40 साल से जिस घर को अपना समझकर रहे, अब वहीं से उजड़ने का डर; एक नोटिस ने बिहार के गरीब परिवारों की नींद उड़ाई
शेखपुरा के गंगटी गांव में NH-33 किनारे 40 साल से रह रहे दर्जनों गरीब परिवारों को एक सप्ताह में घर खाली करने का नोटिस मिला है। बेघर होने के डर से ग्राम ...और पढ़ें

घर उजड़ने के डर से समाहरणालय पहुंचे ग्रामीण
HighLights
NH-33 किनारे 40 साल से रह रहे परिवारों को नोटिस।
एक सप्ताह में घर खाली करने का आदेश मिला।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पुनर्वास और समय मांगा।
जागरण संवाददाता, शेखपुरा। बरबीघा प्रखंड के गंगटी गांव में राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-33) के किनारे करीब चार दशक से रह रहे दर्जनों गरीब परिवारों के सामने अब बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है। सड़क किनारे बसे अनुसूचित जाति के परिवारों को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से एक सप्ताह के भीतर मकान खाली करने का नोटिस दिया गया है। नोटिस मिलने के बाद ग्रामीणों में चिंता और भय का माहौल है।
घर उजड़ने के डर से समाहरणालय पहुंचे ग्रामीण
शुक्रवार को गंगटी गांव के दर्जनों महिला और पुरुष समाहरणालय पहुंचे और जिलाधिकारी से मिलकर अपनी समस्या रखी।
ग्रामीणों में जदयू नेता अशर्फी मांझी, साको मांझी और सरिता देवी समेत कई लोग शामिल थे। ग्रामीणों ने डीएम को आवेदन सौंपकर मकान खाली करने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग की। साथ ही उन्होंने प्रशासन से पुनर्वास की व्यवस्था कराने की भी गुहार लगाई।
चार दशक से इसी जगह रह रहे परिवार
ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले करीब 40 वर्षों से इसी स्थान पर रह रहे हैं। उनके अनुसार पहले सड़क काफी चौड़ी थी और पीसीसी सड़क व नाले का निर्माण होने के बाद लोगों ने सड़क से हटकर अपने घर बनाए थे।
अब अचानक एक सप्ताह के भीतर मकान खाली करने का नोटिस मिलने से परिवारों के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई हुई तो उन्हें परिवार समेत खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर होना पड़ेगा।
बरसात में मकान टूटे तो बढ़ेगी परेशानी
ग्रामीणों ने आवेदन में कहा है कि फिलहाल बरसात का मौसम चल रहा है। ऐसे समय में मकान खाली कराने या तोड़ने की कार्रवाई होने से छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मानवीय आधार पर पर्याप्त समय देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था होने तक कार्रवाई को स्थगित रखा जाए।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के पास नहीं दूसरा ठिकाना
ग्रामीणों के अनुसार सभी परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं।
उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा स्थान उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यदि मकान हटा दिए गए तो परिवारों के सामने सिर छिपाने तक का संकट पैदा हो जाएगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें बेघर करने से पहले पुनर्वास की उचित व्यवस्था की जाए।
पुनर्वास या पर्याप्त समय देने की प्रशासन से अपील
समाहरणालय पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि मकान खाली कराने से पहले उन्हें सुरक्षित स्थान पर रहने की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
ग्रामीणों ने मांग की कि पुनर्वास की व्यवस्था होने तक उन्हें पर्याप्त समय दिया जाए, ताकि वे अपने परिवार के लिए वैकल्पिक ठिकाने का इंतजाम कर सकें।