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    गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से सारण में खीरे की फसल तबाह, किसानों पर गहराया आर्थिक संकट

    Updated: Tue, 07 Apr 2026 04:54 PM (IST)

    सारण के रेवाघाट स्थित दियारा क्षेत्र में गंडक नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि से खीरे की पूरी फसल बर्बाद हो गई है। एक सप्ताह में तीन बार पानी बढ़ ...और पढ़ें

    गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से सारण में खीरे की फसल तबाह

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    जय शंकर प्रसाद, मकेर (सारण)। रेवाघाट स्थित ठहरा ठाकुरबाड़ी गांव के दियारा क्षेत्र में गंडक नदी के जलस्तर में एक सप्ताह के भीतर तीन बार हुई अप्रत्याशित वृद्धि ने दर्जनों किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। अचानक फैले पानी के कारण खीरे की पूरी फसल बर्बाद हो गई, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

    स्थानीय किसान रमेश सहनी, पंकज कुमार, उमेश सहनी, नागेंद्र सहनी, रघुनाथ सहनी, रामरूप सहनी, नंदू सहनी, बृजू सहनी और विरेंद्र सहनी सहित कई किसानों ने बताया कि वे पिछले तीन महीनों से खीरे की खेती में दिन-रात जुटे थे।

    उन्होंने कहा कि फसल भी अच्छी हुई थी और कुछ बार तोड़ाई भी शुरू हो चुकी थी, लेकिन अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने से पूरी फसल नष्ट हो गई। पानी के फैलाव से पौधों की जड़ें सड़ गईं और देखते ही देखते खेत उजड़ गए।

    हालांकि, किसानों के लिए कुछ राहत की उम्मीद अब भी बाकी है। उसी क्षेत्र में लगाए गए तरबूज, ककड़ी और लौकी की फसल फिलहाल सुरक्षित है। किसानों का कहना है कि यदि मौसम और हालात अनुकूल रहे तो अगले 15 से 20 दिनों में तरबूज तैयार हो जाएगा, जिससे उन्हें कुछ आर्थिक सहारा मिल सकता है।

    किसानों ने बताया कि दियारा क्षेत्र में करीब 30 एकड़ में तरबूज, खीरा, ककड़ी और लौकी की खेती की गई है। दिसंबर महीने में तरबूज की बुवाई की गई थी, जबकि जनवरी में खीरा, ककड़ी और लौकी की खेती शुरू हुई। खीरे की फसल में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, क्योंकि जलभराव से पौधों की जड़ें सड़ गईं।

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    किसानों के अनुसार, दियारा क्षेत्र में खेती करना पहले से ही जोखिम भरा होता है। प्रति एकड़ लगभग 40 हजार रुपये की लागत आती है, जिसके लिए किसान अपनी जमा पूंजी के साथ-साथ महाजनों से ब्याज पर पैसा लेते हैं।

    अच्छी पैदावार होने पर ही वे कर्ज चुका पाते हैं और परिवार का भरण-पोषण करते हैं। लेकिन इस तरह की प्राकृतिक आपदा उनके पूरे आर्थिक संतुलन को बिगाड़ देती है।

    कुछ किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि गंडक बराज से पानी छोड़ने के समय में पारदर्शिता नहीं बरती जाती। उनका कहना है कि पहले बाहरी किसान यहां लीज पर खेती करते थे और समय पर पानी नहीं छोड़ा जाता था, जबकि अब स्थानीय किसानों की फसल तैयार होने के समय ही पानी छोड़ दिया जाता है। किसानों ने प्रशासन से जांच और राहत की मांग की है।