पटना पूर्णिया एक्सप्रेसवे अलाइनमेंट विवाद पर समस्तीपुर प्रशासन सक्रिय, ग्रामीणों की मांग पर डीएम ने भेजा पत्र
Sarairanjan Protest Expressway: समस्तीपुर में पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित अलाइनमेंट को लेकर सरायरंजन में जनविरोध के बाद जिला प्रशासन ने ...और पढ़ें

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे रूट सुधार जन संघर्ष समिति के सदस्य रंजीत निर्गुणी द्वारा जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया था। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। Patna Purnia Expressway Alignment Dispute Samastipur: पटना-पूर्णिया 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (नेशनल एक्सप्रेसवे-9) के प्रस्तावित अलाइनमेंट को लेकर सरायरंजन में चल रहे भारी जनविरोध को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है।
प्रस्तावित मार्ग से बड़ी संख्या में रिहायशी मकानों, दुकानों और केएसआर कॉलेज के भवन व खेल मैदान के प्रभावित होने की आशंका को लेकर ग्रामीण लगातार आंदोलन कर रहे हैं।
ग्रामीणों की ओर से पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे रूट सुधार जन संघर्ष समिति के सदस्य रंजीत निर्गुणी द्वारा जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया था।
डीएम ने भेजा पत्र
जन संघर्ष समिति के ज्ञापन पर त्वरित संज्ञान लेते हुए जिला भू-अर्जन शाखा ने पथ निर्माण विभाग के सचिव और एनएचएआई के क्षेत्रीय पदाधिकारी को दो पत्र भेजे हैं।
जिला प्रशासन ने ग्रामीणों द्वारा चिह्नित बिंदुओं और प्रस्तावित वैकल्पिक मार्गरेखन पर उच्च स्तर से विचार करने का औपचारिक अनुरोध किया है।
पत्र में प्रशासन ने स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि इस विरोध के कारण सरायरंजन अंचल क्षेत्र में एक्सप्रेसवे निर्माण कार्य बाधित होने की पूरी संभावना है।
सात जिलों से गुजरेगा
लगभग 18,000 से 21,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला यह महत्वाकांक्षी 6-लेन एक्सप्रेसवे राज्य के करीब सात जिलों से होकर गुजरेगा।
यह वैशाली और सारण के सीमावर्ती क्षेत्र से शुरू होकर समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा और मधेपुरा होते हुए पूर्णिया के डगरुआ में एनएच-27 से जुड़ेगा।
राजधानी पटना से इसका सीधा संपर्क कच्ची दरगाह-बिदुपुर 6-लेन गंगा पुल और पटना रिंग रोड के माध्यम से सुनिश्चित किया जा रहा है।
सफर होगा बेहद सुगम
वर्ष 2028 तक पूरा होने वाले इस हाई-स्पीड कॉरिडोर के बनने से पटना से पूर्णिया की यात्रा का समय आठ घंटे से घटकर मात्र साढ़े तीन घंटे रह जाएगा।
इस परियोजना के तहत कुशेश्वरस्थान और सिमरी बख्तियारपुर के बीच कोसी नदी पर लगभग सात किलोमीटर लंबा विशाल महासेतु भी बनाया जाना प्रस्तावित है।
इस कॉरिडोर से मिथिला, कोसी और सीमांचल के मखाना, मक्का व जूट उत्पादक किसानों को देश की बड़ी मंडियों तक तेज पहुंच मिलेगी।
कार्रवाई पर टिकी नजर
फिलहाल परियोजना के तहत विभिन्न जिलों में भूमि चिह्नित करने और प्रारंभिक अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। समस्तीपुर जिला प्रशासन द्वारा उच्चाधिकारियों को पत्र प्रेषित किए जाने के बाद अब सरायरंजन के प्रभावित लोगों की नजर एनएचएआई के अगले कदम पर टिकी है।
ग्रामीण उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जनहित और शैक्षणिक संस्थान की सुरक्षा को देखते हुए अलाइनमेंट में जरूरी तकनीकी सुधार किया जाएगा।
