यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 24, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Sitamarhi News: मेजरगंज बॉर्डर पर अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर की व्यवसायी की हत्या, गोलीबारी में एक घायल
Crime News कितनी गोलियां चली हैं पुलिस ने यह पूछे जाने पर कहा कि रात्रि का समय होने के कारण वहां पड़ताल नहीं हो सकी है। किसको कितनी गोलियां लगी इस बार ...और पढ़ें

HighLights
- अपराधियों ने की अंधाधुंध फायरिंग।
- मृतक का पूरा जीवन बॉर्डर पर ही बीता।
- पचहरवा एसएसबी कैंप से महज 50 मीटर की दूरी पर वारदात।
मेजरगंज (सीतामढ़ी), संवाद सूत्र: भारत-नेपाल सीमा पर मेजरगंज के पचहरवा एसएसबी कैंप से महज 50 मीटर की दूरी पर निर्माणाधीन बांध पर आलू-प्याज व्यवसायी बेलबा पररी गांव निवासी राजीव मेहता (40 वर्ष) की गोली मार हत्या कर दी गई।
बाइक सवार अपराधियों ने की अंधाधुंध फायरिंग
बाइक सवार तीन हथियारबंद अपराधी दुकान पर पहुंचे और दो व्यक्तियों ने अंधाधुंध फायरिंग की। जिससे दुकान में कार्य कर रहे एक राम पुकार पासवान (65 वर्ष) को भी गोली लगी। उनके दाहिने हाथ में गोली लगी है। सोमवार शाम करीब सात बजे गोलीबारी हुई। इसके बाद हमलावर भाग खड़े हुए।
थानाध्यक्ष लईक अहमद ने घटना की वजहों के बारे में कोई जानकारी मिलने से इनकार किया। बोले, अभी छानबीन चल रही है। चर्चा के मुताबिक, आपसी लेन-देन और रंजिश में यह घटना हुई हो सकती है। कोविड काल में राजीव मेहता भी तस्करी किया करते थे। तब जेल भी गए थे। जेल से छूटने के बाद बार्डर पर ही आलू-प्याज का व्यवसाय करने लगे।
पुलिस के अनुसार, दोनों को तत्काल मेजरगंज रेफरल अस्पताल ले जाया गया। जहां चिकित्सा पदाधिकारी डा. केके झा ने राजीव मेहता को मृत करार दिया। वही राम पुकार पासवान को प्राथमिक उपचार के बाद सदर अस्पताल रेफर कर दिया।
इधर, सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष लईक अहमद, पुलिस अवर निरीक्षक संजय कुमार अन्य पुलिसकर्मी रेफरल अस्पताल पहुंच गए। मृत राजीव मेहता के शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। गोली सिने और कनपटी में लगी हुई थी।
पूरा जीवन बार्डर पर ही बीता
कितनी गोलियां चली हैं पुलिस ने यह पूछे जाने पर कहा कि रात्रि का समय होने के कारण वहां पड़ताल नहीं हो सकी है। किसको कितनी गोलियां लगी इस बारे में भी पुलिस ने जानकारी से इनकार किया। अस्पताल में सीमावर्ती कुछ लोगों ने बताया कि राजीव मेहता का पूरा जीवन बार्डर पर ही बीता।