मढ़ौरा में विधवा-विधुर का पुनर्विवाह, विवाद के बाद पुलिस ने कराया समझौता
मढ़ौरा के शिल्हौरी स्थित शिलानाथ मंदिर में एक विधवा और विधुर का विवाह चर्चा में है। दोनों ने जीवनसाथियों को खोने के बाद नया जीवन शुरू किया। विवाह के ब ...और पढ़ें

थाने पहुंचा अनोखे विवाह का विवाद
HighLights
शिल्हौरी मंदिर में विधवा-विधुर का पुनर्विवाह संपन्न हुआ।
विवाह के बाद विवाद, पुलिस ने हस्तक्षेप कर सुलझाया।
सामाजिक बदलाव की प्रेरक पहल बना यह विवाह।
पंकज कुमार पाण्डेय, मढ़ौरा (सारण)। मढ़ौरा प्रखंड के शिल्हौरी स्थित प्राचीन शिलानाथ मंदिर में शनिवार को संपन्न हुआ एक विवाह इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह विवाह इसलिए खास रहा क्योंकि इसमें वर और वधू दोनों ही अपने-अपने जीवनसाथियों को पहले ही खो चुके थे।
सामाजिक बंधनों और रूढ़ियों को पीछे छोड़ते हुए दोनों ने नए जीवन की शुरुआत करने का साहसिक निर्णय लिया, जिसे लोग अब एक प्रेरणादायक पहल के रूप में देख रहे हैं।
नया जीवन शुरू करने का फैसला
प्राप्त जानकारी के अनुसार जलालपुर कोठेयां निवासी एक विधवा महिला का विवाह तरैया थाना क्षेत्र के सरेयां गांव निवासी भुनेश्वर प्रसाद सिंह से शिल्हौरी शिलानाथ मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार संपन्न हुआ। दोनों के पूर्व जीवनसाथियों का वर्षों पहले निधन हो चुका था।
लंबे समय तक अकेले जीवन व्यतीत करने के बाद आपसी सहमति, समझदारी और सामाजिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए दोनों ने पुनर्विवाह का निर्णय लिया।
विवाह के बाद उठा विवाद
विवाह के कुछ ही समय बाद दूल्हे के पहले ससुराल पक्ष की ओर से इस रिश्ते को लेकर आपत्ति जताई गई। बात इतनी बढ़ी कि डायल 112 पर सूचना दे दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दूल्हा-दुल्हन को मढ़ौरा थाना ले आई।
थाना परिसर में इस अनोखे विवाह को देखने और सुनने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई। देर रात तक थाने में इस मामले को लेकर चर्चा और तथाकथित हाई प्रोफाइल ड्रामा चलता रहा।
पुलिस की मध्यस्थता से समाधान
पुलिस ने दोनों पक्षों को बैठाकर बातचीत कराई। समझाने-बुझाने के बाद आपसी सहमति बनी और गवाहों की मौजूदगी में बांड भरवाकर मामले का शांतिपूर्ण निपटारा कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से विवाह किया है, इसलिए कानूनन इसमें किसी प्रकार की आपत्ति नहीं बनती।
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बच्चों को मिला परिवार
नाम न छापने की शर्त पर एक ग्रामीण ने बताया कि दुल्हन को पूर्व विवाह से एक बच्चा है, जबकि दूल्हे को दो बच्चे हैं। इस पुनर्विवाह के बाद बच्चों को माता-पिता का साथ मिला और दोनों को एक जीवनसाथी।
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे समाज के लिए प्रेरक कदम बताया। क्षेत्र में लोग इस विवाह को विधवा–विधुर पुनर्विवाह की दिशा में एक सकारात्मक पहल और सामाजिक सोच में बदलाव लाने वाली साहसिक मिसाल के रूप में देख रहे हैं।