हरिहरनाथ कॉरिडोर परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, मंदिर क्षेत्र में भूमि सर्वेक्षण और सीमांकन शुरू; 6 अमीन तैनात
सोनपुर में बाबा हरिहरनाथ धाम को विश्वस्तरीय धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र बनाने वाली हरिहरनाथ कॉरिडोर परियोजना ने गति पकड़ ली है। ...और पढ़ें

हरिहरनाथ कॉरिडोर परियोजना ने पकड़ी रफ्तार
HighLights
हरिहरनाथ कॉरिडोर परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, भूमि सर्वेक्षण शुरू हुआ।
मंदिर क्षेत्र में छह अमीन भूमि पैमाइश में जुटे।
बाबा हरिहरनाथ धाम को विश्वस्तरीय धार्मिक केंद्र बनाएगा।
राहुल, नयागांव (सारण)। बाबा हरिहरनाथ धाम को विश्वस्तरीय धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में हरिहरनाथ कॉरिडोर परियोजना अब धीरे-धीरे धरातल पर उतरती दिखाई दे रही है। बहुप्रतीक्षित इस परियोजना के लिए प्रशासन ने मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भूमि सर्वेक्षण एवं सीमांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अंचल प्रशासन द्वारा छह अमीनों की प्रतिनियुक्ति की गई है, जो प्रस्तावित कॉरिडोर क्षेत्र में आने वाली जमीनों की पैमाइश, अभिलेखों के सत्यापन और वास्तविक स्थिति के आकलन का कार्य कर रहे हैं।
प्रशासनिक स्तर पर शुरू हुई यह प्रक्रिया परियोजना के क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि भूमि की स्थिति स्पष्ट होने और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही परियोजना के अगले चरणों को गति मिल सकेगी।
मंदिर क्षेत्र के समग्र विकास की योजना
बाबा हरिहरनाथ मंदिर सोनपुर की धार्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाला विश्वप्रसिद्ध सोनपुर मेला हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। इसके बावजूद मंदिर क्षेत्र में वर्षों से बुनियादी सुविधाओं की कमी महसूस की जाती रही है।
पार्किंग व्यवस्था, सुगम आवागमन, पेयजल, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर दर्शन व्यवस्था जैसी सुविधाएं लंबे समय से अपेक्षित रही हैं।
हरिहरनाथ कॉरिडोर परियोजना को इन सभी समस्याओं के समाधान के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इसके निर्माण से मंदिर परिसर का स्वरूप अधिक व्यवस्थित और आकर्षक बनेगा तथा श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाओं से युक्त बेहतर धार्मिक वातावरण उपलब्ध हो सकेगा। इससे सोनपुर की पहचान धार्मिक पर्यटन के एक बड़े केंद्र के रूप में और मजबूत होने की संभावना है।
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घनी आबादी के बीच सर्वे बना चुनौतीपूर्ण कार्य
मंदिर के आसपास का क्षेत्र घनी आबादी, पुराने आवासीय इलाकों, छोटे व्यवसायों और निजी स्वामित्व वाली जमीनों से घिरा हुआ है। ऐसे में भूमि सर्वेक्षण और सीमांकन की प्रक्रिया प्रशासन के लिए आसान नहीं मानी जा रही। कई स्थानों पर पुराने अभिलेखों और वर्तमान कब्जे की स्थिति में अंतर मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।
इसी कारण यह कार्य केवल तकनीकी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी संवेदनशील माना जा रहा है। प्रशासन के सामने चुनौती है कि सर्वेक्षण के दौरान पारदर्शिता बनाए रखते हुए स्थानीय लोगों का विश्वास कायम रखा जाए और किसी प्रकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
विकास के साथ स्थानीय हितों पर भी फोकस
परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है, लेकिन इसके साथ कुछ आशंकाएं भी सामने आ रही हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि मंदिर क्षेत्र का विकास आवश्यक है, परंतु यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि छोटे दुकानदारों, गरीब परिवारों और वर्षों से यहां रह रहे लोगों के हित प्रभावित न हों।
यदि परियोजना के तहत किसी प्रकार के विस्थापन की स्थिति उत्पन्न होती है तो पुनर्वास, उचित मुआवजा और वैकल्पिक व्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
स्थानीय जानकारों का मानना है कि किसी भी बड़ी धार्मिक एवं पर्यटन परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसमें स्थानीय समाज की भागीदारी और हितों का कितना ध्यान रखा जाता है।
पर्यटन और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
हरिहरनाथ कॉरिडोर को सोनपुर के आर्थिक और सामाजिक विकास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परियोजना के पूरा होने पर स्थानीय व्यापार, होटल एवं धर्मशालाओं, परिवहन सेवाओं, प्रसाद एवं पूजा सामग्री विक्रेताओं, फूल-माला व्यवसाय और अन्य छोटे कारोबारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकते हैं।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी ने बाबा हरिहरनाथ मंदिर पहुंचकर इसके विकास को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बताया था। बाद में राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 680 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की। इसके बाद प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर गतिविधियां तेज हुई हैं।
लोगों को उम्मीद है कि हरिहरनाथ कॉरिडोर के निर्माण के बाद सोनपुर धार्मिक पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र पर और अधिक मजबूत पहचान बनाएगा तथा बाबा हरिहरनाथ धाम की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत को नई ऊंचाई मिलेगी।
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