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    बिहार के वैभव सूर्यवंशी ने मैदान को क्लासरूम बनाया, बल्ला कलम बन गया

    By Digital Desk Edited By: Dharmendra Singh
    Updated: Fri, 20 Feb 2026 06:34 PM (IST)

    Indian Under-19 cricket team : समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी ने परीक्षा को छोड़कर क्रिकेट को अपनी प्राथमिकता बनाया है। भारतीय अंडर-19 टीम के इस खिलाड़ी ...और पढ़ें

    यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।

    यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।

    HighLights

    1. वैभव सूर्यवंशी ने पढ़ाई छोड़ क्रिकेट को बनाया करियर।

    2. मैदान को क्लासरूम, बल्ले को अपनी कलम बताया।

    3. क्रिकेट के प्रति जुनून, देश के लिए खेलने का सपना।

    डिजिटल डेस्क, समस्तीपुर । Vaibhav Suryavanshi: बिहार के समस्तीपुर जिले से निकलकर भारतीय अंडर-19 टीम में अपनी जगह बनाने वाले वैभव सूर्यवंशी ने कड़ा लेकिन बड़ा फैसला लिया है।

    क्रिकेट के प्रति उनकी दीवानगी और देश के लिए खेलने के उनके जुनून ने यह साबित कर दिया है कि उनके लिए अब किताबों के पन्ने नहीं किक्रेट की पिच ही असली भविष्य है।

    आमतौर पर एक छात्र के लिए परीक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है, लेकिन वैभव सूर्यवंशी के मामले में कहानी अलग है। समस्तीपुर के इस युवा खिलाड़ी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनके लिए 'मैदान' ही उनका क्लासरूम है और 'बल्ला' ही उनकी असली कलम।

    जहां बाकी छात्र परीक्षा केंद्रों पर अपनी किस्मत लिख रहे हैं, वहीं वैभव ने अपनी किस्मत क्रिकेट के स्कोरबोर्ड पर लिखने का रास्ता चुना है। यह फैसला सिर्फ एक परीक्षा छोड़ने का नहीं उस अटूट विश्वास का है कि वह अपने बल्ले के दम पर समस्तीपुर का नाम पूरी दुनिया में रौशन करेंगे।

    समस्तीपुर की माटी का गौरव

    ताजपुर प्रखंड के लोग वैभव के इस समर्पण को दे ख रहे हैं। लोगों का मानना है कि वैभव ने अपनी प्राथमिकताएं तय कर ली हैं। उनके लिए नेशनल ड्यूटी और प्रैक्टिस सेशन किसी भी किताबी इम्तिहान से बड़े हैं।

    वैभव की असली पहचान उनकी तकनीक और टाइमिंग है। जानकारों का कहना है कि जिस उम्र में बच्चे करियर चुनते हैं, वैभव ने उस उम्र में खुद को एक 'प्रोफेशनल' के तौर पर स्थापित कर लिया है।

    वहीं उनके शुरुआती को ब्रजेश झा का कहना है कि वैभव सूर्यवंशी मेहनत, जुनून और सही मार्गदर्शन में चलने वाले खिलाड़ी है। मैं तो वैभव की उम्र लगभग पांच साल थी तब से जानता हूं।

    मैदान की पाठशाला

    नेट प्रैक्टिस, कोच के निर्देश और अंतरराष्ट्रीय गेंदबाजों का सामना करना—यही अब वैभव की असली पढ़ाई है। उन्होंने साबित किया है कि अगर लक्ष्य बड़ा हो, तो पारंपरिक रास्तों को छोड़कर अपना रास्ता खुद बनाना पड़ता है।

    खबरें और भी

    समस्तीपुर के खेल गलियारों में चर्चा है कि वैभव का यह कदम आने वाले खिलाड़ियों को यह सिखाएगा कि खेल को सिर्फ शौक नहीं, एक 'तपस्या' की तरह कैसे जिया जाता है। उनके लिए अब हर मैच एक परीक्षा है और हर शतक एक डिग्री।