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    आधा एकड़ में 1.30 लाख का मुनाफा; जी-9 केले की आधुनिक खेती से सारण के क‍िसान ने लिखी सफलता की कहानी

    Updated: Mon, 08 Jun 2026 11:03 AM (IST)

    सारण के किसान संतोष कुमार ने पपीते की फसल बर्बाद होने के बाद जी-9 टिश्यू कल्चर केले की खेती अपनाई। अब वे आधे एकड़ से 1.30 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाकर ...और पढ़ें

    कुदरबाधा गांव में G-9 केले की फसल दिखाते किसान संतोष कुमार। जागरण

    कुदरबाधा गांव में G-9 केले की फसल दिखाते किसान संतोष कुमार। जागरण

    HighLights

    1. पपीते की बर्बादी के बाद जी-9 केले की खेती।

    2. आधे एकड़ से 1.30 लाख रुपये का शुद्ध लाभ।

    3. सारण के किसान संतोष कुमार बने प्रेरणास्रोत।

    पवन कुमार सिंह, गड़खा (सारण)। पूरी फसल बर्बाद हो जाए तो अधिकांश किसान खेती से ही मोहभंग कर बैठते हैं। लेकिन गड़खा प्रखंड के कुदरबाधा गांव निवासी किसान संतोष कुमार ने हार मानने के बजाय नई राह चुनी।

    पपीते की खेती में लाखों रुपये का नुकसान झेलने के बाद उन्होंने जी-9 टिश्यू कल्चर केले की खेती शुरू की और आज हर आधे एकड़ में करीब 1.30 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमा रहे हैं।

    उनकी सफलता अब क्षेत्र के किसानों और युवाओं के लिए मिसाल बन गई है।

    बाढ़ में डूब गई थी मेहनत और पूंजी

    संतोष कुमार बताते हैं कि वर्ष 2004 में आई भीषण बाढ़ ने उनकी पपीते की पूरी फसल तबाह कर दी थी। महीनों की मेहनत और निवेश कुछ ही दिनों में पानी में बह गया।

    आर्थिक नुकसान के साथ-साथ लोगों की आलोचनाएं भी झेलनी पड़ीं। कई लोगों ने खेती में नए प्रयोगों को उनकी गलती बताया, लेकिन संतोष ने हिम्मत नहीं हारी।

    वे कहते हैं, उस समय नुकसान बड़ा था, लेकिन मैंने तय किया कि खेती छोड़नी नहीं है, बल्कि कुछ नया करना है।

    महाराष्ट्र से मिली नई दिशा

    नई संभावनाओं की तलाश में संतोष ने देश के विभिन्न हिस्सों में हो रही आधुनिक खेती के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। इसी दौरान उन्हें महाराष्ट्र के जलगांव जिले में बड़े पैमाने पर हो रही जी-9 टिश्यू कल्चर केले की खेती के बारे में पता चला।

    उन्होंने कृषि विशेषज्ञों, उद्यान विभाग के अधिकारियों और सफल किसानों से संपर्क कर इसकी तकनीक, लागत, उत्पादन और बाजार की संभावनाओं का अध्ययन किया।

    सभी पहलुओं की जानकारी लेने के बाद उन्होंने आधा एकड़ भूमि में जी-9 केले की खेती शुरू करने का फैसला किया।

    आधा एकड़ में 600 पौधे, लागत 60 हजार तक

    संतोष कुमार बताते हैं कि आधा एकड़ खेत में करीब 600 पौधे लगाए जाते हैं। पौधों की खरीद पर लगभग 18 हजार रुपये खर्च होते हैं।

    खाद, सिंचाई, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों को मिलाकर कुल लागत 50 से 60 हजार रुपये तक पहुंचती है। वे बताते हैं कि टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार पौधे एक समान विकसित होते हैं, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों बेहतर रहती हैं।

    उचित देखभाल और आधुनिक तकनीक के कारण फसल की उत्पादकता भी अधिक होती है।

    18 माह में तैयार होती है फसल

    संतोष के अनुसार, पौधारोपण के 12 से 14 महीने बाद फलों का उत्पादन शुरू हो जाता है, जबकि 16 से 18 महीने में पूरी फसल बाजार में बेचने योग्य हो जाती है।

    आधा एकड़ खेत से उन्हें लगभग 1.80 लाख रुपये तक की आय प्राप्त होती है। सभी खर्च निकालने के बाद करीब 1.30 लाख रुपये का शुद्ध लाभ बचता है। यही कारण है कि अब यह खेती उनके परिवार की आय का प्रमुख आधार बन चुकी है।

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    युवाओं को दे रहे रोजगार और प्रेरणा

    संतोष कुमार का मानना है कि खेती को घाटे का सौदा मानने की सोच बदलनी होगी। उनका कहना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक अपनाएं और बाजार की मांग के अनुसार फसल का चयन करें तो खेती भी एक सफल व्यवसाय बन सकती है।

    वे क्षेत्र के किसानों और युवाओं को समूह बनाकर व्यावसायिक खेती करने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि सामूहिक खेती से लागत घटती है और उत्पाद का बेहतर मूल्य भी मिलता है।

    'किसानी से समृद्धि' का सपना

    संतोष का सपना है कि गांव के अधिक से अधिक किसान आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़ें और पारंपरिक खेती के साथ-साथ व्यावसायिक फसलों को अपनाएं।

    उनका कहना है कि यदि किसान संगठित होकर उत्पादन और विपणन पर ध्यान दें तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।

    पपीते की बर्बाद फसल से लेकर जी-9 केले की सफल खेती तक का सफर यह साबित करता है कि चुनौतियां चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, सही दिशा, आधुनिक तकनीक और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्हें सफलता में बदला जा सकता है।