समस्तीपुर हॉस्टल कांड: ख़राब खाना और बारिश में नहाने पर पिटाई से भड़के 9 छात्र खिड़की से कूदकर भागे
Samastipur School Hostel: समस्तीपुर के विभूतिपुर में एक हॉस्टल से नौ छात्र खराब खाने और पिटाई से तंग आकर रात में खिड़की से कूदकर भाग निकले। पुलिस ने त ...और पढ़ें

वार्डन और शिक्षकों ने उन्हें पहले तो बुरी तरह डांटा और फिर बेरहमी से पीट दिया। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
खराब खाने और पिटाई से तंग नौ छात्र हॉस्टल से भागे।
रात में खिड़की से कूदकर 25 किमी पैदल चलकर स्टेशन पहुंचे।
पुलिस ने तत्परता से सभी नौ छात्रों को सकुशल बरामद किया।
संवाद सहयोगी, विभूतिपुर (समस्तीपुर)। Students Escape Vibhutipur: जिले के विभूतिपुर थाना क्षेत्र स्थित एक नामचीन पब्लिक स्कूल के छात्रावास (हॉस्टल) से बुधवार की रात सनसनीखेज वाकया सामने आया।
हॉस्टल की बदइंतजामी, खराब खाने और छोटी सी बात पर बेरहमी से हुई पिटाई से तंग आकर नौ छात्र रात के अंधेरे में दूसरी मंजिल की खिड़की से कूदकर भाग निकले। सुबह जब कमरों में बच्चे नहीं मिले, तो हॉस्टल प्रबंधन के हाथ-पैर फूल गए।
परिजनों को जैसे ही इसकी भनक लगी, वे स्कूल परिसर में जुट गए और जमकर हंगामा व नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी और सूझबूझ से सभी नौ बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया गया है।
25 किलोमीटर पैदल नापा सफर
हॉस्टल से भागे बच्चों की आपबीती किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। बच्चों ने बताया कि बुधवार को वे हॉस्टल परिसर में हो रही बारिश में नहा रहे थे। इस बात पर वार्डन और शिक्षकों ने उन्हें पहले तो बुरी तरह डांटा और फिर बेरहमी से पीट दिया।
इस पिटाई में दो छात्र जख्मी भी हो गए। जब बच्चों ने हॉस्टल के घटिया खाने और इस बर्ताव का विरोध किया, तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
पिटाई और अपमान से आहत होकर बच्चों ने एक बड़ा कदम उठाने की ठानी। रात करीब 11 बजे, जब पूरा हॉस्टल गहरी नींद में सो रहा था, तब दो अलग-अलग ग्रुप (पहले छह और फिर उनके पीछे तीन) बनाकर कुल नौ छात्र दूसरी मंजिल की खिड़की के रास्ते बाहर निकल गए।
ये बच्चे सीसीटीवी फुटेज में भी जाते हुए कैद हुए हैं। हॉस्टल से निकलने के बाद पकड़े जाने के डर से ये मासूम रात के अंधेरे में छिपते-छिपाते करीब 25 किलोमीटर पैदल चलकर सिंघियाघाट रेलवे स्टेशन पहुंचे।
मधेपुरा भागने का था प्लान
रोसड़ा सर्किल इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने बताया कि बच्चों ने भागने की पूरी योजना पहले से बना ली थी। सफर के खर्च के लिए कुछ बच्चों ने अपने जूते में 600 रुपये छिपाकर रखे थे।
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स्टेशन पहुंचकर बच्चों ने आपस में पैसे बांटे, ताकि कोई भूखा न रहे। सिंघियाघाट से ट्रेन पकड़कर वे पहले समस्तीपुर पहुंचे और वहां से मधेपुरा जाने के इरादे से सहरसा जाने वाली ट्रेन में सवार हो गए।
इसी बीच, सुबह बच्चों के लापता होने की खबर पर अपर थानाध्यक्ष शिव नारायण कुमार के नेतृत्व में विभूतिपुर थाना और डायल 112 की पुलिस टीम एक्टिव हो चुकी थी।
समस्तीपुर स्टेशन मास्टर को तुरंत अलर्ट भेजा गया। पुलिस और स्वजनों की संयुक्त टीम ने पीछा करते हुए सात छात्रों को तो सिंघियाघाट और समस्तीपुर के बीच ट्रेन से सुरक्षित ढूंढ निकाला, जबकि दो छात्र पुलिस को देखकर चलती ट्रेन से कूदकर भाग निकले, जिन्हें बाद में कापन इलाके से सकुशल बरामद किया गया।
'अभिभावकों के प्रति हमारी जवाबदेही'
इस पूरे मामले पर रोसड़ा सर्किल इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने बताया कि सभी बच्चों को बरामद कर उनके डरे-सहमे अभिभावकों को सौंप दिया गया है। एक जख्मी छात्र ने पुलिस को अपनी पीठ पर पिटाई के निशान भी दिखाए, जिसके बाद पुलिस मामले की जांच कर रही है।
वहीं, स्कूल के निदेशक ने अपनी सफाई में कहा कि विद्यालय स्तर से बेहतर व्यवस्था देने का प्रयास किया जाता है। बारिश में नहाने के कारण हॉस्टल के शिक्षक ने पांच बच्चों की पिटाई की थी, जो कि गलत है। उन्होंने स्वीकार किया कि रात में छात्र दूसरी मंजिल की खिड़की से भागे थे और अभिभावकों के हर सवाल के प्रति स्कूल प्रबंधन की पूरी जवाबदेही बनती है।