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    सहरसा के उग्रतारा मंदिर में परंपराओं से खिलवाड़, सचिव की मनमानी पर ग्रामीणों में रोष, DM ने अफसर से कहा- जांच कीजिए

    Updated: Mon, 06 Jul 2026 09:38 AM (IST)

    सहरसा के महिषी स्थित उग्रतारा मंदिर में सचिव की मनमानी और परंपराओं से खिलवाड़ को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को ...और पढ़ें

    सहरसा के उग्रतारा मंदिर में न्यास सचिव की मनमानी पर भड़के ग्रामीण, डीएम के निर्देश पर जांच करने पहुंचे अधिकारी

    सहरसा के उग्रतारा मंदिर में न्यास सचिव की मनमानी पर भड़के ग्रामीण, डीएम के निर्देश पर जांच करने पहुंचे अधिकारी

    HighLights

    1. उग्रतारा मंदिर में सचिव की मनमानी से ग्रामीण आक्रोशित।

    2. गर्भगृह में स्टील का जंगला लगाने पर भक्तों को आपत्ति।

    3. डीएम ने सचिव से 24 घंटे में स्पष्टीकरण मांगा।

    संवाद सूत्र, महिषी (सहरसा)। बिहार के सहरसा जिले के महिषी स्थित ऐतिहासिक उग्रतारा न्यास समिति के वर्तमान सचिव की मनमानी और कार्यशैली के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। पिछले सप्ताह माता की स्पर्श पूजा पर अचानक रोक लगाने के उद्देश्य से मंदिर के गर्भगृह में लोहे-स्टील का जंगला (ग्रिल) लगाए जाने को लेकर भक्तों में भारी नाराजगी है। इस मनमाने फैसले के खिलाफ ग्रामीणों के साथ-साथ आसपास के पूरे इलाके के श्रद्धालुओं में भी जिला प्रशासन और न्यास समिति के खिलाफ तीखा विरोध देखा जा रहा है।

    डीएम और विधायक से गुहार

    इस गंभीर विवाद को लेकर ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल अंशु झा और केशव चौधरी के नेतृत्व में सीधे जिलाधिकारी (डीएम) से मिला और सचिव की मनमानी रोकने के लिए एक लिखित आवेदन सौंपा। वहीं दूसरी तरफ स्थानीय युवाओं ने क्षेत्र के विधायक संजय सिंह से मंदिर पहुंचकर इस तानाशाही कार्यशैली के खिलाफ तुरंत कड़े कदम उठाने का विशेष अनुरोध किया। ग्रामीणों की इस त्वरित शिकायत और भारी गुस्से को देखते हुए शनिवार की शाम को प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई।

    Ugratara Temple Saharsa Secretary Actions Spark Villager Outrage (1)

    अधिकारियों ने सुनीं समस्याएं

    जिलाधिकारी के सख्त निर्देश पर जिला कला संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा झा और स्थानीय विधायक संजय सिंह संयुक्त रूप से उग्रतारा मंदिर परिसर पहुंचे। अधिकारियों ने वहाँ उपस्थित आक्रोशित ग्रामीणों और मंदिर के पुजारियों के साथ एक लंबी बैठक की और मंदिर प्रबंधन से जुड़ी सभी गंभीर समस्याओं को विस्तार से सुना। इस अहम बैठक के दौरान ग्रामीणों ने धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों का हवाला देते हुए न्यास समिति के सचिव पर कई गंभीर और हैरान करने वाले आरोप लगाए।

    स्टील के जंगले पर आपत्ति

    ग्रामीणों ने बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि माता की स्पर्श पूजा पर सुरक्षा कारणों से प्रतिबंध लगाना पूरी तरह जायज है, परंतु इसके लिए स्टील धातु से निर्मित पांच फीट का ऊंचा जंगला किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार लोहा और स्टील अशुद्ध माना जाता है, इसलिए इसकी जगह पीतल का उपयोग होना चाहिए। जंगले की ऊंचाई भी इतनी ही रखी जाए जिससे भक्तों को माता की प्रतिमा का स्पष्ट और भव्य दर्शन हो सके और श्रृंगार के समय इसे खोला जाए।

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    परंपराओं से खिलवाड़ का आरोप

    इसके अलावा मंदिर में माता के विश्राम के लिए सदियों पुराने लकड़ी के पलंग को हटाकर स्टील का पलंग लगाए जाने पर भी ग्रामीणों ने गहरा ऐतराज जताया है। भक्तों ने मंदिर से हटाए गए पुराने लकड़ी के पलंग को पुजारी या सचिव के घर रखे जाने पर भी कई कड़े सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सैकड़ों वर्षों से चली आ रही पौराणिक परंपरा के अनुसार रात्रि में माता की महाआरती और भोग के उपरांत मुख्य कपाट बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन इस परंपरा को भी तोड़ा गया।

    कोषाध्यक्ष से भी छिपाई जानकारी

    सचिव ने अपनी मर्जी से जंगला लगाने का काम रात के समय रखा, जिसके कारण उस रात माता के दरबार का मुख्य कपाट पूरी रात खुला रह गया, जो कि बेहद अशुभ है। इस बैठक में उग्रतारा न्यास समिति के कोषाध्यक्ष माणिक चन्द्र झा एवं सह सचिव श्रीकृष्ण झा ने भी सचिव पर मनमानी के आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि सचिव द्वारा किसी भी कार्य से पूर्व कोर कमेटी की बैठक में कोई प्रस्ताव पारित नहीं कराया जाता और न ही आय-व्यय का कोई लेखा-जोखा साझा किया जाता है।

    पीतल का जंगला लगाने का भरोसा

    इस पूरे विवाद को सुनने के बाद विधायक संजय सिंह ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि माता के विश्राम हेतु वे अपने स्तर से सागवान की लकड़ी का एक भव्य नया पलंग जल्द ही मंदिर को उपलब्ध करवाएंगे। इसके साथ ही वर्तमान विवादित स्टील ग्रिल को हटाकर उसकी जगह मात्र दो से ढाई फीट की ऊंचाई का पीतल का सुंदर जंगला लगवाया जाएगा ताकि किसी भी श्रद्धालु की धार्मिक आस्था को ठेस न पहुंचे। उन्होंने इस ऐतिहासिक स्थल को विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल बनाने का भी वादा किया।

    सचिव से मांगा स्पष्टीकरण

    बैठक के अंत में जिला कला संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा झा ने कहा कि इस बैठक में सामने आए सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं और ग्रामीणों की सलाह को जिलाधिकारी के समक्ष रिपोर्ट के रूप में पेश किया जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि इस निर्माण कार्य से पूर्व सचिव ने उग्रतारा न्यास समिति के अध्यक्ष (जो कि स्वयं डीएम हैं) को भी कोई पूर्व सूचना नहीं दी थी। जिलाधिकारी ने इस घोर लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए न्यास सचिव से चौबीस घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।