Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    आंखों को सुरक्षित रखना है तो मोबाइल से बनाएं दूरी, अपनाएं ये नियम; डॉक्टरों की चेतावनी

    Updated: Mon, 06 Apr 2026 04:58 PM (IST)

    Mobile Addiction in Children: मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बच्चों के बचपन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे वे स्क्रीन के आदी हो रहे हैं। विशेषज्ञ ड ...और पढ़ें

    बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करें

    बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करें

    HighLights

    1. बच्चों में मोबाइल की लत से बढ़ रहा निकट दृष्टिदोष।

    2. स्क्रीन टाइम से मानसिक और सामाजिक विकास प्रभावित हो रहा है।

    3. अभिभावकों को बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित करने की सलाह।

    संवादसूत्र, मढ़ौरा (सारण)। तकनीक के तेजी से बढ़ते दौर में जहां मोबाइल फोन ने जीवन को आसान बनाया है, वहीं इसका नकारात्मक असर अब बच्चों के बचपन पर साफ दिखने लगा है। स्थिति यह है कि दो से तीन साल के बच्चे भी मोबाइल स्क्रीन के आदी होते जा रहे हैं।

    अभिभावकों की भूमिका पर सवाल

    अक्सर अभिभावक बच्चों को चुप कराने या व्यस्त रखने के लिए उनके हाथ में मोबाइल थमा देते हैं। धीरे-धीरे यह आदत लत में बदल जाती है, जिससे बच्चे वास्तविक गतिविधियों से दूर होते जा रहे हैं और उनका स्वाभाविक विकास प्रभावित हो रहा है।

    विशेषज्ञों ने जताई चिंता

    Akhanda Jyoti Eye Hospital के मेडिकल डायरेक्टर Dr. Ajit Poddar ने बताया कि बच्चों में मोबाइल का अत्यधिक उपयोग आंखों और मानसिक विकास दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।

    आंखों की समस्या तेजी से बढ़ी

    विशेषज्ञों के अनुसार लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों में Myopia यानी निकट दृष्टिदोष के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कम उम्र में ही बच्चों को चश्मा लगना अब आम होता जा रहा है, जो चिंता का विषय है।

    मानसिक और सामाजिक विकास पर असर

    मोबाइल की लत बच्चों की सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर रही है। वे धीरे-धीरे बाहरी दुनिया से कटने लगते हैं और उनका सामाजिक व्यवहार भी कमजोर होता जा रहा है, जिससे उनके समग्र विकास पर असर पड़ता है।

    खबरें और भी

    बाहरी गतिविधियों की कमी

    विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के लिए धूप में खेलना और बाहरी गतिविधियों में भाग लेना बेहद जरूरी है। लेकिन वर्तमान समय में बच्चे घर के अंदर मोबाइल तक सीमित हो गए हैं, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक संतुलन बिगड़ रहा है।

    समय रहते सतर्कता जरूरी

    विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करें और उन्हें खेल-कूद व सामाजिक गतिविधियों से जोड़ें। समय रहते उठाए गए कदम ही बच्चों के सुरक्षित बचपन और मजबूत भविष्य की नींव रख सकते हैं।

    यह भी पढ़ें- आंखों में नहीं पहनना है चश्मा, तो पिए ये देसी जूस: सेहत भी सुधरे, नजर भी होगी तेज