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समस्तीपुर के श्रीराम जानकी मेडिकल कॉलेज में MBBS में 46 का नामांकन, 5 से शुरू होंगी कक्षाएं

Published: Fri, 23 Oct 2026 10:01 PM (GMT+05:30)

Shriram Janki Medical College: समस्तीपुर के श्रीराम जानकी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के प्रथम सत्र में 46 छात्रों का नामांकन ...और पढ़ें

राज्य कोटे की सीटों पर 25 व 26 अक्टूबर और केंद्रीय कोटे पर 28 व 29 अक्टूबर को नामांकन होगा।

राज्य कोटे की सीटों पर 25 व 26 अक्टूबर और केंद्रीय कोटे पर 28 व 29 अक्टूबर को नामांकन होगा।

HighLights

  1. 46 छात्रों का एमबीबीएस में नामांकन, 4 सीटें शेष।

  2. 5 नवंबर से प्रथम वर्ष की नियमित कक्षाएं होंगी शुरू।

  3. अस्पताल में 58 मुफ्त जांच और ईसीजी सेवा उपलब्ध।

संवाद सहयोगी, सरायरंजन (समस्तीपुर)। Samastipur Medical College: समस्तीपुर जिले के श्रीराम जानकी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के प्रथम सत्र के लिए अब तक 46 छात्र-छात्राओं का नामांकन पूरा हो चुका है।

वर्तमान में कॉलेज में केवल चार सीटें रिक्त हैं, जिन पर प्रक्रिया जारी है। इन शेष चार सीटों में से दो राज्य कोटे और दो केंद्रीय कोटे की हैं।

राज्य कोटे की सीटों पर 25 व 26 अक्टूबर और केंद्रीय कोटे पर 28 व 29 अक्टूबर को नामांकन होगा।

डिप्टी सीएम करेंगे उद्घाटन

कॉलेज प्रशासन ने पांच नवंबर से एमबीबीएस प्रथम वर्ष की नियमित कक्षाएं शुरू करने की पूरी तैयारी कर ली है। कक्षाओं के संचालन का विधिवत उद्घाटन राज्य के उपमुख्यमंत्री सह स्वास्थ्य मंत्री करेंगे।

प्राचार्य डॉ. एसके कर्ण के अनुसार प्रथम वर्ष में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री की पढ़ाई होगी। हालांकि, दो विभागों में प्रोफेसरों की नियुक्ति प्रक्रिया अभी लंबित है, जिसके लिए विभाग को पत्र भेजा गया है।

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अस्पताल में इलाज

कॉलेज से संबद्ध अस्पताल में ओपीडी और आईपीडी सेवाओं के माध्यम से मरीजों का लगातार इलाज किया जा रहा है। अस्पताल अधीक्षिका डॉ. पूनम कुमारी ने बताया कि शुक्रवार को कुल 427 मरीजों का इलाज किया गया।

मरीजों के लिए ओपीडी में 199 और आईपीडी में 177 प्रकार की दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा अस्पताल में मरीजों के लिए 58 तरह की मुफ्त जांच की व्यवस्था है।

अल्ट्रासाउंड जांच बंद

अस्पताल में मशीन उपलब्ध होने के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टर के अभाव में अल्ट्रासाउंड जांच सेवा फिलहाल ठप पड़ी है।

मरीजों को अभी सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी उन्नत जांच सुविधाओं के लिए भी इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि बीते दस दिनों से अस्पताल में ईसीजी जांच सेवा शुरू कर दी गई है।

समस्तीपुर जिले के सरायरंजन में स्थित श्रीराम जानकी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SRJMCH) बिहार के सरकारी स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा क्षेत्र में एक नया और आधुनिक मील का पत्थर साबित हो रहा है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से मान्यता मिलने के बाद यह बिहार का 21वां सरकारी मेडिकल कॉलेज बन गया है। 

यह संस्थान उत्तर बिहार के समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय और दरभंगा के सीमावर्ती इलाकों के मरीजों के लिए सुपर-स्पेशलिटी हब के रूप में विकसित हो रहा है। इससे स्थानीय मरीजों को इलाज के लिए पटना या दिल्ली जाने की मजबूरी से बड़ी राहत मिली है। 

एमबीबीएस में नामांकन

इस कॉलेज में एमबीबीएस के प्रथम सत्र के लिए अब तक 46 छात्र-छात्राओं का नामांकन पूरा हो चुका है। वर्तमान में केवल चार सीटें रिक्त हैं, जिन पर प्रक्रिया जारी है। इन चार सीटों में दो राज्य और दो केंद्रीय कोटे की हैं, जिन पर 25 से 29 अक्टूबर के बीच नामांकन पूरा किया जाएगा। कॉलेज प्रशासन ने आगामी 5 नवंबर से प्रथम वर्ष की नियमित कक्षाएं शुरू करने की पूरी तैयारी कर ली है। 

आधुनिक सुविधाएं

लगभग 591 करोड़ रुपये की लागत से इसे ग्रीन बिल्डिंग मॉडल पर तैयार किया गया है। अस्पताल में ओपीडी और आईपीडी सेवाओं के तहत शुक्रवार को 427 मरीजों का इलाज किया गया।

यहाँ 58 प्रकार की पैथोलॉजिकल जांच और ईसीजी सेवा के अलावा जल्द ही अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलने लगेंगी। इसके अलावा कैंपस में 1000 बेड की क्षमता का विस्तार, हॉस्टल, धर्मशाला और भूकंपरोधी परिसर जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। 

कॉलेज से उत्तर बिहार को बड़े लाभ 

समस्तीपुर के नरघोघी (सरायरंजन) में निर्मित श्रीराम जानकी मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल (SRJMCH) के शुरू होने से न केवल समस्तीपुर बल्कि पूरे उत्तर बिहार के लोगों को स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में जबरदस्त सौगात मिली है। इससे क्षेत्र की तस्वीर तेजी से बदल रही है। 

आम जनता को मिल रहीं ये सुविधाएं 

  • अत्याधुनिक मेडिकल सुविधाएं: करीब 591 करोड़ रुपये की लागत से बने इस अस्पताल में 500 बेड (जिसे 1000 बेड तक विस्तारित करने की योजना है) की क्षमता है। यहां मॉडर्न ओपीडी, आईसीयू, एडवांस लेबर रूम, मॉडल ऑपरेशन थिएटर के साथ अत्याधुनिक रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी लैब की सुविधा मिल रही है।

  • बड़े शहरों पर घटी निर्भरता: गंभीर बीमारियों या आपात स्थिति में पहले लोगों को पटना (PMCH/IGIMS) या दरभंगा (DMCH) दौड़ना पड़ता था, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर ही उच्च स्तरीय इलाज मिलने लगा है।

  • सस्ते और मुफ्त इलाज का लाभ: सरकारी अस्पताल होने के कारण ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को बहुत कम खर्च में या मुफ्त में विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में इलाज मिल रहा है।

  • परिजन के लिए धर्मशाला: मरीजों के तीमारदारों को ठहरने में कोई असुविधा न हो, इसके लिए अस्पताल परिसर में ही 100 बेड की विशेष धर्मशाला का निर्माण किया गया है। 

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