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    पटना-पूर्णिया सिक्स लेन के नए रूट से 300 घरों पर मंडराया खतरा, समस्तीपुर में किसानों का फूटा गुस्सा

    Updated: Mon, 06 Jul 2026 02:08 PM (IST)

    पटना-पूर्णिया सिक्स लेन सड़क परियोजना के बदले हुए रूट के खिलाफ सरायरंजन में विरोध तेज हो गया है। बिहार राज्य किसान सभा ने प्रभावित गांवों का दौरा किया ...और पढ़ें

    बदले रूट का विरोध तेज, 300 से अधिक घरों पर मंडरा रहा संकट

    बदले रूट का विरोध तेज, 300 से अधिक घरों पर मंडरा रहा संकट

    HighLights

    1. पटना-पूर्णिया सिक्स लेन के बदले रूट का विरोध तेज।

    2. किसान सभा ने प्रभावित गांवों का दौरा कर सुनी समस्याएँ।

    3. 300 से अधिक घर ध्वस्त होने, शिक्षण संस्थान भी प्रभावित।

    संवाद सहयोगी, सरायरंजन। पटना-पूर्णिया सिक्स लेन सड़क परियोजना के प्रस्तावित बदले हुए रूट के खिलाफ क्षेत्र में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। रविवार को बिहार राज्य किसान सभा की छह सदस्यीय टीम ने प्रखंड के भटगाामा, चिंतामनपुर, मौसिंगपुर और झखड़ा समेत कई प्रभावित गांवों का दौरा कर किसानों एवं ग्रामीणों से मुलाकात की तथा उनकी समस्याओं और आशंकाओं को गंभीरता से सुना।

    दौरा करने वाली टीम में किसान सभा के जिला अध्यक्ष मनोज प्रसाद सुनील, जिला सचिव सत्यनारायण सिंह, संयुक्त सचिव उपेंद्र राय तथा सुरेश महतो, रामकृपाल गिरी, सुखचैन साह और प्रमोद कुमार शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने सैकड़ों किसान परिवारों से संवाद कर परियोजना से होने वाले संभावित प्रभावों की जानकारी ली।

    ग्रामीणों ने बताया कि सिक्स लेन सड़क के लिए पहले से घोषित एलाइनमेंट को बदलकर अब सड़क को घनी आबादी वाले गांवों से निकालने की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि यदि प्रस्तावित नया रूट लागू किया गया तो 300 से अधिक मकान ध्वस्त हो जाएंगे, जिससे सैकड़ों परिवार बेघर होने की स्थिति में पहुंच जाएंगे।

    इतना ही नहीं, क्षेत्र का प्रमुख शिक्षण संस्थान केदार संत महाविद्यालय, सरायरंजन भी गंभीर रूप से प्रभावित होगा और उसका वर्तमान स्वरूप समाप्त होने का खतरा उत्पन्न हो जाएगा।

    ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विकास परियोजना के नाम पर उनकी जमीन और आवासीय परिसंपत्तियों का अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे लोगों में व्यापक असंतोष और चिंता व्याप्त है।

    किसान सभा के नेताओं ने कहा कि संगठन सड़क निर्माण और विकास कार्यों का विरोध नहीं करता, लेकिन किसी भी परियोजना के लिए पूरे गांवों के अस्तित्व को संकट में डालना उचित नहीं माना जा सकता।

    दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विपत महतो, रामनरेश झा, नारायण महतो, रामसागर सहनी, रामदयाल साह, हरेंद्र सहनी, कृष्ण कुमार झा, सूली महतो सहित सैकड़ों प्रभावित परिवारों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं।

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