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    Makar Sankranti 2026: 15 जनवरी को मनेगा मकर संक्रांति पर्व, सूर्य के उत्तरायण होते ही खुलेंगे शुभ कार्यों के द्वार

    Updated: Tue, 06 Jan 2026 02:24 PM (IST)

    मकर संक्रांति पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। हृषिकेश पंचांग के अनुसार सूर्य देव 14 जनवरी रात 9:38 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे पुण्यकाल अगले द ...और पढ़ें

    15 जनवरी को मनेगा मकर संक्रांति पर्व

    15 जनवरी को मनेगा मकर संक्रांति पर्व

    HighLights

    1. हृषिकेश पंचांग के अनुसार सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी रात 9:38 बजे हो रहा है

    2. मकर संक्रांति के साथ सूर्यदेव का प्रवेश दक्षिणायन से उत्तरायण में होगा, जिससे शुभ कार्य किए जाएंगे

    3. पवित्र स्नान कर उड़द दाल, चावल, कंबल, धार्मिक पुस्तक, नए पंचांग आदि का दान करते है श्रद्धालु

    अरुण कुमार तिवारी, पानापुर(सारण)। भारतीय संस्कृति में ऋतु परिवर्तन, खगोलीय घटना और आध्यात्मिक चेतना के संगम का प्रतीक मकर संक्रांति पर्व इस वर्ष 15 जनवरी, गुरुवार को पूरे श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। सूर्य के धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही यह पर्व मनाने की परंपरा है। काशी से प्रकाशित हृषिकेश पंचांग के अनुसार सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात 9:38 बजे होगा।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि संक्रांति रात्रि काल में पड़ती है, तो उसका पुण्यकाल अगले दिन सूर्योदय से माना जाता है। इसी शास्त्रोक्त नियम के आधार पर इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाने का निर्णय लिया गया है।

    ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस दिन सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही विवाह, यज्ञ, गृह प्रवेश, मुंडन, भूमि पूजन जैसे सभी शुभ कार्यों की शुरुआत की जा सकेगी।

    मकर संक्रांति के साथ सूर्यदेव का दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश होता है, जिसे शास्त्रों में देवताओं का दिन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है।

    महाभारत काल में भीष्म पितामह द्वारा उत्तरायण की प्रतीक्षा कर प्राण त्यागने की कथा इस काल के महत्व को दर्शाती है। इस दिन से दिन बड़े होने लगते हैं और शिशिर ऋतु की विदाई के साथ प्रकृति में नवजीवन का संचार होता है।

    लोक परंपरा में मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की विशेष मान्यता है। श्रद्धालु गंगा, गंडक और सरयू जैसी पावन नदियों के तट पर स्नान कर दान-पुण्य करते हैं।

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    उड़द दाल, चावल, तिल, कंबल, धार्मिक पुस्तकें, वस्त्र और नए पंचांग का दान अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

    15 जनवरी को सूर्योदय के साथ ही दान-पुण्य का दौर प्रारंभ हो जाएगा। इस बार संक्रांति गुरुवार को पड़ने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ गया है।

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार गुरु और सूर्य दोनों ही सात्विक ऊर्जा, ज्ञान और समृद्धि के कारक हैं, जिससे इस वर्ष का संक्रांति पर्व विशेष फलदायी माना जा रहा है।

    मकर संक्रांति का पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि यह समाज को परोपकार, सकारात्मक सोच और परिश्रम का संदेश भी देता है।

    यह पर्व सूर्य की भांति तेजस्वी, अनुशासित और निरंतर गतिशील बने रहने की प्रेरणा देता है तथा दान के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक खुशियां पहुंचाने का अवसर प्रदान करता है।