किया है।

    करोड़ीमल में पढ़ाई पूरी की

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोना झा का पूरा परिवार पिछले कई वर्षों से छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के करोड़ीमल नगर में निवास कर रहा है। सोना ने इसी वर्ष स्नातक (BA) की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी की है।

    पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने अपने मॉडलिंग के शौक को भी बरकरार रखा और अपनी कड़ी मेहनत के बदौलत मिस छत्तीसगढ़ के मंच पर अपनी छाप छोड़ी। उनकी इस अभूतपूर्व सफलता पर क्षेत्र के कई गणमान्य लोगों और ग्रामीणों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

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