छपरा में जलजमाव का संकट बरकरार, 134 करोड़ की ड्रेनेज योजना की रफ्तार सुस्त; 30% भी नहीं हुआ काम
छपरा में 134 करोड़ की स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज योजना धीमी गति से चल रही है, जिससे शहर को मानसून में जलजमाव से राहत मिलने की उम्मीद कम है। ...और पढ़ें
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HighLights
छपरा में 134 करोड़ की ड्रेनेज योजना सुस्त।
परियोजना का 30% काम भी अभी तक नहीं हुआ।
मानसून में जलजमाव से शहरवासियों को राहत नहीं।
अमृतेश, छपरा। हर मानसून में जलजमाव की समस्या से जूझने वाले छपरा शहर को अब भी राहत का इंतजार है। शहर में वर्षा के पानी की निकासी के लिए 134 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही स्टार्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम योजना धीमी रफ्तार का शिकार हो गई है।
दो वर्ष में पूरी होने वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना अभी तक 50 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं कर सकी है। ऐसे में इस मानसून भी शहर के कई इलाकों में जलभराव की समस्या बनी रहने की आशंका है।
सितंबर 2023 में मिली थी मंजूरी
बिहार सरकार ने सितंबर 2023 में 134 करोड़ 97 लाख 89 हजार रुपये की इस योजना को मंजूरी दी थी। योजना के तहत छपरा नगर निगम क्षेत्र में करीब 30 किलोमीटर लंबे मुख्य नाले और भूमिगत ड्रेनेज नेटवर्क का निर्माण होना है। इसका उद्देश्य बरसात के पानी को तेजी से शहर से बाहर निकालना और जलजमाव की समस्या का स्थायी समाधान करना है।
2025 में शुरू हुआ निर्माण कार्य
परियोजना को मंजूरी मिलने के काफी समय बाद वर्ष 2025 में बुडको (बिहार अर्बन डेवलपमेंट कारपोरेशन) ने निर्माण कार्य शुरु किया। बुडको अधिकारियों के अनुसार, अतिक्रमण और राइट आफ वे (आरओडब्ल्यू) से जुड़ी समस्याओं के कारण काम शुरू होने में देरी हुई। अब आरओडब्ल्यू का निर्धारण कर लिया गया है और ब्रह्मपुर से श्याम चौक तक नाले का निर्माण भी पूरा किया जा चुका है। इसके बावजूद पूरे प्रोजेक्ट की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है।
30 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंची प्रगति
योजना को निर्धारित अवधि में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन मौजूदा स्थिति में निर्माण कार्य 30 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच पाया है। कई हिस्सों में खुदाई और पाइप बिछाने का काम धीमी गति से चल रहा है। इससे शहरवासियों की उम्मीदों पर भी असर पड़ रहा है। हर बरसात में प्रमुख सड़कें, बाजार और सरकारी कार्यालय जलमग्न होने की समस्या अब भी बनी हुई है।
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छह लाख आबादी को मिलेगा सीधा लाभ
परियोजना पूरी होने के बाद लगभग 17 वर्ग किलोमीटर में फैले छपरा नगर निगम क्षेत्र की छह लाख से अधिक आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। भूमिगत पाइपलाइन और मुख्य नालों के माध्यम से वर्षा का पानी तेजी से बाहर निकलेगा। इससे सड़कों पर जलभराव कम होगा, यातायात बाधित नहीं होगा और बिजली आपूर्ति पर भी कम असर पड़ेगा। साथ ही जलजनित बीमारियों के खतरे में भी कमी आने की उम्मीद है।
सांसद रुडी के प्रयास से मिली थी परियोजना
यह महत्वाकांक्षी योजना छपरा के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रुडी के प्रयासों से स्वीकृत हुई थी। शहर की वर्षों पुरानी जलनिकासी समस्या को देखते हुए इसे बड़ी राहत के रूप में देखा गया था। हालांकि निर्माण की धीमी गति ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अब शहरवासियों की नजर इस बात पर टिकी है कि निर्माण कार्य कब रफ्तार पकड़ेगा और उन्हें हर साल की जलजमाव की परेशानी से आखिरकार कब निजात मिलेगी।