साइबर ठगी पीड़ितों को MRM पोर्टल से बड़ी राहत, बिना कोर्ट के चक्कर के खाते में वापस आएगी रकम
Cyber Fraud Money Refund: साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए समस्तीपुर पुलिस ने एमआरएम पोर्टल के जरिए रकम वापसी ...और पढ़ें

समस्तीपुर में अब तक 100 से अधिक पीड़ितों को नई डिजिटल व्यवस्था का लाभ मिल चुका है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
MRM पोर्टल से साइबर ठगी की रकम वापसी आसान।
50 हजार तक बिना कोर्ट आदेश, पुलिस रिपोर्ट पर वापसी।
समस्तीपुर में 100 से अधिक पीड़ितों को मिला लाभ।
अभिनव कुमार, समस्तीपुर। Money Restoration Module Portal: साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए राहत भरी खबर है क्योंकि साइबर थाना पुलिस ने एमआरएम यानी मनी रिस्टोरेशन मोड्यूल पोर्टल के जरिए रकम वापसी की प्रक्रिया को बेहद आसान कर दिया है।
इस व्यवस्था के माध्यम से छोटे मामलों में बैंक खातों में होल्ड कराई गई राशि अब पीड़ितों को काफी तेजी से वापस मिल रही है।
समस्तीपुर जिले में अब तक 100 से अधिक साइबर पीड़ितों को इस नई डिजिटल व्यवस्था का सीधा लाभ मिल चुका है।
बिना कोर्ट आदेश राहत
इस पोर्टल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसी एक खाते में 50 हजार रुपये तक की होल्ड राशि होने पर पीड़ित को एफआईआर या न्यायालय के आदेश की जरूरत नहीं पड़ती है।
अब निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुलिस रिपोर्ट और इंडेम्निटी बॉन्ड के आधार पर यह राशि सीधे पीड़ित के बैंक खाते में ट्रांसफर कराई जा सकती है।
इससे पहले रकम होल्ड होने के बावजूद पीड़ितों को कोर्ट की लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जिससे उनका काफी समय बर्बाद होता था।
तुरंत डायल करें 1930
साइबर ठगी का शिकार होते ही पीड़ित को बिना कोई देरी किए तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
समय रहते शिकायत दर्ज होने पर पुलिस और बैंकिंग संस्थान समन्वय बनाकर ठगी की राशि को अन्य खातों में जाने से पहले ही होल्ड करा देते हैं।
शिकायत के दौरान ट्रांजेक्शन विवरण, यूपीआई आईडी, मोबाइल नंबर, चैट और स्क्रीनशॉट जैसे साक्ष्य उपलब्ध कराने से रकम की रिकवरी आसान हो जाती है।
बड़ी राशि पर एफआईआर
यदि किसी एक बैंक खाते में होल्ड कराई गई राशि 50 हजार रुपये से अधिक है, तो उस मामले में एफआईआर दर्ज होने के साथ-साथ अन्य कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होगा।
यह समझना जरूरी है कि हर मामले में रकम स्वतः वापस नहीं होती, बल्कि मामले की प्रकृति और जांच के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाती है।
इस पूरे पोर्टल का मूल उद्देश्य पुलिस, बैंक और राष्ट्रीय पोर्टल के बीच डिजिटल समन्वय बनाकर पीड़ितों को समयबद्ध आर्थिक राहत पहुंचाना है।
डीएसपी ने दी जानकारी
समस्तीपुर के डीएसपी सह साइबर थानाध्यक्ष दुर्गेश दीपक ने बताया कि एमआरएम सेवा शुरू होने से छोटे मामलों में राशि वापसी की प्रक्रिया बेहद सरल हो गई है।
इसमें पुलिस अपने स्तर से जांच पूरी करने के बाद निर्धारित फॉर्म भरवाकर राशि पीड़ित के खाते में वापस करवा देती है। यह कानूनी प्रक्रिया इसलिए पूरी कराई जाती है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अड़चन आने पर जवाबदेही तय की जा सके।
अकाउंट Hold या Freeze होने पर क्या करें? इस वीडियो में जानिए MRM कैसे काम करता है और ऐसी स्थिति में आपको क्या कदम उठाने चाहिए।
— Bihar Police (@bihar_police) August 19, 2026
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