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    30 जुलाई से शिव आराधना का महापर्व सावन, 23 साल बाद बन रहा 'सोमवती नागपंचमी' का दुर्लभ संयोग

    Updated: Tue, 21 Jul 2026 03:10 PM (IST)

    सावन मास 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा, जिसमें चार सोमवार होंगे। इस बार 23 साल बाद तीसरी सोमवारी को सोमवती नागपंचमी का दुर्लभ संयोग बन रहा ह ...और पढ़ें

    30 जुलाई से शिव आराधना का महापर्व सावन (AI Generated Image)

    30 जुलाई से शिव आराधना का महापर्व सावन (AI Generated Image)

    HighLights

    1. सावन मास 30 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगा।

    2. तीसरी सोमवारी को 23 साल बाद सोमवती नागपंचमी।

    3. जलाभिषेक और महामृत्युंजय जाप का विशेष महत्व।

    जागरण संवाददाता, छपरा। भगवान शिव को समर्पित पवित्र श्रावण(सावन) मास इस वर्ष 30 जुलाई से प्रारंभ होकर 28 अगस्त तक चलेगा। पूरे माह शिवालयों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, शिव नाम का जाप,महामृत्युंजय मंत्र जाप और शिव आराधना की विशेष धूम रहेगी।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में भगवान भोलेनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना करने और सोमवारी व्रत रखने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

    इस बार सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं, जबकि तीसरी सोमवारी पर 23 वर्षों बाद सोमवती नागपंचमी का दुर्लभ संयोग बनने से इस बार का श्रावण मास और भी विशेष माना जा रहा है।

    30 जुलाई को शुभ योग में होगा सावन का आरंभ:

    भारत मिश्र संस्कृत महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अम्बरीश कुमार मिश्र ने बताया कि 30 जुलाई, गुरुवार को श्रवण नक्षत्र, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग के शुभ संयोग में श्रावण मास का आरंभ होगा।

    ऐसे शुभ योग में भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और व्रत का विशेष फलदायी महत्व बताया गया है। इस दिन शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और भस्म अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है।

    सावन में चार सोमवारी का रहेगा विशेष महत्व

    आचार्य अनित शुक्ल के अनुसार इस वर्ष सावन की पहली सोमवारी तीन अगस्त को पड़ेगी। दूसरी सोमवारी 10 अगस्त, तीसरी 17 अगस्त तथा चौथी एवं अंतिम सोमवारी 24 अगस्त को होगी।

    पहली सोमवारी के दिन ही नवविवाहित महिलाओं का प्रसिद्ध मधुश्रावणी महापर्व भी प्रारंभ होगा। अविवाहित कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति तथा विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य एवं परिवार की सुख-समृद्धि के लिए सोमवारी व्रत रखेंगी।

    23 साल बाद बनेगा सोमवती नागपंचमी का दुर्लभ योग

    पंडित संपत कुमार मिश्र ने बताया कि इस बार सावन की तीसरी सोमवारी यानी 17 अगस्त को नागपंचमी का पर्व मनाया जाएगा। वर्ष 2003 के बाद पहली बार नागपंचमी सोमवार के दिन पड़ रही है।

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    सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन है और नाग देवता उनके गले का आभूषण माने जाते हैं। ऐसे में सोमवार को नागपंचमी पड़ने से इसे सोमवती नागपंचमी कहा जाएगा।

    इस दिन शिवलिंग पर चंदन, गंगाजल मिश्रित दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होने की मान्यता है।

    जलाभिषेक व महामृत्युंजय जाप का रहेगा विशेष महत्व

    पंडित मनीष मिश्रा के अनुसार, सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक करने से रोग, शोक, बाधा और आर्थिक संकट दूर होते हैं। श्रद्धालु पूरे माह शिव नाम जाप,ॐ नमः शिवाय मंत्र, शिव पंचाक्षर स्तोत्र, रुद्राष्टक, शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करेंगे।

    पौराणिक मान्यता है कि समुद्र मंथन से निकले कालकूट विष का पान करने के बाद भगवान शिव की दाह शांत करने के लिए देवताओं ने जलाभिषेक किया था। तभी से सावन में जल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।

    गुरु पूर्णिमा और रक्षा बंधन से बढ़ेगी धार्मिक आभा

    सावन शुरू होने से एक दिन पहले 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु अपने गुरु का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे तथा नए साधकों के लिए गुरु मंत्र ग्रहण करना शुभ माना जाता है।

    वहीं, 28 अगस्त को सावन मास की पूर्णाहुति रक्षा बंधन के पावन पर्व के साथ होगी। एक ही दिन श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन का संयोग होने से धार्मिक आयोजनों की विशेष छटा देखने को मिलेगी।

    श्रावण मास के दौरान जिले के प्रमुख शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। मंदिर समितियां भी कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष तैयारियों में जुट गई हैं।