तीन नदियां चढ़ीं तो लौट आया 2016 का डर, सारण में पानी के साथ पुराने जख्म भी हुए ताजा
सारण में गंगा, सरयू और गंडक नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की चिंता बढ़ गई है, जिससे लोगों को ...और पढ़ें

सारण में बाढ़ सिर्फ पानी नहीं, यादों का सैलाब भी
HighLights
सारण में गंगा, सरयू, गंडक का जलस्तर बढ़ा, बाढ़ की चिंता।
लोगों को 2016 की भयावह बाढ़ का मंजर याद आया।
डोरीगंज समेत तटीय क्षेत्रों में पुराने बाढ़ के जख्म ताजा।
अमृतेश, छपरा(सारण)। नदी की धार जब सीमा लांघती है तो खेत-खलिहान के साथ लोगों की पुरानी यादें भी डूबकर बाहर आ जाती हैं। सारण में इन दिनों गंगा, सरयू और गंडक के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है। तटीय और दियारा क्षेत्रों में पानी बढ़ने के साथ लोगों की सांसें भी थमने लगी हैं। सबसे ज्यादा खौफ उस याद का है, जिसे डोरीगंज के लोग आज भी नहीं भूल पाए हैं।
गंगा की लहरें डोरीगंज की ओर बढ़ती हैं तो लोगों की आंखों के सामने 2016 का मंजर तैरने लगता है। उस समय सोन के उफान ने सारण के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया था।
इसके बाद भी 2021 और 2024 में बाढ़ ने बड़े पैमाने पर गांवों को प्रभावित किया। ऐसे में इस बार तीन नदियों के एक साथ चढ़ने से पुराना डर फिर लौट आया है।
पानी बढ़ा तो याद आई वह बाढ़, जब सोन ने मचा दी थी तबाही
2016 में गंगा के जलस्तर में अत्यधिक वृद्धि के साथ सोन में इंद्रपुरी बराज से करीब 12 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इसका व्यापक असर सारण पर पड़ा था। सदर, गड़खा, रिविलगंज, दिघवारा, दरियापुर और सोनपुर प्रखंड तक बाढ़ का प्रभाव पहुंचा था।
डोरीगंज समेत तटीय इलाकों में लंबे समय तक पानी का दबाव बना रहा था। उस बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए नदी का बढ़ता जलस्तर आज भी सिर्फ आंकड़ा नहीं है। पानी की हर बढ़ती लहर पुराने संघर्ष और उस समय की मुश्किलों की याद दिलाती है।
2021 में 180 गांव डूबे, 2024 में भी नहीं बचा था सारण
बाढ़ की मार यहीं नहीं रुकी। वर्ष 2021 में गंगा-गंडक की व्यापक बाढ़ ने जिले की 176 पंचायतों के 180 गांवों को प्रभावित किया था। बड़ी आबादी को पानी और विस्थापन की परेशानी झेलनी पड़ी थी।
वर्ष 2024 में भी गंगा और गंडक के बढ़े जलस्तर ने 52 पंचायतों के 122 गांवों को प्रभावित किया था। लगातार आने वाली बाढ़ ने दियारा और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के मन में असुरक्षा की स्थायी छाप छोड़ दी है।
हर उफान के साथ लौटती है एक पुरानी कहानी
सारण के लिए बाढ़ कोई नई आपदा नहीं है। 2012 में गंगा के जलस्तर में बड़ी वृद्धि से डोरीगंज समेत तटीय क्षेत्र प्रभावित हुए थे। 2017 में गंडक का दबाव बढ़ा और गोपालगंज में सारण तटबंध टूटने के बाद बाढ़ की स्थिति बनी।
2019 और 2022 में भी गंगा-गंडक के बढ़ते जलस्तर ने दियारा और तटीय इलाकों की परेशानी बढ़ाई। 2023 में बाढ़ का प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित रहा, लेकिन नदी का स्वभाव यहां के लोगों को हर साल सतर्क रहने पर मजबूर करता है।
तीन नदियां एक साथ चढ़ीं तो डोरीगंज में फिर बढ़ी बेचैनी
2025 में गंगा, सोन और सरयू तीनों नदियों के जलस्तर में वृद्धि ने डोरीगंज समेत तटीय और दियारा क्षेत्रों में चिंता बढ़ा दी थी। स्थानीय लोगों ने तब भी हालात की तुलना 2016 की बाढ़ से की थी।
इस बार भी तीन प्रमुख नदियों के जलस्तर में वृद्धि ने लोगों को पुराने दिनों की याद दिला दी है। नदी किनारे बसे परिवारों की नजर अब लगातार पानी के स्तर पर है। हर सेंटीमीटर की बढ़ोतरी के साथ सवाल यही है कि इस बार पानी कहां तक पहुंचेगा।
फ्लैशबैक : जब-जब नदियां चढ़ीं, सारण ने झेली बाढ़ की मार
वर्ष नदियों की स्थिति सारण पर असर
- 2012 गंगा में बड़ी जलवृद्धि डोरीगंज समेत तटीय क्षेत्र प्रभावित
- 2016 गंगा का जलस्तर बेहद बढ़ा, सोन में करीब 12 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया सदर, गड़खा, रिविलगंज, दिघवारा, दरियापुर व सोनपुर प्रभावित
- 2017 गंडक का दबाव बढ़ा गोपालगंज में सारण तटबंध टूटने से बाढ़
- 2019 गंगा-गंडक में तेज वृद्धि कई दियारा क्षेत्रों में बाढ़
- 2021 गंगा-गंडक में व्यापक उफान 176 पंचायतों के 180 गांव प्रभावित
- 2022 गंगा-गंडक के जलस्तर में वृद्धि तटीय व दियारा क्षेत्रों में प्रभाव
- 2023 नदियों का प्रभाव अपेक्षाकृत कम बाढ़ का असर सीमित
- 2024 गंगा-गंडक में बड़ी वृद्धि 52 पंचायतों के 122 गांव प्रभावित
- 2025 गंगा, सोन व सरयू में जलस्तर बढ़ा डोरीगंज समेत तटीय व दियारा क्षेत्रों में चिंता
सारण में बाढ़ सिर्फ पानी नहीं, यादों का सैलाब भी है
सारण के दियारा में रहने वाले लोगों के लिए नदी जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन यही नदी जब उफनती है तो डर भी साथ लाती है। 2016 की याद, 2021 के 180 गांव और 2024 के 122 गांव आज भी लोगों के जेहन में हैं।
इसीलिए इस बार गंगा, सरयू और गंडक के एक साथ बढ़ते जलस्तर ने सिर्फ खेतों और गांवों की चिंता नहीं बढ़ाई है। पानी अभी बढ़ रहा है, लेकिन उसके साथ सारण के लोगों के जेहन में 2016 का डर भी फिर से जिंदा हो गया है।
